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संस्कृति - BHAGAT SINGH

शहीदे आज़म भगत सिंह सिर्फ आज़ादी हमारा मकसद नहीं है आज़ादी का मतलब क्या है है कि हुकूमत अंग्रेज़ों के हाथ से निकलकर मुटठी भर रईस और ताकतवर हिन्दुस्तानियों के हाथ लग जाये क्या यही आज़ादी है इससे आम आदमी की ज़िन्दगी पर कोई फर्क आयेगा क्या मजदूर और किसान वर्ग के हालात बदलेंगे उन्हें उनका सही हक मिलेगा नहीं आज़ादी सिर्फ पहला कदम है कारमेडस् मकसद है एक वतन बनाना एक एसा वतन जहाँ हर तबके के लोगों को बराबरी से जीने का हक मिले जहां मज़हब के नाम पर समाज में बँटवारा ना हो एक ऐसा वतन जो इन्सान का इन्सान पर जुल्म बर्दाश्त न करे यह मुश्किल है पर असंभव नहीं हिन्दुस्तान जहाँ इतनी सारी जातियाँ भाषाऐं कल्चर हैं उसे एक साथ जोडे रखना आसान नहीं मगर हम इस बात को हम आज नहीं समझेंगे और इस मसले को लेकर आज संघर्ष नहीं करेंगे तो हिन्दुस्तान एक आज़ाद मुल्क तो होगा पर एक भ्रष्ट शोषक और साम्प्रदायिक समाज़ बन कर रह जायेगा कारमेडस् हम सब को मिलकर बनाना है एक समाजवादी वतन और ये हमारी पाट्री के नाम में साफ झलकना चाहिये इसीलिये हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसियेशन को अब हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसियेशन के नाम से ...

मेरी शिक्षा मातृभाषा में हुई, इसलिए ऊँचा वैज्ञानिक बन सका - अब्दुल कलाम

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MERI SHIKSHA MATRABHASHA MAIN HUE, ISLIYE UNCHA VAGYANIK BAN SAKA-ABDUL KALAM उच्च तकनीकी क्षेत्र जैसे उपग्रह निर्माण जिसे उच्च तकनीक कहा जाता जो बहुत कठिन एवं क्लिष्ट तकनीक होती है, उसमें आज तक कोई विदेशी कंपनी इस देश में नहीं आई भारत जिसने १९९५ एक आर्यभट्ट नमक उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ा एवं उसके उपरांत हमारे अनेकों उपग्रह अंतरिक्ष में गए है अब तो हम दूसरे देशों के उपग्रह भी अंतरिक्ष में छोड़ने लगे है इतनी तकनीकी का विकास इस देश में हुआ है यह संपूर्ण स्वदेशी पद्दति से हुआ है, स्वदेशी के सिद्धांत पर हुआ है एवं स्वदेशी आंदोलन की भावना के आधार पर हुआ है इसमें जिन वैज्ञानिकों ने कार्य किया है वह स्वदेशी, जिस तकनीकी का उपयोग किया गया है वह स्वदेशी, जो कच्चा माल उपयोग किया गया है वह स्वदेशी, इसमें जो तकनीक एवं कर्मकार लोगों का सहयोग प्राप्त हुआ वह सब स्वदेशी, इनको अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने हेतु जो कार्य हुआ है वह भी हमारी प्रयोगशालाएं स्वदेशी इनके नियंत्रण का कार्य होता है वह प्रयोगशालाएं भी स्वदेशी तो यह उपग्रह निर्माण एवं प्रक्षेपण का क्षेत्र स्वदेशी के सिद्धांत पर आधारित ह...

15 GREAT THOUGHTS BY CHANAKYA...

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चाणक्य के 15 सूक्ति वाक्य ----                                               1) "दूसरो की ...गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी." 2)"किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार (सीधा साधा ) नहीं होना चाहिए ---सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं." 3)"अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए वैसे डंस भले ही न दो पर डंस दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए. " 4)"हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है --यह कडुआ सच है." 5)"कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो ---मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ? इसका क्या परिणाम होगा ? क्या मैं सफल रहूँगा ?" 6)"भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये इस पर हमला करदो यानी भय से भागो मत इसका सामना करो ." 7)"दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विव...

पृथ्वीराज चौहान की ऐतिहासिक भूल

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इतिहास इस बात का साक्षी है कि पृथ्वीराज चौहान की ऐतिहासिक भूल की स्वयं पृथ्वीराज चौहान एवं इस देश को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गोरी को 16 बार हराकर बंदी बनवाया था। पर हर बार पैर पकड़ कर माफी माँगने पर उसे 16 बार क्षमादान भी दिया था। किन्तु सत्रहवीं बार हमारे बीच के जयचंद की सहायता से मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान पर विजय प्राप्त कर उसे बंदी बना कारा...गार में डाल दिया था। मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज को क्षमा न कर उसकी दोनों आँखें निकाल कर अपनी क्रूरता का परिचय दिया था। अपनी दोनों आँखें खोने के बाद पृथ्वीराज चौहान के ज्ञान चक्षु खुले और उसने कवि चंद बरदाई के कविता के माध्यम से इशारा करने पर कि - “चार बाँस चौबीर गज अंगुल अष्ट प्रमाण। ता ऊपर सुल्तान है मत चूके चौहान॥” अपने तीर कमान से मुहम्मद गोरी का सिर धड़ से अलग कर हिसाब बराबर कर दिया था। पर इस ऐतिहासिक घटना से हमें यह सीख मिलती है कि दुश्मन हमेशा जहरीला नाग होता है। उसे दूध नहीं पिलाना चाहिए बल्कि पहली ही बार में उसका फन कुचल दिया जाना चाहिए। इतिहास की दूसरी घटना में जब सम्राट चन्द्रगुप्त न...

Science & God - ABDUL KALAM

One Of The Best Arguments.!! I have ever read , Don’t miss even a single word…. I...t’s Too good An atheist professor of philosophy speaks to his class on the problem science has with God, The Almighty. He asks one of his new students to stand and….. Prof: So you believe in God? Student: Absolutely, sir. Prof: Is God good? Student: Sure. Prof: Is God all-powerful? Student: Yes.. Prof: My brother died of cancer even though he prayed to God to heal him. Most of us would attempt to help others who are ill. But God didn’t. How is this God good then? Hmm? (Student is silent.) Prof: You can’t answer, can you? Let’s start again, young fella. Is God good? Student: Yes. Prof: Is Satan good? Student: No. Prof: Where does Satan come from? Student: From….God… Prof: That’s right. Tell me son, is there evil in this world? Student: Yes. Prof: Evil is everywhere, isn’t it? And God did make everything. Correct? Student: Yes. Prof: So who created evil? (Student does not answer.)...

Nathuram Godse-Last Letter

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क्या आप जानते है कि :: 30 जनवरी को यदि गांधी वध रुक जाता तो 3 फरवरी 1948 को देश का एक और विभाजन पक्का था। जिन्ना की मांग थी कि पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समय लगता है और हवाई जहाज से जाने की सभी की औकात नहीं, तो हमको बिलकुल बीच भारत से एक कोरिडोर बना कर दिया जाए जो-- 1. लाहौर से ढाका जाता हो ... 2. दिल्ली के पास से जाता हो 3. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील यानि 16 किलोमीटर हो 4. 10 मील के दोनों और सिर्फ मुस्लिम बस्तियां ही बनेगी तत्कालीन परिस्थितियों में सभी भारतीय और पाकिस्तानी इस सत्य से परिचित थे कि एक और विभाजन निश्चिंत है, उसके बाद नाथूराम गोडसे ने जो किया वो इतिहास है, अगर गाँधी वध का संकल्प पूरा ना होता..........तो आप ही बताइये क्या आज भारत कितना होता ? गोडसे जी भागे नहीं, और इस कार्य को न्यायलय के सभी 35 सुनवाइयों पर स्वीकार किया !!