भारत में छुआछूत का इतिहास: क्या अंग्रेजों ने इसे पैदा किया, बढ़ाया या केवल दर्ज किया?
भारत के सामाजिक इतिहास में जाति, जातिगत भेदभाव और छुआछूत ऐसे विषय हैं जिन पर आज भी बहुत बहस होती है। एक ओर यह दावा किया जाता है कि छुआछूत पूरी तरह अंग्रेजों की देन थी। दूसरी ओर ऐतिहासिक स्रोतों में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों और अलग-अलग कालों में सामाजिक बहिष्कार तथा अस्पृश्यता के अनेक प्रमाण मिलते हैं। तो सच्चाई क्या है? क्या भारत में अंग्रेजों के आने से पहले छुआछूत थी? क्या अंग्रेजों ने जाति व्यवस्था को और कठोर बनाया? या उन्होंने पहले से मौजूद सामाजिक विभाजनों को अपनी प्रशासनिक व्यवस्था, जनगणना और कानूनों के माध्यम से एक नए रूप में दर्ज और वर्गीकृत किया? इन सवालों का जवाब भावनाओं से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक प्रमाणों और उपलब्ध दस्तावेजों से तलाशना चाहिए। सबसे पहले एक जरूरी तथ्य सोशल मीडिया और इंटरनेट पर एक दावा बहुत तेजी से फैलता है कि “1820 में Adam Smith ने भारत की शिक्षा व्यवस्था का सर्वे किया था।” यह सही नहीं है। यहाँ अक्सर दो अलग-अलग व्यक्तियों को मिला दिया जाता है। Adam Smith प्रसिद्ध स्कॉटिश अर्थशास्त्री थे और उनका निधन 1790 में हो चुका था। भारत में...