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Showing posts from April, 2012

संस्कृति - क्या सच में "आजादी बिना खड़क बिना ढाल" के मिली ? ....

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क्या सच में "आजादी बिना खड़क बिना ढाल" के मिली ? .... कृपया निम्न तथ्यों को बहुत ही ध्यान से तथा मनन करते हुए पढ़िये:- 1. 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन को ब्रिटिश सरकार कुछ ही हफ्तों में कुचल कर रख देती है। 2. 1945 में ब्रिटेन विश्वयुद्ध में ‘विजयी’ देश के रुप में उभरता है। 3. ब्रिटेन न केवल इम्फाल-कोहिमा सीमा पर आजाद हिन्द फौज को पराजित करता है, बल्कि जापानी सेना को बर्मा से भी निकाल बाहर करता है। 4. इतना ही नहीं, ब्रिटेन और भी आगे बढ़कर सिंगापुर तक को वापस अपने कब्जे में लेता है। 5. जाहिर है, इतना खून-पसीना ब्रिटेन ‘भारत को आजाद करने’ के लिए तो नहीं ही बहा रहा है। अर्थात् उसका भारत से लेकर सिंगापुर तक अभी जमे रहने का इरादा है। 6. फिर 1945 से 1946 के बीच ऐसा कौन-सा चमत्कार होता है कि ब्रिटेन हड़बड़ी में भारत छोड़ने का निर्णय ले लेता है? हमारे शिक्षण संस्थानों में आधुनिक भारत का जो इतिहास पढ़ाया जाता है, उसके पन्नों में सम्भवतः इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलेगा। हम अपनी ओर से भी इसका उत्तर जानने की कोशिश नहीं करते- क्योंकि हम बचपन से ही सुनते आये हैं- दे द...

संस्कृति - Film Marketing Promotion and Politics( फिल्म मार्केटिंग प्रमोशन राजनीती)

फिल्म के प्रमोशन दो तरह के होते हैं. एक अच्छा प्रमोशन और दूसरा बुरा. अच्छा प्रमोशन वह है, जिसमें लोगों में ख़ुशियां बांटी जाती हैं सकारात्मक मनोरंजन होता है और जिसमें लोग ख़ुशी-ख़ुशी शरीक होते हैं. बुरा प्रमोशन वह होता है, जिससे समाज में कलह, धार्मिक द्वेष और हिंसा फैलती है. अच्छे और बुरे प्रमोशन में यही फर्क़ होता है. फिल्म माई नेम इज ख़ान ने इतिहास में अपना नाम दर्ज़ करा लिया. यह कोई क्लासिक नहीं है और न ही यह फिल्म पापुलर कैटेगरी में दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे की तरह है. यह फिल्म दूसरे सप्ताह में ही अपनी हैसियत पर आ गई. दूसरे सप्ताह में ही सिनेमाघरों के मालिकों ने इस फिल्म को बाहर का रास्ता दिखा दिया या फिर इस फिल्म के शोज कम कर दिए. कई जगहों पर माई नेम इज ख़ान को हटाकर पुरानी फिल्में लगा दी गई हैं. इसके  बावजूद इस फिल्म को ग़लत वजहों के कारण याद किया जाएगा. फॉक्स-स्टार, शाहरुख ख़ान और करण जौहर ने इस फिल्म के लिए प्रमोशन का जो तरीक़ा अपनाया, उसे जानकर कोई भी इंसान हैरान हो जाएगा. मीडिया, नेता और सरकारों की मूर्खता का इससे बेहतर नमूना पहले कभी नहीं देखा गया माई नेम इज ख़ा...

संस्कृति - Proud to be Indian- हिंदुस्तान के गौरवशाली ऋषि-मुनियों का वैज्ञानिक इतिहास !

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हिंदुस्तान के गौरवशाली ऋषि-मुनियों का वैज्ञानिक इतिहास ! हिंदु वेदोंको मान्यता देते हैं और वेदोंमें विज्ञान बताया गया है । केवल सौ वर्षोंमें पृथ्वीको नष्टप्राय बनानेके मार्गपर लानेवाले आधुनिक विज्ञानकी अपेक्षा, अत्यंत प्रगतिशील एवं एक भी समाजविघातक शोध न करनेवाला प्राचीन ‘हिंदु विज्ञान’ था । ... पूर्वकालके शोधकर्ता हिंदु ऋषियोंकी बुद्धिकी विशालता देखकर आजके वैज्ञानिकोंको अत्यंत आश्चर्य होता है । पाश्चात्त्य वैज्ञानिकोंकी न्यूनता सिद्ध करनेवाला शोध सहस्रों वर्ष पूर्व ही करनेवाले हिंदु ऋषिमुनि ही खरे वैज्ञानिक शोधकर्ता हैं । गुरुत्वाकर्षणका गूढ उजागर करनेवाले भास्कराचार्य ! भास्कराचार्यजीने अपने (दूसरे) ‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथमें गुरुत्वाकर्षणके विषयमें लिखा है कि, ‘पृथ्वी अपने आकाशका पदार्थ स्व-शक्तिसे अपनी ओर खींच लेती हैं । इस कारण आकाशका पदार्थ पृथ्वीपर गिरता है’ । इससे सिद्ध होता है कि, उन्होंने गुरुत्वाकर्षणका शोध न्यूटनसे ५०० वर्ष पूर्व लगाया । * परमाणुशास्त्रके जनक आचार्य कणाद ! अणुशास्त्रज्ञ जॉन डाल्टनके २५०० वर्ष पूर्व आचार्य कणादजीने बताया कि, ‘द्रव्यक...

संस्कृति -Proud to be Indian-Gravitational Force

जिस समय न्यूटन के पुर्वज जंगली लोग थे ,उस समय मह्रिषी भाष्कराचार्य ने प्रथ्वी की... गुरुत्वाकर्षण शक्ति पर एक पूरा ग्रन्थ रच डाला था. किन्तु आज हमें कितना बड़ा झूंठ पढना पढता है कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति कि खोंज न्यूटन ने की ,ये हमारे लिए शर्म की बात है. भास्कराचार्य सिद्धान्त की बात कहते हैं कि वस्तुओं की शक्ति बड़ी विचित्र है। मरुच्लो भूरचला स्वभावतो यतो विचित्रावतवस्तु शक्त्य:।। - सिद्धांतशिरोमणि गोलाध्याय - भुवनकोश आगे कहते हैं- आकृष्टिशक्तिश्च मही तया यत् खस्थं गुरुस्वाभिमुखं स्वशक्तत्या। आकृष्यते तत्पततीव भाति समेसमन्तात् क्व पतत्वियं खे।। - सिद्धांतशिरोमणि गोलाध्याय - भुवनकोश अर्थात् पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है। पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से भारी पदार्थों को अपनी ओर खींचती है और आकर्षण के कारण वह जमीन पर गिरते हैं। पर जब आकाश में समान ताकत चारों ओर से लगे, तो कोई कैसे गिरे? अर्थात् आकाश में ग्रह निरावलम्ब रहते हैं क्योंकि विविध ग्रहों की गुरुत्व शक्तियाँ संतुलन बनाए रखती हैं। ऐसे ही अगर यह कहा जाय की विज्ञान के सारे आधारभूत अविष्कार भारत भूमि पर हमारे विशेषज्ञ...

संस्कृति - "एक भारतीय सियाचिन सैनिक का अपनी मरी हुई माँ को लिखा हुआ खत"

"एक भारतीय सियाचिन सैनिक का अपनी मरी हुई माँ को लिखा हुआ खत" प्रणाम माँ, माँ बचपन में मैं जब भी रोते रोते सो जाया करता था तो तू चुपके से मेरे सिरहाने खिलोने रख दिया करती थी और कहती थी की ऊपर से एक परी ने आके रखा है और कह गई है की अगर मैं फिर कभी रोया तो और खिलोने नहीं देगी ! लेकिन इस मरते हुए देश का सैनिक बनके रो तो मैं आज भी रहा हूँ पर अब ना तू आती है और ना तेरी परी ! परी क्या .. यहाँ ढाई हजार मीटर ऊपर तो परिंदा भी नहीं मिलता ! मात्र 14 हज़ार रुपए के लिए मुझे कड़े अनुशासन में रखा जाता है, लेकिन वो अनुशासन ना इन भ्रष्ट नेताओं के लिए है और ना इन मनमौजी देशवासियों केलिए ! रात भर जगते तो हम भी हैं लेकिन अपनी देश के सुरक्षा के लिए लेकिन वो जगते हैं लेट नाईट पार्टी के लिए ! हम इस -12 डिग्री में आग जला के अपने आप को गरम करते हैं . लेकिन हमारे देश के नेता हमारे ही पोशाकों, कवच, बन्दूकों, गोलियों और जहाजों में घोटाले करके अपनी जेबे गरम करते हैं ! आतंकियों से मुठभेड़ में मरे हुए सैनिकों की संख्या को न्यूज़ चैनल नहीं दिखाया जाता लेकिन सचिन के शतक से पहले आउट हो जान...

संस्कार- SANSKAR

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सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व ...है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस्कारों का महती योगदान है। प्राचीन काल में हमारा प्रत्येक कार्य संस्कार से आरम्भ होता था। उस समय संस्कारों की संख्या भी लगभग चालीस थी। जैसे-जैसे समय बदलता गया तथा व्यस्तता बढती गई तो कुछ संस्कार स्वत: विलुप्त हो गये। इस प्रकार समयानुसार संशोधित होकर संस्कारों की संख्या निर्धारित होती गई। गौतम स्मृति में चालीस प्रकार के संस्कारों का उल्लेख है। महर्षि अंगिरा ने इनका अंतर्भाव पच्चीस संस्कारों में किया। व्यास स्मृति में सोलह संस्कारों का वर्णन हुआ है। हमारे धर्मशास्त्रों में भी मुख्य रूप से सोलह संस्कारों की व्याख्या की गई है। इनमें पहला गर्भाधान संस्कार और मृत्यु के उपरांत अंत्येष्टि अंतिम संस्कार है। गर्भाधान के बाद पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण ये सभी संस्कार नवजात का दैवी जगत् से संबंध स्थापना के ...

संस्कृति - गुरुकुल छात्रावास - Gurukul Hostel

एक विद्दयालय के छात्रावास में एक कक्षा के सभी छात्रों को एक कमरे में रखने का प्रावधान था। वह छात्रावास ग्राम में स्थित था , वहाँ सूर्योदय के पश्चात बिजली चली जाती थी , जैसा कि होता है गुरुकुल आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं थी और ना ही वहाँ के छा...त्र ! इस कारण बिजली का कोई और विकल्प नहीं था , वहाँ सूर्योदय के बाद लालटैन जलाकर पढा करते थे । एक कक्षा के सभी छात्र आपस में लडा करते थे और रात को सभी अपनी अपनी लालटैन जला कर पढा करते थे इस कारण से ५-१० दिन में उनका मिट्टी का तेल समाप्त हो जाता था या वे उसे प्रतिदिन थोडी थोडी मात्रा में प्रयोग किया करते थे जिससे वे प्रतिदिन आधे से एक घँटा ही पढ पाते थे । जिसके कारण वे गुरुकुल में पिछडते जा रहे थे एक दिन गुरुकुल के एक अध्यापक ने इस समस्या को समझा व सभी छात्रों को समझाया कि इस प्रकार से लडने के कारण आप लोग अपना ही भविष्य का पतन कर रहे हैं एक छात्र को छोड सभी छात्रों के बात समझ में आयी उन्होंने लडना बंद किया व अपने थोडे थोडे मिट्टी के तेल को एकत्र कर प्रतिदिन एक लालटैन में डाल देते थे जिसके कारण प्रतिदिन लालटैन भी अधिक देर तक जलती व महीने के अंत तक ...

संस्कृति - भगवान कहाँ छुपे हैं ????? एक लघुकथा

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सुना था की ईश्वर पहले यहीं रहते थे ,इसी धरती पर ! लेकिन लोगों ने जान खा ली थी ,चौबीस घंटे सोने ही ना दें । जब देखो तब लोगों का ताँता लगा है दरवाजे पर खडे हैं ,कतार लगी हुई है इसको यह चाहिये ,उसको वह चाहिये और माँगे एसी कि एक की पूरी करो तो दूसरे दूसरे की माँग बिखर जाये ,दूसरे की माँग पूरी करो तो किसी तीसरे के लिये गडबड हो जाये । कोई कहता है आज बारिश हो जाये क्युँकि मैने बीज बोये हैं,कोई कहता है कि आज कडक धूप निकालना मैंने कपडे रंगे हैं उन्हें सुखाना है।अब परमात्मा क्या करे और... क्या ना करे हजारों लोग हजारों माँगे ।इसीलिये अपने सलाहकरों को बुलाया और कहा कि भैय्या अब मुझे कोई जगह बताओ जहाँ मैं छिप सकूँ ।अब भूल होगयी जो इंसान बना दिया। यह तो पता है कि इंसान को बनाने के बाद ईश्वर ने कुछ नहीं बनाया ,क्युँ नहीं बनाया ? बनाने से ही विरक्त हो गया आदमी को बनाकर समझ गया गडबड हो गयी अब रुक जाओ पूर्णविराम लगादो।आदमी जब तक नहीं बनाया तबतक बनाता ही चला गया ।गधे बनाये,घोडे बनाये, तब भी नहीं घबराया, शेर बनाया,बंदर बनाया,भालू बनाया ! नहीं रुका बडाही मस्त था उसी मस्ती में निर्माण होता चला ...

संस्कृति - निंदारस - Criticism

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इस दोहे में यही कहा गया है कि अपनी निंदा, आलोचना, बुराई करने वालों सदा अपने पास रखना चाहिए। अपनी आलोचना सुनकर उसे सुधारने से हमारा स्वभाव अच्छा होता है और हमारी कमियां दूर होती हैं। यह दोहा अति प्राचीन है और आज के युग में कोई अपनी बुराई कतई सुनना नहीं चाहता। भला मेरे काम में कमी कैसी? यही सोच है अधिकांश लोगों की। सभी चाहते हैं कि चारों ओर उनकी तारीफ हो, उनके कार्य में कमियां ना निकाले। परंतु जब उम्मीद के विपरित कोई बुराई या कमी निकाल देता है तो वहां उनका अहं जाग जाता है। लोगो...ं को मजा भी बुराई निकालने में ही आता है। दुसरों की बुराई करने को आज भी भाषा में निंदारस कहा जाने लगा है। बुराई करना जैसे एक फैशन हो गया है। किसी के अच्छे कार्यों को कोई एक बार भले याद ना करें परंतु यदि किसी से कोई चूक या गलती हो गई तो जैसे उसने गुनाह कर दिया। दरअसल व्यक्ति दूसरों की बुराई करके अपनी कमजोरियों को छुपाना चाहता है। वह यही दिखाना चाहता है कि कमियां सिर्फ मुझ ही में नहीं है। कुछ लोगों की सोच होती है जो कार्य मैं नहीं कर सकता या मुझसे नहीं हुआ तो उसे कोई और कैसे कर सकता है? परंतु जब कोई वह ...

संस्कृति - पूजन में तिलक लगाने का बड़ा महत्व

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पूजन में तिलक लगाने का बड़ा महत्व है। पूजन के अलावा रोजाना तिलक लगाना हमारे लिए लाभकारी है। आइए जानते हैं, कैसे?स्नान के बाद देवी-देवताओं की प्रतिमा को चंदन समर्पित किया जाता है। पूजन करने वाला भी अपने मस्तक पर चंदन का तिलक लगाता है। यह सुगंधित होता है तथा इसका गुण शीतलता देने वाला होता है। भगवान को चंदन अर्पण करने का भाव यह है कि हमारा जीवन आपकी कृपा से सुगंध से भर जाए तथा हमारा व्यवहार शीतल रहे यानी हम ठंडे दिमाग से काम करे। अक्सर उत्तेजना में काम बिगड़ता है। चंदन लगाने से ...उत्तेजना काबू में आती है। स्त्रियों को मस्तक पर कस्तूरी का तिलक या बिंदी लगाना चाहिए। गणेशजी, हनुमानजी, माताजी या अन्य मुर्तियों से सिंदूर निकालकर ललाट पर नही लगाना चाहिए। सिंदूर उष्ण होता है। चंदन का तिलक ललाट पर या छोटी सी बिंदी के रूप में दोनों भौहों के मध्य लगाया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंदन का तिलक लगाने से दिमाग में शांति, तरावट एवं शीतलता बनी रहती है। मस्तिष्क में सेराटोनिन व बीटाएंडोरफिन नामक रसायनों का संतुलन होता है। मेघाशक्ति बढ़ती है तथा मानसिक थकावट विकार नहीं होता।  

संस्कृति - 33 करोड़ देवी-देवता ?????

सामान्यत: कहा जाता है कि हिंदुओं के 33 करोड़ देवी-देवता हैं। इतने देवी-देवता कैसे? यह प्रश्न कई बार अधिकांश लोगों के मन में उठता है। शास्त्रों के अनुसार देवताओं की संख्या 33 कोटि बताई गई हैं। इन्हीं 33 कोटियों की गणना 33 करोड़ देवी-देवताओं के रूप में की जाती है। इन 33 कोटियों में आठ वसु, ग्यारह रुद्र, बारह आदित्य, इंद्र और प्रजापति शामिल है। इन्हीं देवताओं को 33 करोड़ देवी-देवता माना गया है। कुछ ...विद्वानों ने अंतिम दो देवताओं में इंद्र और प्रजापति के स्थान पर दो अश्विनीकुमारों को भी मान्यता दी है। श्रीमद् भागवत में भी अश्विनीकुमारों को ही अंतिम दो देवता माना गया है। इस तरह हिंदू देवी-देवताओं में तैंतीस करोड़ नहीं, केवल तैंतीस ही प्रमुख देवता हैं। कोटि शब्द के दो अर्थ हैं, पहला करोड़ और दूसरा प्रकार या तरह के। इस तरह तैंतीस कोटि को जो कि मूलत: तैंतीस तरह के देव-देवता हैं, उन्हें ही तैंतीस करोड़ माना गया है। __________________________________________________________

संस्कृति - आप धनी हैं you are RICH

१ – आप कल रात भूखे पेट नहीं सोये। २ – आप कल रात सड़क पर नहीं सोये। ३ – आपके पास आज सुबह नहाने के बाद पहनने के लिए कपड़े थे। ४ – आपने आज पसीना नहीं बहाया। ५ – आप आज एक पल के लिए भी भयभीत नहीं हुए। ६ – आप साफ़ पानी ही पीते हैं। ७ – आप बीमार पड़ने पर दवाएं ले सकते हैं। ८ – आप इसे इन्टरनेट पर पढ़ रहे हैं। ९ – आप इसे पढ़ रहे हैं। १० – आपको वोट देने का अधिकार है।

संस्कृति - The Law Of The Wild says kill only when you are hungry..

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Photographer Michel Denis captured these amazing pictures on safari in Kenya. He was astounded by what he saw: "These brothers (cheetahs) have been living together since they left their mother at about 18 months old, On the morning he saw them, they seemed not to be hungry, walking quickly but stopping sometimes to play together. 'At one ...point, they met a group of impala who ran away.. But one youngster was not quick enough and the brothers caught it easily'." Then extraordinary scenes followed; they just walked away without hurting him. Life is short... forgive quickly, love truly, laugh uncontrollably...and never regret anything that made you smile

संस्कृत बनेगी नासा की भाषा (Sanskrit the language of NASA)

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