हैलो माँ ... में रवि बोल रहा हूँ....,कैसी हो माँ....? मैं.... मैं…ठीक हूँ बेटे.....,ये बताओ तुम और बहू दोनों कैसे हो? हम दोनों ठीक है माँ...आपकी बहुत याद आती है…,...अच्छा सुनो माँ,में अगले महीने इंडिया आ रहा हूँ..... तुम्हें लेने। क्या...? हाँ माँ....,अब हम सब साथ ही रहेंगे....,नीतू कह रही थी माज़ी कोअमेरिका ले आओ वहाँ अकेली बहुत परेशान हो रही होंगी। हैलो ....सुनरही हो माँ...? “हाँ...हाँ बेटे...“,बूढ़ी आंखो से खुशी की अश्रुधारा बह निकली,बेटे और बहू का प्यार नस नस में दौड़ने लगा। जीवन के सत्तर साल गुजार चुकीसावित्री ने जल्दी सेअपने पल्लू से आँसू पोंछे और बेटे से बात करने लगी। पूरे दो साल बाद बेटाघर आ रहा था। बूढ़ी सावित्री ने मोहल्ले भरमे दौड़ दौड़ कर ये खबर सबको सुना दी। सभी खुश थे की चलो बुढ़ापा चैनसे बेटे और बहू के साथ गुजर जाएगा। रवि अकेला आया था,उसने कहा की माँ हमे जल्दी ही वापिस जाना है इसलिए जो भी रुपया पैसा किसी से लेना है वो लेकर रखलों और तब तक मे किसी प्रोपेर्टी डीलर से मकानकी बात करता हूँ। “मकान...?”,माँ ने पूछा। हाँ माँ,अब ये मकान बेचना पड़ेगा वरना कौन इसकी देखभाल करेगा। हम...