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Showing posts from December, 2012

संस्कृति -हिंदू क्यों कहते हैं 'नमस्ते'? NAMASTE

हिंदू क्यों कहते हैं 'नमस्ते'? शास्त्रों में पाँच प्रकार के अभिवादन बतलाये गए है जिन में से एक है  "नमस्ते " या "नमस्कार "। आदर के निम्न प्रकार है : 1-प्रत्युथान : किसी के स्वागत में उठ कर खड़े होना 2-नमस्कार : हाथ जोड़ कर सत्कार करना 3-उपसंग्रहण : बड़े, बुजुर्ग, शिक्षक के पाँव छूना 4-साष्टांग : पाँव, घुटने, पेट, सर और हाथ के बल जमीन पर पुरे लेट  कर सम्मान करना 5-प्रत्याभिवादन : अभिनन्दन का अभिनन्दन से जवाब देना ---------------------------------------------------------------

STORY 20

आज ही क्यों नहीं ? एक बार की बात है कि एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था |गुरु भी अपने इस  शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था  |सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश करता तथा आज के काम को कल के लिए छोड़ दिया करता था |  अब गुरूजी कुछ चिंतित रहने लगे कि कहीं उनका यह शिष्य जीवन-संग्राम में पराजित न हो जाये|आलस्य  में व्यक्ति क ो अकर्मण्य बनाने की पूरी सामर्थ्य होती है |ऐसा व्यक्ति बिना परिश्रम के ही फलोपभोग की  कामना करता है| वह शीघ्र निर्णय नहीं ले सकता और यदि ले भी लेता है,तो उसे कार्यान्वित नहीं कर पाता|  यहाँ तक कि अपने पर्यावरण के प्रति भी सजग नहीं रहता है और न भाग्य द्वारा प्रदत्त सुअवसरों का लाभ  उठाने की कला में ही प्रवीण हो पता है | उन्होंने मन ही मन अपने शिष्य के कल्याण के लिए एक योजना  बना ली |एक दिन एक काले पत्थर का एक टुकड़ा उसके हाथ में देते हुए गुरु जी ने कहा –‘मैं तुम्हें यह  जादुई पत्थर का टुकड़ा, दो दिन के लिए दे कर, कहीं दूसरे गा...

STORY 18

एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोजाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहां से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी , वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी जिसे कोई भी ले सकता था . एक कुबड़ा व्यक्ति रोज उस रोटी को ले जाता और वज ाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बडबडाता "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा " दिन गुजर...ते गए और ये सिलसिला चलता रहा ,वो कुबड़ा रोज रोटी लेके जाता रहा और इन्ही शब्दों को बडबडाता "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा " वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी कि "कितना अजीब व्यक्ति है ,एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है और न जाने क्या क्या बडबडाता रहता है , मतलब क्या है इसका ". एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और बोली "मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी ". और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में जहर मिला दीया जो वो रोज उसके लिए बनाती थी और जैसे ही उसने रोटी को को ख...

STORY 17

अस्पताल के उस विशाल परिसर में एक चिंतित सैन्यकर्मी किसी शख्स को खोज रहा था। वह काफी थका हुआ भी था। तभी अस्पताल की एक नर्स उसे एक बीमार बुजुर्ग के पलंग के नजदीक ले गई, जो मरने से पहले आखिरी बार अपने बेटे से मिलना चाहता था। नर्स ने धीरे-से उस बीमार बुजुर्ग से कहा- 'आपका बेटा यहां है।' कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर उसने दोबारा कहा- 'देखो कौन आया है? आपका बेटा।' यह सुनकर बीमार शख्स ने आंखें खोल दीं। उस  े दिल का दौरा पड़ा था और वह दवाइयों के नशे में था। उसने धुंधली आंखों से अपने पलंग के नजदीक यूनिफॉर्म में खड़े युवा मेरीन को देखा। यह देखकर उसने उसकी ओर अपना हाथ बढ़ाया। मेरीन ने उसके हाथ को थाम लिया और उसे प्यार से सहलाने लगा। तब तक नर्स कुर्सी लेकर आ गई और मेरीन पलंग के बाजू में बैठ गया। पूरी रात मेरीन उस कम रोशनी वाले वार्ड में बुजुर्ग शख्स के पास उसका हाथ थामे बैठा रहा और अपने प्यार भरे शब्दों के जरिये हौसला देता रहा। बीच-बीच में आकर नर्स मेरीन से थोड़ी देर आराम करने के लिए भी कहती रही। लेकिन मेरीन इनकार कर देता। वह मरणासन्न बुजुर्ग रातभर कुछ नहीं बोला। बस अपने बेटे का हाथ ...

STORY 16

शादी की पहली रात को नवविवाहित जोड़े ने तय किया की सुबह कोई भी बिना कारण दरवाजा खटखटाएगा तो वो दरवाजा नहीं खोलेंगे. सुबह पति के माँ ने दरवाजा खटखटाया. दोनों ने एक दूसरे को देखा.और रात में जैसा तय किया था उस अनुसार उन्होंने दरवाज़ा नहीं खोला. थोड़ी देर बाद पत्नी के पिता ने दरवाजा खटखटाया. दोनों ने फिर एक दूसरे की और देखा. पत्नी के आँखों से आंसू बहने लगे और उसने रोना शुरू कर दिया. बोली "मैं अपने पिता को  ऐसे ही दरवाज़ा खटखटाते नहीं छोड़ सकती, मैं पहले ही उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर आयी हूँ, उन्हें कितना दुःख होगा अगर मैंने दरवाज़ा नहीं खोला तो." पति ने कुछ नहीं कहा, पत्नी ने दरवाजा खोल दिया. कई साल बीत गए, इस युगल के 3 बच्चे हुए, जिनमे से पहले 2 लड़के थे और आख़िरी लड़की. जब लड़की ने जन्म लिया तो उस व्यक्ति को बहुत खुशी हुई, उसे ऐसा लगा जैसे उसे भगवान ने ज़िंदगी का सबसे बड़ा उपहार दिया है. उसने काफी बड़ा जश्न मनाया, और कई लोगो को बुलाया. जश्न के दौरान उससे एक व्यक्ति ने पूछा की क्यों वह बेटी होने के खुशी में इतना जश्न मना रहा है, जबकी किसी भी बेटे के जन्म पर उसने जश्न नहीं मनाया....

STORY 15

नाव चली जा रही थी। मझदार में नाविक ने कहा, "नाव में बोझ ज्यादा है, कोई एक आदमी कम हो जाए तो अच्छा, नहीं तो नाव डूब जाएगी।" अब कम हो जए तो कौन कम हो जाए? कई लोग तो तैरना नहीं जानते थे: जो जानते थे उनके लिए भी परले चार जाना खेल नहीं था। नाव में सभी प्रकार के लोग थे-डाक्टर,अफसर,वकील,व्यापारी, उद्योगपति,पुजारी,नेता के अलावा आम आदमी भी। डाक्टर,वकील,व्यापारी ये सभी चाहते थे कि आम आदमी पानी में कूद जा ए। वह तैरकर पार जा सकता है, हम नहीं। उन्होंने आम आदमी से कूद जाने को कहा, तो उसने मना कर दिया। बोला, "मैं जब डूबने को हो जाता हूँ तो आप में से कौन मेरी मदद को दौड़ता है, जो मैं आपकी बात मानूँ? " जब आम आदमी काफी मनाने के बाद भी नहीं माना, तो ये लोग नेता के पास गए, जो इन सबसे अलग एक तरफ बैठा हुआ था। इन्होंने सब-कुछ नेता को सुनाने के बाद कहा, "आम आदमी हमारी बात नहीं मानेगा तो हम उसे पकड़कर नदी में फेंक देंगे।" नेता ने कहा, "नहीं-नहीं ऐसा करना भूल होगी। आम आदमी के साथ अन्याय होगा। मैं देखता हूँ उसे। मैं भाषण देता हूँ। तुम लोग भी उसके साथ सुनो।" नेता ने जोशीला...

STORY 14

मेरे बच्चे जब तुम हमें एक दिन बूढा और कमज़ोर देखोगे, तब संयम रखना और हमें समझने की कोशिश करना। अगर हम से खाना खाते वक्त कपड़े गंदे हो जाएं, अगर हम खुद कपड़े न पहन सकें तो जरा याद करना जब बचपन में तुम हमारे हाथ से खाते और कपड़े पहनते थे। अगर हम तुमसे बात करते वक्त एक ही बात बार बार दोहराएं तो गुस्सा खाकर हमें मत टोकना, धैर्य से हमें सुनना, याद करना, कैसे बचपन में कोई कहानी या लोरी तब तक तुम्हे सुना ते थे जब तक तुम सो नहीं जाते थे। अगर कभी किसी कारणवश हम न नहाना चाहें तो हमें गं दगी या आलस का हवाला देते हुए मत झिड़कना, क्योंकि यह उम्र का तकाजा होगा। याद करना बचपन में तु्म नहाने से बचने के लिए कितने बहाने बनाते थे और हमें तुम्हारे पीछे भागते रहना पड़ता था। अगर आज हमें कंप्यूटर या आधुनिक उपकरण चलाने नहीं आते तो हम पर झल्लाना नहीं नाहीं शर्मिंदा होना, समझना कि इन नयी चीजों से हम वाकिफ नहीं हैं और याद करना कि तुम्हे कैसे एक-एक अक्षर हाथ पकड-पकड कर सिखाया था। अगर हम कोई बात करते करते कुछ भूल जाएं तो हमें याद करने के लिए मौका देना, हम याद न कर पाएं तो खीझना मत। हमारे लिए बात से ज़्यादा अहम है...

STORY 13

बहुत हाथ-पाँव जोड़े उसने, रोया गिड़-गिड़ाया, मोहल्ले में अपनी इज्ज़त की दुहाई दी। लेकिन उन्हें ना पसीजना था सो नहीं पसीजे। मोहल्ले से गायब हुई मोटर साइकल की चोरी का इलज़ाम लगा कर, पूछताछ के लिए पुलिस उसे थाने ले गई। शुक्रवार का दिन था और शाम तक पुलिस के हथकंडे उसे यह कबूलवाने में नाकाम रहे थे कि चोरी में उसका हाथ था। उसे हवालात में डाल दिया गया। सोमवार से पहले जमानत के कोई आसार ना थे। एक निम्न-मध् यमवर्गीय आदमी के लिए इज्ज़त के अलावा देखने दिखाने के लिए और तो कोई दौलत होती नहीं, मगर दौलतमंदों के थाने में रहने वाले चौकीदारों ने आज वो दौलत भी लूट ली। जाने किसकी नज़र लगी कि उसकी गरीबी हालत ने उसे चोरी का भी आरोपी बना दिया। अब मोहल्ले में कौन उसकी बात मानेगा कि उस पर लगा इलज़ाम झूठा है और वो इसे झूठा साबित करेगा भी कैसे। भविष्य को अमावस की रात में खोते देख उसने अपनी बेल्ट उतारी और उसकी कील अपने गले में घोंप ली। बलबला कर गले से निकलते खून को देख सारे थाने में हडकंप मच गया। आनन्-फानन में उसे हस्पताल पहुँचाया गया। बड़ी मुश्किल से जान बची, अगले दिन सुबह पता चला कि मोटरसाइकल बरामद हो गई, असली ...

STORY 12

महिलाओं में कुपोषण और उसके प्रभावों पर आधारित एक क्लब महिला गोष्ठी उस तारांकित होटल के टॉप फ्लोर पर चल रही थी। खाने और उसकी गुणवत्ता की कमी के कारण पैदा होते रोग व उससे हर साल होती महिलाओं की मृत्यु जैसे तथ्य मय आँकड़ों के प्रस्तुत हुए और एक मधुर घोषणा के साथ गोष्ठी समाप्त हुई। "आप सभी भोजन के लिये आमंत्रित है।" प्लेट में पनीर दो प्याजा लेती हुई मिसेस माहेश्वरी¸ "आपका प्रेजेन्टेशन तो बड़ा अच्छ ा  हुआ मिसेस गुप्ता! काँग्रेट्‌स।" "ओह थैंक्स!" चूंकि मिसेस गुप्ता अभी स्टार्टर पर थी इसलिये उन्हें वहीं छोड़ आपने मिसेस प्रसाद को पकड़ा। जिनके साथ अगले हफ्ते उन्हें इसी विषय पर प्रेजेन्टेशन देना था। "मैं सोचती हूँ मिसेस प्रसाद¸ कि हमारी कामवाली बाईयाँ ही है जिनसे हम ये सारे सवाल पूछ सकते है।" मिसेस माहेश्वरी ने बेक्ड वेज का कुरकुरा चीज़ मुँह में रखते हुए कहा। "हाँ! उन्हीं से हमें उनकी खान - पान की आदतों और उनमें सुधार की गुंजाइश की जानकारी मिलेगी। इस तरीके से हमारे प्रेजेन्टेशन में थोड़ी लाईवलीनेस आ जाएगी यू नो!" और उन्होने मन्चूरियन पर धावा बोल...

STORY 11

शहर के नामी पब्लिक स्कूल के प्रांगण में गहमा गहमी थी। आज प्राईमरी टीचर्स के इण्टरव्यू होने थे। ढेर सारी फेड़ेड़ मेकअप में सजी सजी सँवरी¸ सलवार सूट से लेकर पाश्चात्य कपड़ों में लिपटी कन्याएँ¸ गृहिणियाँ वहाँ थी। कोई अपने पहले के अनुभव बाँट रही थी तो कुछ अपने अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण के तमगे लहरा रही थी। किसी को वक्त काटने के लिये जॉब चाहिये था तो कोई इंडिपेंडेंसी फील से परिचित होना चाह रही थी। इतनी ज गमगाहट के बीच¸ फीके नारंगी रंग पर बैंगनी फूलों की सुरूचिपूर्ण कढ़ाई वाली कलफ लगी सूती साड़ी पहने एक लड़की सकुचाई सी बैठी थी। पाश्चात्य शैली में सजाई हुई बैठक में¸ सोफा सेट¸ टीपॉय¸ शोकेस के बीच मोंढ़े सी रखी हुई वह थोड़ी सी आतंकित अवश्य थी लेकिन इसका असर उसके आत्मविश्वास पर नहीं पड़ पाया था। उसके आस - पास के सभी अपने व्यवहार से ही उसे "आऊट ड़ेटेड़" या "रिजेक्टेड़ पीस" जैसा किये दे रही थी। तभी उनके बीच एक ढ़ाई साल का बालक रोता - रोता दाखिल हुआ। उसकी हाफ पैण्ट गन्दी और गीली थी¸ नाक बह रही थी। धूल में खेलकर आने के कारण आँसुओं से चेहरे पर काले निशान बन गये थे। वह करूणार्द्र स्वर...

STORY 10

"भारत बनाम इंडिया भारत में गांव है, गली है, चौबारा है। _________ इंडिया में सिटी है, माल है, पंचतारा है। भारत में घर है, चबूतरा है, दालान है। ________ इंडिया में फ्लैट और मकान है। भारत में काका है, बाबा है, दादा है, दादी है। ____.इंडिया में अंकल आंटी की आबादी है। भारत में खजूर है, जामुन है,आम है। ________इंडिया में मैगी, पिज़्ज़ा, माजा का नकली आम है। भारत में मटके है, दोने है, पत्तल है। _________इंडिया ­में पालीथीन, वाटर व वाइन की बोतल है। भारत में गाय है, गोबर है, कंडे है। __________इंडिय ­ा में सेहत नाशी चिकन बिरयानी व अन्डे है। भारत में दूध है, दही है, लस्सी है। ___________इंडि ­या में खतरनाक विस्की, कोक व पेप्सी है। भारत में रसोई है, आंगन है, तुलसी है। ________इंडिया में रूम है, कमोड की कुर्सी है। भारत में कथड़ी है, खटिया है,खर्राटे है। ________इंडिया में बेड है, डनलप है और करवटें है। भारत में मंदिर है, मंडप है,पंडाल है। _________इंडिया ­में पब है, डिस्को है, हॉल है। भारत में गीत है, संगीत है, रिदम है। _________.इंडिय ­ा में डांस है, पॉप है, आइटम है। भारत में ममेरी, फुफेरी, च...

STORY 9

कुछ समय पहले चीन में आये भूकंप में एक दिल को छु लेने वाली घटना हुई.. भूकंप के बाद बचाव कार्य का एक दल एक महिला के पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए घर की जांच कर रहा था, बारीक दरारों में से महिला का मृत शारीर दिखा लेकिन वो एक अजीब अवस्था में था, महिला अपने घुटनों के बल बैठी थी ठीक वैसे ही जैसे मंदिर में लोग भगवान् के सामने नमन करते है, उसके दोनों हाथ किसी चीज़ को पकडे हुए थे, भूकंप से उस महिला की पीठ व् सर को काफी क्षति पहुंची थी, काफी मेंहनत के बाद दल के सदस्य ने बारीक दरारों में से जगह बना कर अपना हाथ महिला की तरफ बढाया इस उम्मीद में की शायद वो जिंदा हो, लेकिन महिला का शारीर ठंडा हो चूका था, जिसे बचाव दल समझ गया की महिला मर चुकी है, बचाव दल ने उस घर को छोड़ दिया और दुसरे मकानों की तरफ चलने लगे, बचाव दल के प्रमुख का कहना थाकी "पता नहीं क्यूँ मुझे उस महिला का घर अपनी तरफ खींच रहा था,कुछ था जो मुझसे कह रहा था के मैं इस घर को ऐसे छोड़ कर न जाऊं और मैंने अपने दिल की बात मानने का फैसला किया" उसके बाद बचाव दल एक बार फिर उस महिला के घर की तरफ पहुंचे, दल प्रमुख ने मलबे को सावधानी से हटा कर ब...

STORY 8

एक लड़के के आपात आपरेशन के लिए एक फोन के बाद डाक्टर जल्दी जल्दी अस्पताल में प्रवेश करते हैं....उन्होंने तुरंत अपने कपडे बदल कर सर्जिकल गाउन पहना, ऑपरेशन के लिए खुद को तैयार किया और ऑपरेशन थियेटर की तरफ चल पड़े...हॉल में प्रवेश करते ही उनकी नज़र लड़के की माँ पर जाती है...जो उनका इंतज़ार करती जान पड़ती थी और बहुत व्याकुल भी लग रही थी.... डॉक्टर को देखते ही लड़के की माँ एकदम गुस्से से बोली : आपने आने इतनी देर क्यों कर दी..? आपको पता नहीं है कि मेरे बेटे की हालत बहुत गंभीर है..? आपको अपनी जिम्मेदारी का अहसास है की नहीं..?? डॉक्टर मंद मंद मुस्कुराते हुए कहता है : मैं अपनी गलती के लिए आपसे माफ़ी मांगता हूँ...फोन आया तब मैं अस्पताल में नहीं था,जैसे ही खबर मिली मैं तुरंत अस्पताल के लिए निकल पड़ा..रास्ते में ट्रैफिक ज्यादा होने की वजह से थोड़ी देर हो गयी. अब आप निश्चिन्त रहो मैं आ गया हूँ भ गवान की मर्ज़ी से सब ठीक हो जाएगा..अब आप विलाप करना छोड़ दो..'' इस पर लड़के की माँ और ज्यादा गुस्से से : विलाप करना छोड़ दूं मतलब..? आपके कहने का मतलब क्या है..? मेरे बच्चे को कुछ हो गया होता तो.? इ...

STORY 7

दर्जी की सीख... एक दिन किसी कारण से स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया ।वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा । उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं । फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सु ई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं । जब उसने इसी क्रिया को चार-पाँच बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से कहा कि वह एक बात उनसे पूछना चाहता है ? पापा ने कहा- बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो ? बेटा बोला- पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं , आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों ? इसका जो उत्तर पापा ने दिया- उन दो पंक्तियाँ में मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया । उत्तर था- ” बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है । यही कारण है कि मैं सुई को ...

STORY 6

बहुत समय पहले की बात है एक बड़ा सा तालाब था उसमें सैकड़ों मेंढक रहते थे। तालाब में कोई राजा नहीं था, सच मानो तो सभी राजा थे। दिन पर दिन अनुशासन हीनता बढ़ती जाती थी और स्थिति को नियंत्रण में करने वाला कोई नहीं था। उसे ठीक करने का कोई यंत्र तंत्र मंत्र दिखाई नहीं देता था। नई पीढ़ी उत्तरदायित्व हीन थी। जो थोड़े बहुत होशियार मेंढक निकलते थे वे पढ़-लिखकर अपना तालाब सुधारने की बजाय दूसरे तालाबों में चैन  से जा बसते थे। हार कर कुछ बूढ़े मेंढकों ने घनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया और उनसे आग्रह किया कि तालाब के लिये कोई राजा भेज दें। जिससे उनके तालाब में सुख चैन स्थापित हो सके। शिव जी ने प्रसन्न होकर नंदी को उनकी देखभाल के लिये भेज दिया। नंदी तालाब के किनारे इधर उधर घूमता, पहरेदारी करता लेकिन न वह उनकी भाषा समझता था न उनकी आवश्यकताएँ। अलबत्ता उसके खुर से कुचलकर अक्सर कोई न कोई मेंढक मर जाता। समस्या दूर होने की बजाय और बढ़ गई थी। पहले तो केवल झगड़े झंझट होते थे लेकिन अब तो मौतें भी होने लगीं। फिर से कुछ बूढ़े मेंढकों ने तपस्या से शिव जी को प्रसन्न किया और राजा को बदल देने की प्रा...

STORY 5

एक चौदह पंद्रह साल का लड़का एक टेलीफोन बूथ पर जाकर एक नंबर लगाता है और किसी के साथ बात करता है, बूथ मालिक उस लड़के की बात को ध्यान से सुनता रहता है ; लड़का : किसी महिला से कहता है कि, मैंने बैंक से कुछ क़र्ज़ लिया है और मुझे उसका क़र्ज़ चुक ाना है, इस कारण मुझे पैसों की बहुत जरुरत है, मैडम क्या आप मुझे अपने बगीचे की घास काटने की नौकरी दे सकती हैं..? महिला : (दूसरी तरफ से) मेरे पास तो पहले से ही घास काटने वाला माली है.. लड़का : परन्तु मैं वह काम आपके माली से आधी तनख्वाह पर कर दूंगा.. महिला : तनख्वाह की बात ही नहीं हैमैं अपने माली के काम से पूरी तरह संतुष्ट हूँ.. लड़का : (और निवेदन करते हुए) घास काटने के साथ साथ मैं आपके घर की साफ़ सफाई भी करदूंगा वो भी बिना पैसे लिए.. महिला : धन्यवाद और ना करके फोन काट दिया.. लड़का चेहरे पर विस्मित भाव लिए फोन रख देता है.. बूथ मालिक जो अब तक लड़के की सारी बातों को सुन चूका होता है,लड़के को अपने पास बुलाता है.. दुकानदार : बेटा मेरे को तेरा स्वभाव बहुत अच्छा लगा, मेरे को तेरा सकारात्मक बात करने का तरीका भी बहुत पसंद आया..अगर मैं तेरे को अपने यहाँ नौकरी क...

Story 4

जीवन रेलगाड़ी से दस लाख रुपये का तकादा लेकर दिल्ली से कोलकात्ता जा रहा था। बहुत ही बैचनी हो रही थी। रुपये ठीक से रखे या नहीं, बार बार उन्हें संभाल रहा था जीवन भर की जमा पूंजी भी जमा कर ले, तब भी न कमा पायेगा इतना…. रात को सोने से पहले तकिये के नीचे छुपा कर सोया, लेकिन आँखों में नींद ही नहीं। चिंता सताए जा रही थी, कहीं कुछ अनहोनी ना हो जाये। आस पास देखा सभी खर्राटे मार कर गहरी निद्रा में सो रहे थे , लेकिन उसकी आँखों से नींद कोसो दूर थी। सहसा... ट्रेन रूक रूक कर घर्र घर्र की आवाज के साथ धक्के खाने लगी, वह कुछ समझ पाता इतने में ही सर जाकर जोर से डब्बे की दीवार से जा टकराया, दिन में ही तारे नजर आने लगे, कुछ समझने की स्थिति में आया तो देखा कि उसका डब्बा लटका हुआ है कहीं, नीचे पानी दिख रहा था, दिमाग चक्कर खाने लगा, कि ये क्या हो गया। धीरे धीरे हिम्मत करके ऊपर की ओर से जो रास्ता नजर आया, उससे निकलने की कोशिश करने लगा। निकलने ही वाला था कि इतने में पैसा याद आया, बैग खोजने की सोच ही रहा था कि कई लोग उसे धक्का देने लगे, कहने लगे, “रास्ता छोडो, हमें भी बाहर निकलना है, डब्बा कभी भी पानी में गिर स...

STORY 3

सत्ताईस साल के सुमित ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ज़रा-सी चूक की वजह से उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। बात बुधवार देर शाम की है। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। ऑफिस के कैफेटेरिया में एक ऐसे कर्मचारी का ब्रथडे सेलिब्रेट हो रहा था जिसे सुबह ही बॉस ने गुस्से में कहा था कि आख़िर तुम पैदा ही क्यों हुए थे। गौरतलब है कि महीने में एक-आध बार इस तरह की सस्ती पार्टियां दे और गेम-वेम खिलवा कम्पनियां अप ने कर्मचारियों को इस वहम में रखने की कोशिश करती हैं कि हमारे यहां तुम कितने खुश हो! उस दिन भी लोगों को खुश करने की एक ऐसी ही कवायद चल रही थी। केक काटने और केक लगी उंगलियां चाटने के बाद लो आईक्यू लोगों के तम्बोला टाइप कुछ गेम खेले जा रहे थे। तम्बोला के ऐसे ही एक राउंड में ऑफिस की सबसे खूबसूरत लड़की जीत गई। उसके जीतते ही सब लड़के बीस से पच्चीस सेकंड तक उससे हाथ मिला उसे बधाई देने लगे। वो सब उसके जीतने पर इतने खुश थे जैसे सबका बचपन से यही सपना रहा हो कि बड़ी होकर एक दिन वो लड़की ऑफिस में तम्बोला जीते। खैर, तम्बोला की रस्म पूरी हुई तो बारी आई पास द पार्सल की। इस पल तक सुमित को ज़रा भी भनक नहीं थी ...

STORY 2

गाँव से आई भागवंती पूछ-ताछ कर जब तक आनंद नगर पहुँची, सूर्य अग्नि-पिंड बन कर उसके सिर पर  लटक रहा था। उसके भानजे ने शहर के इसी मुहल्ले में पिछले दिनों नई कोठी बनाई थी। उसी से मिलने  आई थी भागवंती। गरमी बढ़ गई थी और गलियाँ सूनी पड़ी थीं। भागवंती साठ वर्ष की हो चुकी थी। वह  घुटनों को सहारा देती धीरे-धीरे चल रही थी। वह गाँव के स्कूल में पढ़ने जाती रही थी, इसलिए थोड़ा बहुत  पढ़ लेती थी। उसने कई कोठियों के नंबर पढ़े, परंतु भानजे की छप्पन नंबर कोठी उसे नज़र नहीं आई।  स्कूल से आ रही सुन्दर वर्दी पहने दो लड़कियाँ दिखाई दीं तो भागवंती को थोड़ी आस बंधी। उसने उन्हें रोक  कर पूछा, “बेटे, छप्पन नंबर कोठी किधर है?” लड़कियों ने एक-दूसरी की ओर हैरानी से देखा और फिर,  “मालूम नहीं।” कह कर अपनी राह चली गईं। भागवंती थोड़ा आगे बढ़ी तो लगभग बारह वर्ष का एक लड़का  साइकिल पर आता दिखाई दिया। उसने लड़के से भी छप्पन नंबर कोठी बारे पूछा। लड़का भी लड़कियों की  तरह हैरान हो कर उसकी ओर देखने लगा तो वह बोली, “बादली वाले बिरजू की कोठी है। अभी बनाई है, ...

STORY 1

हाथ मैं झोला लटकाए एक बुजुर्ग महिला बस मैं चडी, सीट खाली नही देख एकदम से वह निराश हो गयी, फिर भी जैसा कि बस मैं चड़ने वाला हर यात्री सोचता है कि शायद किसी सीट पर अटकने की जगह मिलजाए, वह भी पीछे की और चली, तभी उसकी नजर एक सीट पर पड़ी, उस पर बस एक ही युवक बेठा था, आंखों मैं संतोष की चमक आ गयी, पास जाने पर जब उस पर कोई कपडा या कुछ सामान नही दिखायी दिया। उसने धम्म से शरीर को छोड़ दिया सीट पर, अरे रे कहाँ बेठ रही हो, यहाँ सवारी आएगी, आंखों मैं उभरी चमक घुप्प से गायब हो गयी , आगे और सीट देखने की हिम्मत उसमें नही रही और वह वहीं सीटों के बीच फर्श मैं ही बेठ गयी, इसके बाद उस खाली सीट को देख कर कईं बार आंखों मैं चमक आती रही और बुझती रही, तभी एक collage में पढनेवाली सुन्दर सी दिखने वाली लड़की बस मैं चडी , अन्य लोगों को खड़ा देख उसने समझ लिया कि वह सीट खाली नही है, एक सीट खाली देखकर मन हि मन समझ गई उस सीट पर कोई आना वाला है और वह भी खड़ी हो गयी महिला के पास, तभी आवाज आई बैठ जाइये न,यहाँ कोई नही आएगा, इस आवाज पर लड़की ने मुड़कर देखा तो युवक उससे ही मुखातिब था, उसने आश्चर्य से पूछा कोई नही आएगा, यु...

संस्कृति -21 सदी की नारी कौन सी आजादी चाहती हैं ?

सीता-राम राधे -श्याम गौरी -शंकर लक्ष्मी- नारायण सोच रहा हूं क्या ये वही भारत है जहां नारी जाति को इतना सम्मान दिया जाता है कि भगवान के नाम तक  में स्त्री नाम पहले आता है तथा जहां पुत्र को मां के नाम तक से संबोधित किया जाता है... अंजनिपुत्र -हनुमान देवरीनंदन- कृष्ण कौन्तेय- अर्जुन गंगापुत्र- पितामह भीष्म " जहां बेटियों को पिता का सरनाम क्या पूरा नाम मिल जाता था... जनक/विदेह- जानकी/वैदेही द्रुपद/पांचाल नरेश- द्रोपदी/पांचाली वृषभानु - वृषभानु दुलारी/राधा ----- जहां एक स्त्री की इज्जत के लिये पूरा महाभारत हो जाता है... और आज उसी हस्तिनापुर (दिल्ली) में  किसी के सर में जूं तक नहीं रेंगती... ‼ ओह मैं भूल गया .. कि मैं भारत नहीं इण्डिया में रहता हूं.. मॉर्डन इण्डिया .. मेरी सोच कितनी छोटी है अभी रामायण -गीता में उलझी पडी है... और यहां लोग 'मनोहर कहानियों' तक  पहुंच गये.. जहां नमस्कार नहीं.. यो मैन सुनाई देता है.. लोग ठहाके लगाना भूल गये .. लोल जेनरेशन जो आ गई है.. जो खून कभी गर्म होता था अब कूल हो गया.. मतलब तो मुझे नहीं पता वो डूड ...

संस्कृति - OUR EDUCATION SYSTEM--

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