गायत्री मंत्र वेदों में उच्चारण की विधि - SOURCE VED VIGYAN BOOK and Social Media
गायत्री मंत्र वेदों में उच्चारण की विधि
जटा माला शिखा रेखा ध्वजो दण्डो रथो घनः।
अष्टौ विकृतयः प्रोक्ताः क्रमपूर्वा महर्षिभिः।।
आठ प्रकार के क्रम पाठ वर्णन में किये गये हैं अष्टौं विकृतयः प्रोक्ता क्रम पूर्वा मनीषिभिः । जटा, माला, शिव्या, लेखा, ध्वजो, दण्डी, रयो, घनः
इन आठ कम पाठों में से जटा और दण्ड प्रधान है,लेखा, ध्वज और रथ हैं। घन उपर्युक्त जटा और दण्ड के पीछे चलता है। इन क्रम पाठों में कुछ और भेद करके, प्रत्येक मन्त्र के ग्यारह ग्यारह प्रकार से पाठ करने का विधान किया गया है। ये पाठ काशी, मिथिला, नदिया और तथा मद्रास आदि में आज भी होते है
वेद के एक-एक शब्दो को जब ग्यारह ग्यारह बार पढ़ा जाता था तो किस प्रकार सम्भव हो सकता था कि उनमें किसी प्रकार की मिलावट हो सके । यहाँ हम सामवेद के पाठ का संक्षिप्त सा उदाहरण ऊपर दिया गया है

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