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Showing posts from 2011

Secret PlAcE At HoMe

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कब तक शर्म करते रहेंगे अपने भारतीय होने पर?

कब तक शर्म करते रहेंगे अपने भारतीय होने पर? ७५२ ई० तक इंग्लैण्ड में मार्च ही पहला महीना हुआ करता था और उसी गणित से ७वाँ महीना सितम्बर और दसवाँ महीना दिसम्बर था लेकिन १७५२ के बाद जब शुरुआती महीना जनवरी को बनाया गया तब से सारी व्यवस्था बिगडी़..तो अब समझे कि क्रिसमस को x-mas क्यों कहते हैं."x " जो रोमन लिपि में दस का संकेत है और "mas" यनि मास,यनि दसवाँ महीना..उस समय दिसम्बर दसवाँ महीना था जिस कारण इसका x-mas नाम पडा़..और मार्च पहला महीना इसलिए होता था क्योंकि भारतीय लोग इसी महीने में अपना नववर्ष मनाते थे और अभी भी मनाते हैं..तो सोचिए कि हमलोग बस" पूरे विश्व को अँधेरी गुफ़ा से निकालकर सूर्य की रश्मि में भिंगोने वाले,जो चारों पैरों पर घुड़कना सीख रहे थे उन्हें उँगली पकड़कर चलना सीखाने वाले हम भारतीयों को आज अपने भारतीय होने पर शर्म महसूस होता है ,हीन भावना से ग्रसित होकर जीवन जी रहे हैं हमसब.... तभी तो हम भारतीय अपना तर्कसंगत नया साल को छोड़कर अंग्रेजों का नया साल मनाते हैं जिसका कोई आधार ही नहीं है.,हम पूजा-पाठ,यज्य-हवन,दान-पुण्य कर घी के दिए को जलाकर अपना ...

Why is there a Poison Warning on Toothpaste?

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source of DATA:   http://www.fluoridealert.org/toothpaste.html Fluoride Action Network January 2005 Don't Swallow Your Toothpaste As of April 7th, 1997, the United States FDA (Food & Drug Administration) has required that all fluoride toothpastes sold in the U.S. carry a poison warning on the label. The warning cautions toothpaste users to: "WARNING: Keep out of reach of children under 6 years of age. If you accidentally swallow more than used for brushing, seek professional help or contact a poison control center immediately." Why the Need for a Warning? One of the little-known facts about fluoride toothpaste, is that each tube of toothpaste - even those specifically marketed for children - contains enough fluoride to kill a child. As detailed below, most "Colgate for Kids" toothpastes - with flavors ranging from bubble gum to watermelon - contain 143 milligrams (mg) of fluoride in each tube. This dose of fluoride is more than double t...

शोभा सिंह और शादीलाल

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sir shadi lal                                                                sir shobha singh “अंकल जाओ ना” ! कभी गुस्से में वह बोल देती है, जब मेरा दिमाग नहीं चलता तो उस लड़की से पूछता हूँ, उससे ही दिमाग चलने लगता है । एक बार उसने चाय पिलाई – मुझे वह लड़की बहुत पसंद है इसका कोई गलत अर्थ न ले जब तक कुछ नहीं होता उसी से मुझे प्रेरणा मिलती है, इस प्रेरणा के भी बड़े अलग अलग नियम है बहुत सारी लड़कियों से ‘प्रेम करने’के बाद भी मैं चरित्रहीन नहीं रहा , चलिये एक दृश्य का किस्सा सुन लीजिये दिल्ली की एक प्रमुख कवियित्रि से मेरा प्रेम चल रहा था कि मैं दिल्ली गया । जनपथ होटल में ठहरा उसने दिल्ली के सारे पाँच सितारा होटलों में खाना खिलाया, नाश्ता कराया, कॉफी पिलाई, अच्छी वकील भी थी...
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When the reward is great, the effort to succeed i...s great, but when government takes all the reward away, no one will try or want to succeed. Is this man truly a genius? Checked out and this is true...it DID happen! An economics professor at a local college made a statement that he had never failed a single student before, but had recently failed an entire class. That class had insisted that Obama's socialism worked and that no one would be poor and no one would be rich, a great equalizer. The professor then said, "OK, we will have an experiment in this class on Obama's plan". All grades will be averaged and everyone will receive the same grade so no one will fail and no one will receive an A.... (substituting grades for dollars - something closer to home and more readily understood by all). After the first test, the grades were averaged and everyone got a B. The students who studied hard were upset and the students who studied little were happy. A...

वक़्त

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इन खूबसूरत हसिनाओ पर भी वक़्त ने अपना असर दिखा दिया किसी ने ठीक ही कहा है : "ज़िन्दगी की राहों में ऐसे मोड़ भी आते हैं, बहार के साथ-साथ यहाँ पतझड़ भी आते हैं , कौन उम्र भर किसी को याद रखता है , वक़्त के साथ तो पत्थर भी बदल जाते हैं !"

सम्राट विक्रम ने रोम के शासक जुलियस सीजर(juliyas seejar) को भी हराकर उसे बंदी बनाकर उज्जेन की सड़कों पर घुमाया था

सम्राट विक्रम ने रोम के शासक जुलियस सीजर को भी हराकर उसे बंदी बनाकर उज्जेन की सड़कों पर घुमाया था. टिपण्णी यह है कि ---------------------- कालिदास -ज्योतिर्विदाभरण-अध्याय२२-ग्रन्थाध्यायनिरूपणम्- श्लोकैश्चतुर्दशशतै सजिनैर्मयैव ज्योतिर्विदाभरणकाव्यविधा नमेतत् ॥ᅠ२२.६ᅠ॥ विक्रमार्कवर्णनम्-वर्षे श्रुतिस्मृतिविचारविवेकरम्ये श्रीभारते खधृतिसम्मितदेशपीठे। मत्तोऽधुना कृतिरियं सति मालवेन्द्रे श्रीविक्रमार्कनृपराजवरे समासीत् ॥ᅠ२२.७ᅠ॥ नृपसभायां पण्डितवर्गा-शङ्कु सुवाग्वररुचिर्मणिरङ्गुदत्तो जिष्णुस्त्रिलोचनहरो घटखर्पराख्य। अन्येऽपि सन्ति कवयोऽमरसिंहपूर्वा यस्यैव विक्रमनृपस्य सभासदोऽमो ॥ᅠ२२.८ᅠ॥ सत्यो वराहमिहिर श्रुतसेननामा श्रीबादरायणमणित्थकुमारसिंहा। श्रविक्रमार्कंनृपसंसदि सन्ति चैते श्रीकालतन्त्रकवयस्त्वपरे मदाद्या ॥ᅠ२२.९ᅠ॥ नवरत्नानि-धन्वन्तरि क्षपणकामरसिंहशङ्कुर्वेतालभट्टघटखर्परकालिदासा। ख्यातो वराहमिहिरो नृपते सभायां रत्नानि वै वररुचिर्नव विक्रमस्य ॥ᅠ२२.१०ᅠ॥ यो रुक्मदेशाधिपतिं शकेश्वरं जित्वा गृहीत्वोज्जयिनीं महाहवे। आनीय सम्भ्राम्य मुमोच यत्त्वहो स विक्रमार्कः समसह्य...

महाभारत काल मे हुआ था परमाणु बम, मिसाइल जैसे आग्नेयास्त्रों का प्रयोग

महाभारत युद्ध का आरंभ १६ नवंबर ५५६१ ईसा पूर्व हुआ और १८ दिन चलाने के बाद २ नवंबर ५५६१ ईसा पूर्व को समाप्त हुआ उसी रात दुर्योधन ने अश्वथामा को सेनापति नियुक्त किया । ३ नवंबर ५५६१ ईसा पूर्व के दिन भीम ने अश्वथामा को पकड़ने का प्रयत्न किया । तब अश्वथामा ने जो ब्रह्मास्त्र छोड़ा उस अस्त्र के कारण जो अग्नि उत्पन्न हुई वह प्रलंकारी था । वह अस्त्र प्रज्वलित हुआ तब एक भयानक ज्वाला उत्पन्न हुई जो तेजोमंडल को घिर जाने समर्थ थी । ( तदस्त्रं प्रजज्वाल महाज्वालं तेजोमंडल संवृतम ।। ८ ।। ) इसके बाद भयंकर वायु जोरदार तमाचे मारने लगे । सहस्त्रावधि उल्का आकाश से गिरने लगे । भूतमातरा को भयंकर महाभय उत्पन्न हो गया । आकाश में बड़ा शब्द हुआ । आकाश में बड़ा शब्द हुआ । आकाश जलाने लगा पर्वत, अरण्य, वृक्षो के साथ पृथ्वी हिल गई । (सशब्द्म्भवम व्योम ज्वालामालाकुलं भृशम । चचाल च मही कृत्स्ना सपर्वतवनद्रुमा ।। १० ।। अ १४) जब दोनों अस्त्र पृथ्वी को जलाने लगे तब नारद तथा व्यास ये दो महारची बीच में आकर खड़े हो गए । उन्होने अर्जुन और अश्वत्थामा को अपने अपने अणुअस्त्रेय वापस लेने कि विनती कि । अर्जुन ने वह आज्ञा मान...

डायबिटीज के नियंत्रण की चाबी- अलसी

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पिछले कुछ दशकों में भारत समेत पूरे विश्व में डायबिटीज टाइप-2 के रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है व अब तो यह किशोरों और बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। डायबिटीज एक महामारी का रुप ले चुकी है। आइये हम जानने की कोशिश करते हैं कि पिछले कुछ दशकों में हमारे खान-पान, जीवनचर्या या वातावरण में ऐसा क्या बदलाव आया है। शोधकर्ताओं के अनुसार जब से परिष्कृत यानी “रिफाइन्ड तेल” (जो बनते समय उच्च तापमान, हेग्जेन, कास्टिक सोडा, फोस्फोरिक एसिड, ब्लीचिंग क्ले आदि घातक रसायनों के संपर्क से गुजरता है), ट्रांसफेट युक्त पूर्ण या आंशिक हाइड्रोजिनेटेड वसा यानी वनस्पति घी (जिसका प्रयोग सभी पैकेट बंद खाद्य पदार्थों व बेकरी उत्पादनों में धड़ल्ले से किया जाता है), रासायनिक खाद, कीटनाशक, प्रिजर्वेटिव, रंग, रसायन आदि का प्रयोग बढ़ा है तभी से डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़ी है। हलवाई और भोजनालय भी वनस्पति घी या रिफाइन्ड तेल का प्रयोग भरपूर प्रयोग करते हैं और व्यंजनों को तलने के लिए तेल को बार-बार गर्म करते हैं जिससे वह जहर से भी बदतर हो जाता है। शोधकर्ता इन्ही को डायबिटीज का प्रमुख कारण मानते हैं। ...