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Showing posts from March, 2013

रस-प्रयोग:किस रोग में कौन सा रस लेंगे?

रस-प्रयोग:: किस रोग में कौन सा रस लेंगे? भूख लगाने के हेतुः प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। खाने से पहले अदरक का कचूमर सैंधव  नमक  के साथ लें। रक्तशुद्धिः नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस। दमाः लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का  सूप और बकरी का शुद्ध दूध लाभदायक है। घी, तेल, मक्खन वर्जित है। उच्च रक्तचापः गाजर, अंगूर, मोसम्मी और ज्वारों का रस। मानसिक तथा शारीरिक आराम आवश्यक है। निम्न रक्तचापः मीठे फलों का रस लें, किन्तु खट्टे फलों का उपयोग न करें। अंगूर और मोसम्मी का रस  अथवा दूध भी लाभदायक है। पीलियाः अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्मी। अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किसमिस का पानी।  गन्ने को चूसकर उसका रस पियें। केले में 1.5 ग्राम चूना लगाकर कुछ समय रखकर फिर खायें। मुहाँसों के दागः गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस। संधिवातः लहसुन, अदरक, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ  के ज्वारे। एसीडिटीः गाजर, पालक,...

संस्कृति - सनातन धर्म के अनुसार भोजन ग्रहण करने के कुछ नियम है

भोजन सम्बन्धी कुछ नियम १ पांच अंगो ( दो हाथ , २ पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे ! २. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है ! ३. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है ! ४. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए ! ५. दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है ! ६ . पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है ! ७. शैय्या पर , हाथ पर रख कर , टूटे फूटे वर्तनो में भोजन नहीं करना चाहिए ! ८. मल मूत्र का वेग होने पर , कलह के माहौल में , अधिक शोर में , पीपल , वट वृक्ष के नीचे , भोजन नहीं  करना चाहिए ! ९ परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए ! १०. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता की स्तुति कर के , उनका धन्यवाद देते हुए , तथा सभी  भूखो को भोजन प्राप्त हो इस्वर से ऐसी प्राथना करके भोजन करना चाहिए ! ११. भोजन बनने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से , मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाये और  सबसे पहले ३ रोटिया अलग निकाल कर ( गाय , कुत्ता , और कौवे हेतु ) फिर अग्नि देव का भोग लगा कर...

इलाज - अंग का सड़ जाना

कुछ चोट लग जाती है, और कुछ छोटे बहुत गंभीर हो जाती है। जैसे  कोई डाईबेटिक पेशेंट है चोट लग गयी तो उसका सारा दुनिया जहां एक  ही जगह है, क्योंकि जल्दी ठीक ही नही हो ता है। और उसके लिए  कितना भी चेष्टा करे करे डॉक्टर हर बार उसको सफलता नही मिलता  है। और अंत में वो चोट धीरे धीरे गैंग्रीन (अंग का सड़ जाना) में कन्वर्ट  हो जाती है। और फिर काटना पड़ता है, उतने हिस्से को शारीर से  निकालना पड़ता है। ऐसी परिस्तिथि में एक औषधि है जो गैंग्रीन को भी  ठीक करती है और Osteomyelitis (अस्थिमज्जा का प्रदाह) को भी  ठीक करती है। गैंग्रीन माने अंग का सड़ जाना, जहाँ पे नए कोशिका विकसित नही  होते। न तो मांस में और न ही हड्डी में और सब पुराने कोशिका मरते  चले जाते हैं। इसीका एक छोटा भाई है Osteomyelitis इसमें भी  कोशिका कभी पुनर्जीवित नही होते, जिस हिस्से में होता है उहाँ बहुत  बड़ा घाव हो जाता है और वो ऐसा सड़ता है के डॉक्टर कहता है की  इसको काट के ही निकलना है और कोई दूसरा उपाय नही है।। ऐसे  परिस्तिथि में जहा...

संस्कृति-Why 108 time Mantra Chanting Compulsory? 108 बार मंत्र जाप क्यूँ ?

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      The Wholeness in Number"9" and Power in Number "7"   Why is the use of 108 time of Mantra?  There are 12 zodiac signs and 9 planets. As the 9 planets move through the 12 signs, their positions affect us either negatively or positively. Chanting the Om Namah Shivaya 108 times (12 x 9 = 108 duh!), nullifies any negative effects and enhances positive effects of the planets on us!   Here are 54 letters in Sanskrit alphabets and Each has masculine and feminine, i.e. shiva and shakti 54 * 2 = 108 Time: Some say there are 108 feelings, with 36 related to the past, 36 related to the present, and 36 related to the future. Astrology: There are 12 constellations, and 9 arc segments called namshas or chandrakalas. 9 times 12 equals 108. Chandra is moon, and kalas are the divisions within a whole The diameter of the sun is 108 times the diameter of the Earth. 108 represents (1+0+8) = 9, where 9 represents 9 tattvas Nine Tattvas (Pri...

संस्कृति - Story - 99CLUB

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Once upon a time, there lived a King who, despite his luxurious lifestyle, was neither happy nor content. One day, the King came upon a servant who was singing happily while he worked. This fascinated the King; why was he, the Supreme Ruler of the Land, unhappy and gloomy, while a lowly servant had so much joy. The King asked the servant, 'Why are you so happy?' The man replied, 'Your Majesty, I am nothing but a servant, but my family and I don't need too much - just a roof over our heads and warm food to fill our tummies.' The king was not satisfied with that reply. Later in the day, he sought the advice of his most trusted advisor. After hearing the King's woes and the servant's story, the advisor said, 'Your Majesty, I believe that the servant Has not been made part of The 99 Club.' 'The 99 Club? And what exactly is that?' the King inquired. The advisor replied, 'Your Majesty, to truly know what The 99 Club is, place 99 Gold coins...