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Showing posts from November, 2011

वक़्त

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इन खूबसूरत हसिनाओ पर भी वक़्त ने अपना असर दिखा दिया किसी ने ठीक ही कहा है : "ज़िन्दगी की राहों में ऐसे मोड़ भी आते हैं, बहार के साथ-साथ यहाँ पतझड़ भी आते हैं , कौन उम्र भर किसी को याद रखता है , वक़्त के साथ तो पत्थर भी बदल जाते हैं !"

सम्राट विक्रम ने रोम के शासक जुलियस सीजर(juliyas seejar) को भी हराकर उसे बंदी बनाकर उज्जेन की सड़कों पर घुमाया था

सम्राट विक्रम ने रोम के शासक जुलियस सीजर को भी हराकर उसे बंदी बनाकर उज्जेन की सड़कों पर घुमाया था. टिपण्णी यह है कि ---------------------- कालिदास -ज्योतिर्विदाभरण-अध्याय२२-ग्रन्थाध्यायनिरूपणम्- श्लोकैश्चतुर्दशशतै सजिनैर्मयैव ज्योतिर्विदाभरणकाव्यविधा नमेतत् ॥ᅠ२२.६ᅠ॥ विक्रमार्कवर्णनम्-वर्षे श्रुतिस्मृतिविचारविवेकरम्ये श्रीभारते खधृतिसम्मितदेशपीठे। मत्तोऽधुना कृतिरियं सति मालवेन्द्रे श्रीविक्रमार्कनृपराजवरे समासीत् ॥ᅠ२२.७ᅠ॥ नृपसभायां पण्डितवर्गा-शङ्कु सुवाग्वररुचिर्मणिरङ्गुदत्तो जिष्णुस्त्रिलोचनहरो घटखर्पराख्य। अन्येऽपि सन्ति कवयोऽमरसिंहपूर्वा यस्यैव विक्रमनृपस्य सभासदोऽमो ॥ᅠ२२.८ᅠ॥ सत्यो वराहमिहिर श्रुतसेननामा श्रीबादरायणमणित्थकुमारसिंहा। श्रविक्रमार्कंनृपसंसदि सन्ति चैते श्रीकालतन्त्रकवयस्त्वपरे मदाद्या ॥ᅠ२२.९ᅠ॥ नवरत्नानि-धन्वन्तरि क्षपणकामरसिंहशङ्कुर्वेतालभट्टघटखर्परकालिदासा। ख्यातो वराहमिहिरो नृपते सभायां रत्नानि वै वररुचिर्नव विक्रमस्य ॥ᅠ२२.१०ᅠ॥ यो रुक्मदेशाधिपतिं शकेश्वरं जित्वा गृहीत्वोज्जयिनीं महाहवे। आनीय सम्भ्राम्य मुमोच यत्त्वहो स विक्रमार्कः समसह्य...

महाभारत काल मे हुआ था परमाणु बम, मिसाइल जैसे आग्नेयास्त्रों का प्रयोग

महाभारत युद्ध का आरंभ १६ नवंबर ५५६१ ईसा पूर्व हुआ और १८ दिन चलाने के बाद २ नवंबर ५५६१ ईसा पूर्व को समाप्त हुआ उसी रात दुर्योधन ने अश्वथामा को सेनापति नियुक्त किया । ३ नवंबर ५५६१ ईसा पूर्व के दिन भीम ने अश्वथामा को पकड़ने का प्रयत्न किया । तब अश्वथामा ने जो ब्रह्मास्त्र छोड़ा उस अस्त्र के कारण जो अग्नि उत्पन्न हुई वह प्रलंकारी था । वह अस्त्र प्रज्वलित हुआ तब एक भयानक ज्वाला उत्पन्न हुई जो तेजोमंडल को घिर जाने समर्थ थी । ( तदस्त्रं प्रजज्वाल महाज्वालं तेजोमंडल संवृतम ।। ८ ।। ) इसके बाद भयंकर वायु जोरदार तमाचे मारने लगे । सहस्त्रावधि उल्का आकाश से गिरने लगे । भूतमातरा को भयंकर महाभय उत्पन्न हो गया । आकाश में बड़ा शब्द हुआ । आकाश में बड़ा शब्द हुआ । आकाश जलाने लगा पर्वत, अरण्य, वृक्षो के साथ पृथ्वी हिल गई । (सशब्द्म्भवम व्योम ज्वालामालाकुलं भृशम । चचाल च मही कृत्स्ना सपर्वतवनद्रुमा ।। १० ।। अ १४) जब दोनों अस्त्र पृथ्वी को जलाने लगे तब नारद तथा व्यास ये दो महारची बीच में आकर खड़े हो गए । उन्होने अर्जुन और अश्वत्थामा को अपने अपने अणुअस्त्रेय वापस लेने कि विनती कि । अर्जुन ने वह आज्ञा मान...