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Showing posts from June, 2015

Ramayana is Real

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http:// www.deccanchronicle.com/ 150618/ nation-current-affairs/ article/ ramayana-real-say-experts   Two Chennai-based botanists have come out with a three-year-long study which establishes that the Ramayan is a true life story authored by Valmiki, incorporating facts, figures, science and environment of the period. http:// www.dailypioneer.com/ todays-newspaper/ ramayan-era-plants-bear-wit ness-to-vanvas-route.html

मौत के बाद क्या होता है?

मौत के बाद क्या होता है? 'न तो यह शरीर तुम्हारा है और न ही तुम इस शरीर के हो। यह शरीर पांच तत्वों से बना है- अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश। एक दिन यह शरीर इन्हीं पांच तत्वों में विलीन हो जाएगा।'-ऐसा भगवान कृष्ण ने भागवत गीता में कहा है जब शरीर छूटता है तो व्यक्ति के साथ क्या होता है यह सवाल सदियों पुराना है। इस संबंध में जनमानस के चित्त पर रहस्य का पर्दा आज भी कायम है जबकि इसका हल खोज लिया गया है। फिर भी यह बात विज्ञान सम्मत नहीं मानी जाती, क्योंकि यह धर्म का विषय है। मुख्यत: तीन तरह के शरीर होते हैं- स्थूल, सूक्ष्म और कारण। व्यक्ति जब मरता है तो जीवनी शक्ति स्थूल शरीर छोड़कर पूर्णत: सूक्ष्म में ही विराजमान हो जाती है। सूक्ष्म शरीर के विसरित होने के बाद व्यक्ति दूसरा शरीर धारण कर लेता है, लेकिन कारण शरीर बीज रूप है जो अनंत जन्मों तक हमारे साथ रहता है। आत्मा शरीर में रहकर चार स्तर से गुजरती है : छांदोग्य उपनिषद (8-7) के अनुसार आत्मा चार स्तरों में स्वयं के होने का अनुभव करती है- (1)जाग्रत (2)स्वप्न (3)सुषुप्ति और (4)तुरीय अवस्था। तीन स्तरों का अनुभव प्रत्येक मनुष्य...

Masterpiece on Economics

One day a tourist comes to the only hotel in a debt ridden town in Kenya. He lays a 100 dollar note on the table & goes to inspect the rooms. Hotel owner takes the note & rushes to pay his debt to the butcher. Butcher runs to pay the pig farmer. Pig farmer runs to pay the feed supplier. Supplier runs to pay the prostitute, who in these hard times gave her services on credit. Prostitute then runs to pay off her debt to the hotel owner for the rooms she rented for her clients. Hotel owner then lays the 100 dollar note back on the counter. The tourist comes down, takes his money & leaves as he did not like the rooms. No one earned anything.  But that group of people is now without debt & looks to the future with a lot of optimism. And that is how the world is doing business today!

कहीं ऐसा जीवन तो नहीं जी रहे

कहीं ऐसा जीवन तो नहीं जी रहे   👉🌹💙 नंगे पाँव चलते "इन्सान" को लगता है कि "चप्पल होते तो कितना अच्छा होता" बाद मेँ.......... "साइकिल होती तो कितना अच्छा  होता" उसके बाद में......... "मोपेड होती तो थकान नहीं लगती" बाद में......... "मोटर साइकिल होती तो बातों- बातों मेँ रास्ता कट जाता" फिर ऐसा लगा कि......... "कार होती तो धूप नहीं लगती" फिर लगा कि, "हवाई जहाज होता तो इस ट्रैफिक का झंझट नहीं होता" जब हवाई जहाज में बैठकर नीचे हरे-भरे घास के मैदान देखता है तो सोचता है, कि "नंगे पाव घास में चलता तो दिल को कितनी "तसल्ली" मिलती"..... "जरुरत के मुताबिक "जिंदगी" जिओ "ख्वाहिश"..... के मुताबिक नहीं......... क्योंकि 'जरुरत' तो 'फकीरों' की भी 'पूरी' हो जाती है,  और 'ख्वाहिशें'..... 'बादशाहों ' की भी "अधूरी" रह जाती है"..... "जीत" किसके लिए, 'हार' किसके लिए 'ज़िंदगी भर' ये ...

CORN FARMER A NICE STORY

NICE STORY There was a farmer who grew excellent quality corn. Every year he won the award for the best grown corn. One year a newspaper reporter interviewed him and learned something interesting about how he grew it. The reporter discovered that the farmer shared his seed corn with his neighbors. “How can you afford to share your best seed corn with your neighbors when they are entering corn in competition with yours each year?” the reporter asked. “Why sir,” said the farmer, “Didn’t you know? The wind picks up pollen from the ripening corn and swirls it from field to field. If my neighbours grow inferior corn, cross-pollination will steadily degrade the quality of my corn. If I am to grow good corn, I must help my neighbours grow good corn.” So is with our lives... Those who want to live meaningfully and well must help enrich the lives of others, for the value of a life is measured by the lives it touches. And those who choose to be happy must help others ...

एक सकारात्मक सोच

एक सकारात्मक सोच  💐💐💐💐💐💐 एक महान लेखक अपने लेखन कक्ष में बैठा हुआ लिख रहा था। **पिछले साल मेरा आपरेशन हुआ और मेरा गाल ब्लाडर निकाल दिया गया। इस आपरेशन के कारण बहुत लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा। **इसी साल मैं 60 वर्ष का हुआ और मेरी पसंदीदा नौकरी चली गयी। जब मैंने उस प्रकाशन संस्था को छोड़ा तब 30 साल हो गए थे मुझे उस कम्पनी में काम करते हुए। **इसी साल मुझे अपने पिता की मृत्यु का दुःख भी झेलना पड़ा। **और इसी साल मेरा बेटा कार एक्सिडेंट हो जाने के कारण मेडिकल की परिक्षा में फेल हो गया क्योंकि उसे बहुत दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। कार की टूट फूट का नुकसान अलग हुआ। अंत में लेखक ने लिखा, **वह बहुत ही बुरा साल था। जब लेखक की पत्नी लेखन कक्ष में आई तो उसने देखा कि, उसका पति बहुत दुखी लग रहा है और अपने ही विचारों में खोया हुआ है।अपने पति की कुर्सी के पीछे खड़े होकर उसने देखा और पढ़ा कि वो क्या लिख रहा था? वह चुपचाप कक्ष से बाहर गई और थोड़ी देर बाद एक दुसरे कागज़ के साथ वापस लौटी और वह कागज़ उसने अपने पति के लिखे हुए कागज़ के बगल में रख दिया। लेखक ने पत्नी के रखे कागज़ पर देखा ...

रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के बीच एक दुर्लभ संवाद

🙏 रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के बीच एक दुर्लभ संवाद स्वामी विवेकानंद   :  मैं समय नहीं निकाल पाता. जीवन आप-धापी से भर गया है. रामकृष्ण परमहंस   :  गतिविधियां तुम्हें घेरे रखती हैं. लेकिन उत्पादकता आजाद करती है. स्वामी विवेकानंद     :  आज जीवन इतना जटिल क्यों हो गया है?          रामकृष्ण परमहंस   :  जीवन का विश्लेषण करना बंद कर दो. यह इसे जटिल बना देता है. जीवन को सिर्फ जिओ. स्वामी विवेकानंद     :  फिर हम हमेशा दुखी क्यों रहते हैं?        रामकृष्ण परमहंस   :  परेशान होना तुम्हारी आदत बन गयी है. इसी वजह से तुम खुश नहीं रह पाते. स्वामी विवेकानंद     :  अच्छे लोग हमेशा दुःख क्यों पाते हैं? रामकृष्ण परमहंस   :  हीरा रगड़े जाने पर ही चमकता है. सोने को शुद्ध होने के लिए आग में तपना पड़ता है. अच्छे लोग दुःख नहीं पाते बल्कि परीक्षाओं से गुजरते हैं. इस अनुभव ...

TWO VERSIONS OF INDIA

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