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Showing posts from June, 2012

संस्कृति - अँग्रेजी चिन्दियों मे सिसकती हिन्दी

Author   तनया गडकरी Published : Wednesday, Jun 27,2012, 17:42 IST प्रश्न सीधा-सहज था मगर मुझे चौंका गया...... एक विदेशी मित्र भारत आए। भारत में भारत को ना पाकर हैरान थे किन्तु उससे भी अधिक हिन्दी की चिन्दियों को देख परेशान थे। पहले एक अमेरिकन इंग्लिश इंस्टीट्यूट का विज्ञापन और उसके पश्चात मॉल में चिटपिट slang अँग्रेजी में गपियाते 'इंडियन यूथ' (भारतीय युवा कहूँ तो शायद ये 'यूथ' बुरा मान जाएँ!) को देख मुझसे पूछ बैठे- "आपके स्नातक पश्चिम के गँवारों की slang (अपशब्द व गलत उच्चारण युक्त भाषा) सीखते हैं? वह भी फीस देकर?" "अन्य भाषाओं से नए शब्द सीखना ठीक है। भाषा समृद्ध होती है। मगर ये कौनसी भाषा है जो संस्कृतियों की बजाय फूहड़ता ढोती है?” मैं क्या कहती? खिसियाकर बोली- "यह गँवारों की भाषा ही हमारे कॉल सेंटर्स मे धन बरसाती है। हाँ ये अलग बात है कि धन के साथ अक्सर 'गँवारो' की गालियां भी लाती है। तो क्या हुआ जो हम अपनी पहचान खो रहे हैं? आखिर हम 'ग्लोबल' हो रहे हैं। "यह वैश्वीकरण यानि ग्लोबलाइज़ेशन का सच है। देश में एक बहुत बड़ा ...

संस्कृति -The Great Ratan Tata Part 2

Why Ratan Tata's name is not on the billionaires list Here is a Real Story of Ratan Tata: So many people around the world want to know that " What is the Net Worth of Ratan Tata"? TATA Group is running 96 businesses and out of which 28 Companies are publicly listed on the various stock exchanges. Tata Group is world's top 50 Group according to Market capitalization and Reputation. Have you ever thought why Ratan Tata's name is not in the list of billionaire' s club? why Ratan Tata is not a billionaire on the Forbes magazine list of billionaire people of the world? The reason is that, TATA Group's 96 companies are held by its main Company "TATA Sons" and the main owner of this TATA Sons is not Ratan Tata but various charitable organizations developed and run by TATA Group. Out of which JRD TATA Trust & Sir Ratan Tata Trust are the main. 65% ownership of TATA Sons which is the key holding company of the other 96 TATA Group Comp...

संस्कृति -The Great RATAN TATA PART-1

What Ratan Tata did for the Mumbai victims.... what every Indian should know! Ratan Tata is the chairman of Indian Hotels who own the Taj Mahal Hotel Mumbai, which was the target of the terrorists on 26/11/08. Hotel President a 5 star property also belongs to Indian Hotels. The following is really touching. What Ratan Tata did for the Mumbai victims.... Don't miss!!!!!! SALUTE TO MR. RATAN TATA A. The Tata Gesture 1. All category of employees including those who had completed even 1 day as casuals were treated on duty during the time the hotel was closed. 2. Relief and assistance to all those who were injured and killed 3. The relief and assistance was extended to all those who died at the railway station, surroundings including the “Pav- Bha ji” vendor and the pan shop owners. 4. During the time the hotel was closed, the salaries were sent by money order. 5. A psychiatric cell was established in collaboration with Tata Institute of Social Sciences to counsel those who need...

संस्कृति -हमारे महान वैज्ञानिक

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संस्कृति -लाल किला शाहजहाँ से भी कई शताब्दी पहले प्रथवीराज चौहान द्वारा बनवाया हुवा लाल कोट है

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दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ से भी कई शताब्दी पहले प्रथवीराज चौहान द्वारा बनवाया हुवा लाल कोट है ----- क्या कभी किसी ने सोचा है  की इतिहास के नाम पर हम झूठ क्यों पढ़ रहे है?? सारे प्रमाण होते हुए भी झूठ को सच क्यों बनाया जा रहा है?? हम हिंदुओं की बुधि की आज ऐसी दशा हो गयी है की अगरएक आदमी की पीठ मे खंजर मार कर हत्या कर दी गयी हो और उसको आत्महत्या घोषित कर दिया जाए तो कोई भी ये भी सोचने का प्रयास नही करेगा की कोई आदमी खुद की पीठ मे खंजर कैसे मार सकता है....यही हाल है हम सब का की सच देख कर भी झूठ को सच माना फ़ितरत बना ली है हमने..... **दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ से भी कई शताब्दी पहले प्रथवीराज चौहान द्वारा बनवाया हुवा लाल कोट है** जिसको शाहजहाँ ने पूरी तरह से नष्ट करने की असफल कोशिश करी थी ताकि वो उसके द्वारा बनाया साबित हो सके..लेकिन सच सामने आ ही जाता है. *इसके पूरे साक्ष्या प्रथवीराज रासो से मिलते है *शाहजहाँ से २५० वर्ष पहले १३९८ मे तैमूर लंग ने पुरानी दिल्ली का उल्लेख करा है (जो की शाहजहाँ ...

संस्कृति -A discussion between Indian and Bhartiya (भारतीय और इंडियन)

यहाँ दो पात्र हैं : एक है भारतीय और एक है इंडियन ! आइए देखते हैं दोनों में क्या बात होती है ! इंडियन : ये शिव रात्रि पर जो तुम इतना दूध चढाते हो शिवलिंग पर, इस से अच्छा तो ये हो कि ये दूध जो बहकर नालियों में बर्बाद हो जाता है, उसकी बजाए गरीबों मे बाँट दिया जाना चाहिए ! त ुम्हारे शिव जी से ज्यादा उस दूध की जरुरत देश के गरीब लोगों को है. दूध बर्बाद करने की ये कैसी आस्था है ? भारतीय : सीता को ही हमेशा अग्नि परीक्षा देनी पड़ती है, कभी रावण पर प्रश्न चिन्ह क्यूँ नहीं लगाते तुम ? इंडियन : देखा ! अब अपने दाग दिखने लगे तो दूसरों पर ऊँगली उठा रहे हो ! जब अपने बचाव मे कोई उत्तर नहीं होता, तभी लोग दूसरों को दोष देते हैं. सीधे-सीधे क्यूँ नहीं मान लेते कि ये दूध चढाना और नालियों मे बहा देना एक बेवकूफी से ज्यादा कुछ नहीं है ! भारतीय : अगर मैं आपको सिद्ध कर दूँ की शिवरात्री पर दूध चढाना बेवकूफी नहीं समझदारी है तो ? इंडियन : हाँ बताओ कैसे ? अब ये मत कह देना कि फलां वेद मे ऐसा लिखा है इसलिए हम ऐसा ही करेंगे, मुझे वैज्ञानिक तर्क चाहिएं. भारतीय : ओ अच्छा, तो आप विज्ञान भी जानते हैं ? कितना पढ़े हैं आप ?...

संस्कृति -पता नहीं भारत में कब और कैसे ये छुआ-छूत का विषधर सांप घुस गया?

पता नहीं भारत में कब और कैसे ये छुआ-छूत का विषधर सांप घुस गया? पूर्वाग्रहों को छोड़ कर ज़रा तथ्यों व प्रमाणों की रोशनी में देखें तो पता चलता है कि भारत में जातियां तो थीं पर छुआ- छूत नहीं. स्वयं अंग्रेजों के द्वारा दिए आंकड़े इसके प्रमाण हैं. भारत को कमज़ोर बनाने की अनेक चालें चलने वाले अंग्रेजों ने आंकड़े जुटाने और हमारी कमजोरी व विशेषताओं को जानने के लिए सर्वे करवाए थे. उन सर ्वेक्षणों के तथ्यों और आज के झूठे इतिहास के कथनों में ज़मीन आस्मान का अंतर है. सन १८२० में एडम स्मिथ नामक अँगरेज़ ने एक सर्वेक्षण किया. एक सर्वेक्षण टी. बी. मैकाले ने १८३५ करवाया था. इन सर्वेक्षणों से ज्ञात और अनेक तथ्यों के इलावा ये पता चलता है कि तबतक भारत में अस्पृश्यता नाम की बीमारी नहीं थी. यह सर्वे बतलाता है कि— # तब भारत के विद्यालयों में औसतन २६% ऊंची जातियों के विद्यार्थी पढ़ते थे तथा ६४% छोटी जातियों के छात्र थे. # १००० शिक्षकों में २०० द्विज / ब्राह्मण और शेष डोम जाती तक के शिक्षक थे. स्वर्ण कहलाने वाली जातियों के छात्र भी उनसे बिना किसी भेद-भाव के पढ़ते थे. # मद्रास प्रेजीडेन्सी में तब १५०० ( ये भी ...

संस्कृति -A Hindu invented electric battery, proud to be hindu

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A Hindu invented electric battery, proud to be hindu. समान्यतः हम मानते हैं की विद्युत बैटरी का  आविष्कार बेंजामिन फ़्रेंकलिन ने किया था, किन्तु आपको यह जानकार सुखद आश्चर्य होगा की बैटरी के  बारे में सर्वप्रथम एक हिन्दू ने विश्व को बतलाया । यह जानकारी नरेश आर्य जी के सौजन्य से प्राप्त हुई है।  अगस्त्य संहिता में महर्षि अगस्त्य ने बैटरी निर्माण की विधि का वर्णन किया था । अगस्त्य संहिता में एक  सूत्र हैः संस्थाप्य मृण्मये पात्रे ता म्रपत्रं सुसंस्कृतम्‌। छादयेच्छिखिग्रीवेन चार्दाभि: काष्ठापांसुभि:॥ दस्तालोष्टो  निधात्वय: पारदाच्छादितस्तत:। संयोगाज्जायते तेजो मित्रावरुणसंज्ञितम्‌॥ अर्थात् एक मिट्टी का बर्तन  लें, उसमें अच्छी प्रकार से साफ किया गया ताम्रपत्र और शिखिग्रीवा (मोर के गर्दन जैसा पदार्थ अर्थात्  कॉपरसल्फेट) डालें। फिर उस बर्तन को लकड़ी के गीले बुरादे से भर दें। उसके बाद लकड़ी के गीले बुरादे के  ऊपर पारा से आच्छादित दस्त लोष्ट (mercury-amalgamated zinc sheet) रखे। इस प्रकार दोनों के  संयोग से अर्थात् तारों के द्वारा ज...

संस्कृति -हिन्दू विज्ञान और "जल संरक्षण"

हिन्दू संस्कृति सिर्फ सिर पटकने का धरम नहीं है ...... विज्ञान है ....आज का विज्ञान ....आज पूरी दुनिया में "जल ही जीवन है""पानी बचाओ""save water" पर  करोडो-अरबों-खरबों रुपये खर्च कर रही है ..... पर हमारी हिन्दू संस्कृति को यदि समझा जाए तो .......... १..हमारे यहाँ तालाब खुदवाना पुण्य था इस से "rain water harvesting" में सहयोग मिलता था ....और  धर्मं ग्रंथों में वर्णित है की मानव जीवन में एक बार ये पुण्य कार्य अवस्य करना चाहिए | २..शिव जी को जलाभिषेक  की परंपरा और अक्षत से पक्षियों को अन्ना और जल उपलब्ध हो जाता था | ३..हर मंदिर या देवालय पर कुण्ड या कुँए की परंपरा "rain water collection" का ही एक अंग था | ४..हर घर में एक कुआं होने से बरसात का पानी सीधे जमीन के भीतर पहुँच कर भूमिगत जल का स्तर  सही रखता था | ५..नदियों में स्नान करने में पुण्य के साथ अरबों लीटर पानी भी बचता था | मित्रों आज बड़े बड़े देशों और स्वयं भारत में गाँव गाँव में तालाबों के संरक्षण और सुन्दरीकरण के लिए  योजनायें कम कर रही हैं ....क्यों की आज बड़े बड़े ...

संस्कृति -वेदों में परिवर्तन क्यों नहीं हो सकता?

(युगों से वेदों की अपरिवर्तनशीलता कैसे सुनिश्चित है, यह जानने के लिए ध्यानपूर्वक इस लेख को पढ़ें | हम उन अनेक विद्वानों के आभारी  हैं, जिनके मूल स्त्रोत तो अज्ञात हैं परन्तु जिनके ज्ञान को इस लेख में प्रयुक्त किया गया है|) वेदों को उनकी आरंभिक अवस्था में कैसे संरक्षित किया गया, इस पर यहाँ कुछ विश्लेषणात्मक और निष्पक्ष सुझाव प्रस्तुत किये गए हैं | वेदों को  अपने विशुद्ध स्वरुप में बनाये रखने और उनमें किंचित भी फेर बदल की संभावना न  होने के कारणों को हम यहाँ विस्तार से देखेंगे |  विश्व का अन्य कोई भी मूलग्रंथ संरक्षण की इतनी सुरक्षित पद्धति का दावा नहीं कर सकता है |  हमारे पूर्वजों (ऋषियों )  ने विभिन्न प्रकार से वेद मन्त्रों को स्मरण करने की विधियाँ अविष्कृत कीं, जिनसे वेदमन्त्रों की स्वर-संगत और उच्चारण का रक्षण भी हुआ | वेदों  का  स्वर-रक्षण हमारे पूर्वजों ने नियमों के आधार पर यह सुनिश्चित किया कि मंत्र का गान करते हुए एक भी अक्षर, मात्रा या स्वर में फेरबदल न हो सके और मंत्र के गायन से पूर्ण लाभ प्राप्त हो सके | उन्होंने शब्द के प्रत्येक अ...

संस्कृति -परंपरा-1

जनेऊ पहनने से क्या लाभ? पूर्व में बालक की उम्र आठ वर्ष होते ही उसका यज्ञोपवित संस्कार कर दिया जाता था। वर्तमान में यह प्रथा लोप सी गयी है। जनेऊ पहनने का हमारे स्वास्थ्य से सीधा संबंध है। विवाह से पूर्व तीन धागों की तथा विवाहोपरांत छह धागों की जनेऊ धारण की जाती है। पूर्व काल में जनेऊ पहनने के पश्चात ही बालक को पढऩे का अधिकार मिलता था। मल-मूत्र विसर्जन के पूर्व जनेऊ को कानों पर कस कर दो बार लपेटना प ड़ता है। इससे कान के पीछे की दो नसे जिनका संबंध पेट की आंतों से है। आंतों पर दबाव डालकर उनको पूरा खोल देती है। जिससे मल विसर्जन आसानी से हो जाता है तथा कान के पास ही एक नस से ही मल-मूत्र विसर्जन के समय कुछ द्रव्य विसर्जित होता है। जनेऊ उसके वेग को रोक देती है, जिससे कब्ज, एसीडीटी, पेट रोग, मूत्रन्द्रीय रोग, रक्तचाप, हृदय रोगों सहित अन्य संक्रामक रोग नहीं होते। जनेऊ पहनने वाला नियमों में बंधा होता है। वह मल विसर्जन के पश्चात अपनी जनेऊ उतार नहीं सकता। जब तक वह हाथ पैर धोकर कुल्ला न कर ले। अत: वह अच्छी तरह से अपनी सफाई करके ही जनेऊ कान से उतारता है। यह सफाई उसे दांत, मुंह, पेट, कृमि, जिवाणुओं क...