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February 08, 2012

संस्कृति - BHAGAT SINGH



शहीदे आज़म भगत सिंह

सिर्फ आज़ादी हमारा मकसद नहीं है आज़ादी का मतलब क्या है है कि हुकूमत अंग्रेज़ों के हाथ से निकलकर मुटठी भर रईस और ताकतवर हिन्दुस्तानियों के हाथ लग जाये क्या यही आज़ादी है इससे आम आदमी की ज़िन्दगी पर कोई फर्क आयेगा क्या मजदूर और किसान वर्ग के हालात बदलेंगे उन्हें उनका सही हक मिलेगा नहीं आज़ादी सिर्फ पहला कदम है कारमेडस् मकसद है एक वतन बनाना एक एसा वतन जहाँ हर तबके के लोगों को बराबरी से जीने का हक मिले जहां मज़हब के नाम पर समाज में बँटवारा ना हो एक ऐसा वतन जो इन्सान का इन्सान पर जुल्म बर्दाश्त न करे यह मुश्किल है पर असंभव नहीं हिन्दुस्तान जहाँ इतनी सारी जातियाँ भाषाऐं कल्चर हैं उसे एक साथ जोडे रखना आसान नहीं मगर हम इस बात को हम आज नहीं समझेंगे और इस मसले को लेकर आज संघर्ष नहीं करेंगे तो हिन्दुस्तान एक आज़ाद मुल्क तो होगा पर एक भ्रष्ट शोषक और साम्प्रदायिक समाज़ बन कर रह जायेगा कारमेडस् हम सब को मिलकर बनाना है एक समाजवादी वतन और ये हमारी पाट्री के नाम में साफ झलकना चाहिये इसीलिये हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसियेशन को अब हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसियेशन के नाम से बनाना है।


क्या आप लोग मेरे साथ हैं

शहीदे आज़म भगत सिंह

मेरी शिक्षा मातृभाषा में हुई, इसलिए ऊँचा वैज्ञानिक बन सका - अब्दुल कलाम


MERI SHIKSHA MATRABHASHA MAIN HUE, ISLIYE UNCHA VAGYANIK BAN SAKA-ABDUL KALAM






उच्च तकनीकी क्षेत्र जैसे उपग्रह निर्माण जिसे उच्च तकनीक कहा जाता जो बहुत कठिन एवं क्लिष्ट तकनीक होती है, उसमें आज तक कोई विदेशी कंपनी इस देश में नहीं आई

भारत जिसने १९९५ एक आर्यभट्ट नमक उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ा एवं उसके उपरांत हमारे अनेकों उपग्रह अंतरिक्ष में गए है
अब तो हम दूसरे देशों के उपग्रह भी अंतरिक्ष में छोड़ने लगे है इतनी तकनीकी का विकास इस देश में हुआ है यह संपूर्ण स्वदेशी पद्दति से हुआ है, स्वदेशी के सिद्धांत पर हुआ है एवं स्वदेशी आंदोलन की भावना के आधार पर हुआ है
इसमें जिन वैज्ञानिकों ने कार्य किया है वह स्वदेशी, जिस तकनीकी का उपयोग किया गया है वह स्वदेशी, जो कच्चा माल उपयोग किया गया है वह स्वदेशी, इसमें जो तकनीक एवं कर्मकार लोगों का सहयोग प्राप्त हुआ वह सब स्वदेशी, इनको अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने हेतु जो कार्य हुआ है वह भी हमारी प्रयोगशालाएं स्वदेशी इनके नियंत्रण का कार्य होता है वह प्रयोगशालाएं भी स्वदेशी तो यह उपग्रह निर्माण एवं प्रक्षेपण का क्षेत्र स्वदेशी के सिद्धांत पर आधारित है
एक और उदाहरण है " प्रक्षेपास्त्रों के निर्माण " (मिसाइलों को बनाने) का क्षेत्र आज से तीस वर्ष पूर्व तक हम प्रक्षेपास्त्रों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर थे या तो रूस के प्रक्षेपास्त्र हमे मिले अथवा अमेरिका हमको दे किंतु पिछले तीस वर्षों में भारत के वैज्ञानिकों ने विशेष कर " रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन " (डी.आर.डी.ओ.) के वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम कर प्रक्षेपास्त्र बनाने की स्वदेशी तकनीकी विकसित की १०० ,२०० ,५०० ... से आगे बढ़ते हुए आज हमने ५००० किमी तक मार करने की क्षमता वाले प्रक्षेपास्त्रों को विकसित किया है
जिन वैज्ञानिकों ने यह पराक्रम किया है परिश्रम किया है वह सारे वैज्ञानिक बधाई एवं सम्मान के पात्र है, विदेशों से बिना एक पैसे की तकनीकी लिए हुए संपूर्ण स्वदेशी एवं भारतीय तकनीकी पद्दति से उन्होंने प्रक्षेपास्त्र बना कर विश्व के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया
जिन वैज्ञानिकों ने यह सारा पराक्रम किया सारा परिश्रम किया महत्व की बात उनके बारे में यह है की वह सब यहीं जन्मे, यहीं पले-पढ़े, यहीं अनुसंधान (रिसर्च) किया एवं विश्व में भारत को शीर्ष पर स्थापित कर दिया

श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, भारत में प्रक्षेपास्त्रों की जो परियोजना चली उसके पितामहः माने जाते है
श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी से जब एक दिवस पूछा गया की आप इतने महान वैज्ञानिक बन गए, इतनी उन्नति आपने कर ली, आप इसमें सबसे बड़ा योगदान किसका मानते है तो उन्होंने उत्तर दिया था की " मेरी पढ़ाई मातृभाषा में हुई है अतैव मैं इतना ऊँचा वैज्ञानिक बन सका हूँ ", आपको ज्ञात होगा कलाम जी की १२ वीं तक की पढ़ाई तमिल में हुई है
उसके उपरांत उन्होंने थोड़ी बहुत अंग्रेजी सीख स्वयं को उसमें भी दक्ष बना लिया किंतु मूल भाषा उनकी पढ़ाई की तमिल रही
कलाम जी के अतिरिक्त इस परियोजना में जितने और भी वैज्ञानिक है उन सभी की मूल भाषा मलयालम, तमिल, तेलगु, कन्नड़, बांग्ला, हिंदी, मराठी, गुजराती आदि है अर्थात हमारी मातृभाषा में जो वैज्ञानिक पढ़ कर निकले उन्होंने स्वदेशी तकनीकी का विकास किया एवं देश को सम्मान दिलाया है
परमाणु अस्त्र निर्माण एवं परिक्षण भी श्री होमी भाभा द्वारा स्वदेशी तकनीकी विकास के स्वप्न, उसको पूर्ण करने हेतु परिश्रम की ही देन है
अब तो हमने परमाणु अस्त्र निर्माण एवं परिक्षण के अतिरिक्त उसे प्रक्षेपास्त्रों पर लगा कर अंतरिक्ष तक भेजने में एवं आवश्यकता पढ़ने पर उनके अंतरिक्ष में उपयोग की सिद्धि भी हमारे स्वदेशी वैज्ञानिकों ने अब प्राप्त कर ली है
यह भी संपूर्ण स्वदेशी के आग्रह पर हुआ है
अब तो हमने पानी के नीचे भी परमाणु के उपयोग की सिद्धि प्राप्त कर ली है संपूर्ण स्वदेशी तकनीकी से निर्मित अरिहंत नामक परमाणु पनडुब्बी इसका ज्वलंत प्रमाण है
जल में, थल में, अंतरिक्ष में हमने विकास किया
यह सारी विधा का प्रयोग स्वदेशी वैज्ञानिकों ने किया, स्वदेशी तकनीकी से किया, स्वदेशी आग्रह के आधार पर किया एवं स्वदेशी का गौरव को संपुर्ण विश्व में प्रतिष्ठापित किया

यह कार्य उच्च तकनीकी के होते है प्रक्षेपास्त्र, उपग्रह, परमाणु विस्फोटक पनडुब्बी, जलयान, जलपोत महा संगणक (सुपर कंप्यूटर) निर्माण आदि एवं इन सब क्षेत्रों में हम बहुत आगे बढ़ चुके है स्वदेशी के पथ पर
स्वदेशी के स्वाभिमान से ओत प्रोत भारत के महा संगणक यंत्र " परम १०००० " के निर्माण के जनक विजय भटकर (मूल पढ़ाई मराठी ) की कथा सभी भारतियों को ज्ञात है, उनके लिए प्रेरक है
इतने सारे उदाहरण देने के पीछे एक ही कारण है वह यह की भारत में तकनीकी का जितन विकास हो रहा है वह सब स्वदेशी के बल से हो रहा है, स्वदेशी आग्रह से हो रहा, स्वदेशी गौरव एवं स्वदेशी अभिमान के साथ हो रहा है
नवीन तकनीकी हमको कोई ला कर नहीं देने वाला, विदेशी देश हमे यदि देती है तो अपनी २० वर्ष पुरानी तकनीकी जो उनके देश में अनुपयोगी, फैकने योग्य हो चुकी है
इसके उदाहरण है जैसे कीटनाशक, रसायनिक खाद निर्माण की तकनीकी स्वयं अमेरिका में बीस वर्ष पूर्व से जिन कीटनाशकों का उत्पादन एवं विक्रय बंद हो चुका है एवं उनके कारखाने उनके यहाँ अनुपयोगी हो गए है
अमेरिका १४२ विदेशी कंपनियों के इतने गहरे गहरे षड्यंत्र चल रहे है इन्हें समझना हम प्रारंभ करे अपनी आंखे खोले, कान खोले दिमाग खोले एवं इनसे लड़ने की तैयारी अपने जीवन में करे भारत स्वाभिमान इसी के लिए बनाया गया एक मंच है जो इन विदेशी कंपनियों की पूरे देश में पोल खोलता है एवं पूरे देश को इनसे लड़ने का सामर्थ्य उत्पन्न करता है
हमे इस बात का स्मरण रखना है की इतिहास में एक भूल हो गई थी जहांगीर नाम का एक राजा था उसने एक विदेशी कंपनी को अधिकार दे दिया था इस देश में व्यापार करने का परिणाम यह हुआ की जिस कंपनी को जहांगीर ने बुलाया था उसी कंपनी ने जहांगीर को गद्दी से उतरवा दिया एवं वह कंपनी इस देश पर अधिकार कर लिया ०६ लाख ३२ सहस्त्र ०७ सौ इक्यासी (६,३२,७००) क्रांतिकारियों ने अपने बलिदान से उन्हें भगाया था

आवश्यकता अविष्कार की जननी है हमे जिसकी आवश्यकता थी हमने उसका अविष्कार किया विश्व के देशों में जो दवाईयां २०-२० वर्षों से बंद हो गई है जिन्हें 'क', 'ख', 'ग' वर्गीय विष (ए,बी,सी, क्लास ) जो बहुत ही भयंकर विष है ऐसी दवाईयां ला कर विदेशी कंपनियां भारत में विक्रय करती है ऐसी ५ सहस्त्र दवाइयों की हमने सूची बनाई है जिनमें से कुछ औक्सिफन बुटाजोंन, फिनाइल बुटाजों, एक्टइमाल, एल्जिरिअल, बूटा कार्दिडान, बूटा प्रोक्सिवान ये सात दवाएँ है जो ब्रिटेन में पश्चिमी जर्मनी, फ्रांस, ईटली, फिनलैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया, इज़राइल, जॉर्डन एवं हमारे पड़ोसी बंगलादेश तक में पिछले २० वर्षों से प्रतिबंधित है
जब यह सहस्त्रों करोड़ो रूपये लूटती है उसका बहुत दुःख होता है १९४७ तक मात्र १० करोड़ रु. की दवाएँ विक्रय करते थे आज ७० सहस्त्र करोड़ रु से भी अधिक की दवाएँ विक्रय करते है जिनमें से अधिकांश की तो हमे आवश्यकता ही नहीं है जस्टिस हाथी कमीशन ने स्पष्ट रूप से कहा था की भारत में जितने भी रोग है उनके निवारण हेतु एलोपेथी की मात्र ११७ प्रकार की दवाइयों की आवश्यकता है परंतु आज देश में ८४,००० (84,000) प्रकार की दवाइयों का विक्रय हो रहा है

अत: हम सबको यह लूट समझनी होगी एवं इस मकडजाल से बहार निकलना होगा, समझना होगा - हम प्रातः आँख खुलते ही हम उनके चंगुल में फंस चुके होते हैं बस सवेरा हुआ हम इन कंपनियों द्वारा निर्मित ब्रुश, टूथपेस्ट हमारे हाथों में आ जाते हैं फिर साबुन हैं क्रीम हैं ब्लेड हैं तरह तरह के सौंदर्य प्रसाधन हैं लगभग हम शरीर की सफाई ही प्रारंभ करते हैं इन कम्नियों के द्वारा बनाये गए सामानों से आज भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से उन कंपनियों की गुलाम बन चुकी है ...

February 01, 2012

15 GREAT THOUGHTS BY CHANAKYA...

चाणक्य के 15 सूक्ति वाक्य ----
                                             

1) "दूसरो की ...गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी."

2)"किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार (सीधा साधा ) नहीं होना चाहिए ---सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं."

3)"अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए वैसे डंस भले ही न दो पर डंस दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए. "

4)"हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है --यह कडुआ सच है."

5)"कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो ---मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ? इसका क्या परिणाम होगा ? क्या मैं सफल रहूँगा ?"

6)"भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये इस पर हमला करदो यानी भय से भागो मत इसका सामना करो ."

7)"दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है."

8)"काम का निष्पादन करो , परिणाम से मत डरो."

9)"सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है."

10)"ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ."

11) "व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है जन्म से नहीं."

12) "ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या नीचे के हैं उन्हें दोस्त न बनाओ,वह तुम्हारे कष्ट का कारण बनेगे. सामान स्तर के मित्र ही सुखदाई होते हैं ."

13) "अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो. छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो .सोलह साल से उनके साथ मित्रवत व्यवहार करो.आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है."

14) "अज्ञानी के लिए किताबें और अंधे के लिए दर्पण एक सामान उपयोगी है ."
15) "शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है. शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है. शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य दोनों ही कमजोर हैं ."

January 18, 2012

पृथ्वीराज चौहान की ऐतिहासिक भूल

इतिहास इस बात का साक्षी है कि पृथ्वीराज चौहान की ऐतिहासिक भूल की स्वयं पृथ्वीराज चौहान एवं इस देश को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गोरी को 16 बार हराकर बंदी बनवाया था। पर हर बार पैर पकड़ कर माफी माँगने पर उसे 16 बार क्षमादान भी दिया था। किन्तु सत्रहवीं बार हमारे बीच के जयचंद की सहायता से मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान पर विजय प्राप्त कर उसे बंदी बना कारा...गार में डाल दिया था। मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज को क्षमा न कर उसकी दोनों आँखें निकाल कर अपनी क्रूरता का परिचय दिया था। अपनी दोनों आँखें खोने के बाद पृथ्वीराज चौहान के ज्ञान चक्षु खुले और उसने कवि चंद बरदाई के कविता के माध्यम से इशारा करने पर कि -


“चार बाँस चौबीर गज अंगुल अष्ट प्रमाण।

ता ऊपर सुल्तान है मत चूके चौहान॥”

अपने तीर कमान से मुहम्मद गोरी का सिर धड़ से अलग कर हिसाब बराबर कर दिया था। पर इस ऐतिहासिक घटना से हमें यह सीख मिलती है कि दुश्मन हमेशा जहरीला नाग होता है। उसे दूध नहीं पिलाना चाहिए बल्कि पहली ही बार में उसका फन कुचल दिया जाना चाहिए। इतिहास की दूसरी घटना में जब सम्राट चन्द्रगुप्त ने सिकन्दर के सेनापति सेल्युकस के आक्रमण को विफल कर युद्ध में उसे बुरी तरह से परास्त कर दिया तो उसने कूटनीतिक चाल चलकर सम्राट चन्द्रगुप्त के समक्ष स्वयं की सुन्दर एवं रूपवती कन्या हेलन से विवाह का प्रस्ताव रखा। सम्राट चन्द्रगुप्त के राजगुरु चाणक्य ने परिस्थिति को भाँपकर उक्त प्रस्ताव में यह शर्त लगा दी थी कि हेलन से सम्राट चन्द्रगुपत से विवाहोपरान्त होने वाली सन्तान का राजगद्दी पर कोई हक नहीं होगा। इस प्रकार चाणक्य ने राष्ट्रहित में सेल्युकस की कूटनीतिक चाल को विफल कर दिया। इस ऐतिहासिक घटना से हमें यह सीख मिलती है कि देश किसी व्यक्ति या खानदान की जागीर नहीं होती। विदेशी महिला की सन्तान की राष्ट्रभक्ति असन्दिग्ध नहीं मानी जा सकती क्योंकि उसके मातृकुल के लोग सभी विदेशी होते हैं जो उक्त सन्तान के द्वारा देश की बागडोर सम्हालने पर खतरे की घंटी साबित हो सकते हैं।

अतः राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर हमें दूरंदेशी होना होगा नहीं तो इतिहास एवं भावी पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।

October 11, 2011

Science & God - ABDUL KALAM

One Of The Best Arguments.!! I have ever read , Don’t miss even a single word…. I...t’s Too good

An atheist professor of philosophy speaks to his class on the problem science has with God, The Almighty.

He asks one of his new students to stand and…..
Prof: So you believe in God?
Student: Absolutely, sir.
Prof: Is God good?
Student: Sure.
Prof: Is God all-powerful?
Student: Yes..
Prof: My brother died of cancer even though he prayed to God to heal him. Most of us would attempt to help others who are ill. But God didn’t. How is this God good then? Hmm?
(Student is silent.)
Prof: You can’t answer, can you? Let’s start again, young fella. Is God good?
Student: Yes.
Prof: Is Satan good?
Student: No.
Prof: Where does Satan come from?
Student: From….God…
Prof: That’s right. Tell me son, is there evil in this world?
Student: Yes.
Prof: Evil is everywhere, isn’t it? And God did make everything. Correct?
Student: Yes.
Prof: So who created evil?
(Student does not answer.)
Prof: Is there sickness? Immorality? Hatred? Ugliness? All these terrible things exist in the world, don’t they?
Student: Yes, sir.
Prof: So, who created them?
(Student has no answer.)
Prof: Science says you have 5 senses you use to identify and observe the world around you. Tell me, son…Have you ever seen God?
Student: No, sir.
Prof: Tell us if you have ever heard your God?
Student: No, sir.
Prof: Have you ever felt your God, tasted your God, smelt your God? Have you ever had any sensory perception of God for that matter?
Student: No, sir. I’m afraid I haven’t.
Prof: Yet you still believe in Him?
Student: Yes.
Prof: According to empirical, testable, demonstrable protocol, science says your GOD doesn’t exist.
What do you say to that, son?
Student: Nothing. I only have my faith.
Prof: Yes. Faith. And that is the problem science has.
Student: Professor, is there such a thing as heat?
Prof: Yes.
Student: And is there such a thing as cold?
Prof: Yes.
Student: No sir. There isn’t.
(The lecture the after becomes very quiet with this turn of events.)
Student: Sir, you can have lots of heat, even more heat, superheat, mega heat, white heat, a little heat or no heat..
But we don’t have anything called cold. We can hit 458 degrees below zero which is no heat, but we can’t go any further after that. There is no such thing as cold. Cold is only a word we use to describe the absence of heat. We cannot measure cold. Heat is energy Cold is not the opposite of heat, sir, just the absence of it .

(There is pin-drop silence in the lecture theatre.)
Student: What about darkness, Professor? Is there such a thing as darkness?
Prof: Yes. What is night if there isn’t darkness?
Student : You’re wrong again, sir. Darkness is the absence of something. You can have low light, normal light, bright

light, flashing light…..But if you have no light constantly, you have nothing and it’s called darkness, isn’t it? In reality, darkness isn’t. If it were you would be able to make darkness darker, wouldn’t you?

Prof: So what is the point you are making, young man?
Student: Sir, my point is your philosophical premise is flawed.
Prof: Flawed? Can you explain how?
Student: Sir, you are working on the premise of duality. You argue there is life and then there is death, a good God and a bad God. You are viewing the concept of God as something finite, something we can measure. Sir, science can’t even explain a thought.. It uses electricity and magnetism, but has never seen, much less fully understood either one.To view death as the opposite of life is to be ignorant of the fact that death cannot exist as a substantive thing. Death is

not the opposite of life: just the absence of it.

Now tell me, Professor.Do you teach your students that they evolved from a monkey?
Prof: If you are referring to the natural evolutionary process, yes, of course, I do.
Student: Have you ever observed evolution with your own eyes, sir?

(The Professor shakes his head with a smile, beginning to realize where the argument is going.)



Student: Since no one has ever observed the process of evolution at work and cannot even prove that this process is an on-going endeavor, are you not teaching your opinion, sir? Are you not a scientist but a preacher? (The class is in uproar.)

Student: Is there anyone in the class who has ever seen the Professor’s brain?

(The class breaks out into laughter.)

Student : Is there anyone here who has ever heard the Professor’s brain, felt it, touched or smelt it? No one appears to have done so. So, according to the established rules of empirical, stable, demonstrable protocol, science says that you have no brain,sir. With all due respect, sir, how do we then trust your lectures, sir?

(The room is silent. The professor stares at the student, his face unfathomable.)

Prof: I guess you’ll have to take them on faith, son.

Student: That is it sir… The link between man & god is FAITH . That is all that keeps things moving & alive.

I believe you have enjoyed the conversation…and if so…you’ll probably want your friends/colleagues to enjoy the same…won’t you?….this is a true story, and the
student was none other than …….

APJ Abdul Kalam, the former President of India ( This was posted by our page fan and we shared it..) And it has came to our notice that it was Einstein not ABdul kalam.. sorry regarding this aspect..

July 25, 2011

Nathuram Godse-Last Letter



क्या आप जानते है कि ::


30 जनवरी को यदि गांधी वध रुक जाता तो 3 फरवरी 1948 को देश का एक और विभाजन पक्का था।

जिन्ना की मांग थी कि पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समय लगता है और हवाई जहाज से जाने की सभी की औकात नहीं, तो हमको बिलकुल बीच भारत से एक कोरिडोर बना कर दिया जाए जो--

1. लाहौर से ढाका जाता हो

... 2. दिल्ली के पास से जाता हो

3. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील यानि 16 किलोमीटर हो

4. 10 मील के दोनों और सिर्फ मुस्लिम बस्तियां ही बनेगी

तत्कालीन परिस्थितियों में सभी भारतीय और पाकिस्तानी इस सत्य से परिचित थे कि एक और विभाजन निश्चिंत है, उसके बाद नाथूराम गोडसे ने जो किया वो इतिहास है, अगर गाँधी वध का संकल्प पूरा ना होता..........तो आप ही बताइये क्या आज भारत कितना होता ?

गोडसे जी भागे नहीं, और इस कार्य को न्यायलय के सभी 35 सुनवाइयों पर स्वीकार किया !!

BRAND Archetypes through lens -Indian-Brands

There has been so much already written about brand archetypes and this is certainly not one more of those articles. In fact, this is rather ...