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Showing posts from January, 2013

STORY 23

ईश्वर का प्रमाण ========= भारतीय संस्कृति में  ईश्वर का प्रमाण एक दिन एक राजा ने अपने सभासदों से कहा, ‘क्या तुम लोगों में कोई ईश्वर के होने का प्रमाण दे सकता है ?’ सभासद सोचने लगे, अंत में एक मंत्री ने कहा, ‘महाराज, मैं कल इस प्रश्न का उत्तर लाने का प्रयास करूंगा।’ सभा समाप्त होने के बाद उत्तर की तलाश में वह मंत्री अपने गुरु के पास जा रहा था। रास्ते में उसे गुरुकुल का एक विद्यार्थी मिला। मंत्री को चिंतित देख उसने पूछा, ‘सब कुशल मंगल तो है ? इतनी तेजी से कहां चले जा रहे हैं ?’ मंत्री ने कहा, ‘गुरुजी से ईश्वर की उपस्थिति का प्रमाण पूछने जा रहा हूं।’ विद्यार्थी ने कहा, ‘इसके लिए गुरुजी को कष्ट देने की क्या आवश्यकता है ? इसका जवाब तो मैं ही दे दूंगा।’ अगले दिन मंत्री उस विद्यार्थी को लेकर राजसभा में उपस्थित हुआ और बोला, ‘महाराज यह विद्यार्थी आपके प्रश्न का उत्तर देगा।’ विद्यार्थी ने पीने के लिए एक कटोरा दूध मांगा। दूध मिलने पर वह उसमें उंगली डालकर खड़ा हो गया। थोड़ी-थोड़ी देर में वह उंगली निकालकर कुछ देखता, फिर उसे कटोरे में डालकर खड़ा हो जाता। जब काफी देर हो गई तो राजा नाराज होकर ब...

संस्कृति - VALUE OF PI

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संस्कृति- TAJ MAHAL OR TEJOMAHALAYA

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मैं जब 10 वर्ष का था, उस समय मेरी  हिन्दी पुस्तक में एक पाठ ताजमहल पर था। जिस दिन वह पाठ पढ़ाया जाना था उस दिन कक्षा के सभी बालक अत्यधिक उल्लसित थे। उस पाठ में ताजमहल की भव्यता-शुभ्रता का वर्णन तो था ही, उससे अधिक उससे जुड़े मिथकों का वर्णन जिन्हें हमारे शिक्षक ने अतिरज्जित रूप से बढ़ा दिया था। मेरे बाल मन पर यह बात पूर्णरूप से अंकित हो गई कि यह विश्व प्रसिद्ध ताज मुगल सम्राट्‌ शाहजहाँ ने बनवाया था।  एक विशेष कार्य से जीवन में पहली बार आगरा आया। वह विशिष्ट कार्य हम दोनों के मन पर इतना अधिक प्रभावी था कि मार्ग में एक बार भी यह ध्यान नहीं आया कि इसी आगरा में विश्व प्रसिद्ध दर्शनीय ताजमहल है। कार्य हो जाने पर जब हम लोग बालूगंज से आगरा किला स्टेशन की ओर लौट रहे थे तो लम्बी ढलान के नीचे चौराहे से जो एकाएक दाहिनी ओरदृष्टि पड़ी तो सूर्य की आभा में ताजमहल हमारे सम्मुख अपनी पूर्ण भव्यता में खड़ा था। हम दोनों कुछ क्षण तो स्तब्ध से खड़े रहे गये, तदुपरान्त किसी साईकिल वाले की घंटी सुनकर ह लोगों को चेत हुआ। जहाँ पर हम लोग खड़े थे वहाँ पर चारों ओर की सड़कें चढ़ाई पर जाती थीं। ऐसा प्रती...

इलाज - सांप के काटने का

दोस्तो सबसे पहले साँपो के बारे मे एक  महत्वपूर्ण बात आप ये जान लीजिये ! कि अपने  देश भारत मे 550  किस्म के साँप है ! जैसे एक cobra है ,viper है ,karit है ! ऐसी 550 किस्म  की साँपो की जातियाँ हैं ! इनमे से मुश्किल से 10 साँप है  जो जहरीले है सिर्फ 10 ! बाकी सब non poisonous है! इसका मतलब ये हुआ 540 साँप ऐसे है जिनके काटने से आपको कुछ नहीं होगा !! बिलकुल चिंता मत करिए ! लेकिन साँप के काटने का डर इतना है (हाय साँप ने काट लिया ) और कि कई बार आदमी heart attack से  मर जाता है !जहर से नहीं मरता cardiac arrest से मर जाता है ! तो डर इतना है मन मे ! तो ये डर निकलना चाहिए ! वो डर कैसे निकलेगा ???? जब आपको ये पता होगा कि 550 तरह के साँप है उनमे से सिर्फ 10 साँप जहरीले हैं ! जिनके काटने से  कोई मरता है ! इनमे से जो सबसे जहरीला साँप है उसका नाम है ! russell viper ! उसके बाद है karit इसके बाद है viper और एक है cobra ! king cobra  जिसको आप कहते है काला नाग !! ये 4 तो बहुत ही खतरनाक और जहरीले...

STORY 22

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“When I got home that night as my wife served dinner, I held her hand and said, I’ve got something to tell you. She sat down and ate quietly. Again I observed the hurt in her eyes. ... Suddenly I didn’t know how to open my mouth. But I had to let her know what I was thinking. I want a divorce. I raised the topic calmly. She didn’t seem to be annoyed by my words, instead she asked me softly, why? I avoided her question. This made her angry. She threw away the chopsticks and shouted at me, you are not a man! That night, we didn’t talk to each other. She was weeping. I knew she wanted to find out what had happened to our marriage. But I could hardly give her a satisfactory answer; she had lost my heart to Jane. I didn’t love her anymore. I just pitied her! With a deep sense of guilt, I drafted a divorce agreement which stated that she could own our house, our car, and 30% stake of my company. She glanced at it and then tore it into pieces. The woman who had spent ten years o...

STORY 21

डाइनिंग टेबल पर खाना देखकर बच्चा भड़का ... फिर वही सब्जी,रोटी और दाल में तड़का....? मैंने कहा था न कि मैं पिज्जा खाऊंगा रोटी को बिलकुल हाथ नहीं लगाउंगा बच्चे ने थाली उठाई और बाहर गिराई.......? ------- बाहर थे कुत्ता और आदमी दोनों रोटी की तरफ लपके .......? कुत्ता आदमी पर भोंका आदमी ने रोटी में खुद को झोंका और हाथों से दबाया कुत्ता कुछ भी नहीं समझ पाया उसने भी रोटी के दूसरी तरफ मुहं लगाया दोनों भिड़े जानवरों की तरह लड़े एक तो था ही जानवर, दूसरा भी बन गया था जानवर..... आदमी ज़मीन पर गिरा, कुत्ता उसके ऊपर चढ़ा कुत्ता गुर्रा रहा था और अब आदमी कुत्ता है या कुत्ता आदमी है कुछ भी नहीं समझ आ रहा था नीचे पड़े आदमी का हाथ लहराया, हाथ में एक पत्थर आया कुत्ता कांय-कांय करता भागा........ आदमी अब जैसे नींद से जागा हुआ खड़ा और लड़खड़ाते कदमों से चल पड़ा..... वह कराह रहा था रह-रह कर हाथों से खून टपक रहा था बह-बह कर आदमी एक झोंपड़ी पर पहुंचा....... झोंपड़ी से एक बच्चा बाहर आया और ख़ुशी से चिल्लाया आ जाओ, सब आ जाओ बापू रोटी ल...

संस्कृति -मेरी सोच आज की भारतीय संस्कृति INDIAN CULTURE पर

· एक बार मेरा एक दोस्त बेर के पेड़ पर बेर के फल तोड़ रहा था।किसी कारणवश वो असंतुलित हो गया और नाचे गिर पड़ा।वो गिरा तो बहुत ऊंचाई से था पर उसके मित्र समूह में कुछ उसके विरोधी भी थे जो उसके गिरने पर हंसने लगे।तभी मेरे उस मित्र ने कहा कि हंस क्यों रहे हो सालों मैं पेड़ से गिरा थोड़े ही हूँ मैंने तो छलांग लगाई है वहाँ से।ह…हा…जब भी ये बात सोचता हूँ तो हंसी आ जाती है क्योंकि सच में उन विरोधियों का मुंह बंद कर दिया था उसने। यही हाल मैं अपने भारतीयों का देखता हूँ पर यहाँ मुझे हंसी नहीं आती दुःख होता है।क्योंकि यहाँ स्थिति उल्टी है।विरोधी की जगह मेरे देशवासी हैं और मेरे चालाक मित्र की जगह मेरे दुश्मन। जिस टाई को विदेशी अपनी नाक पोछने के लिए बांधते थे उस टाई को बांधना हमने अपनी शान समझ लिया।विदेशों में तो सर्दी है लोगों की नाक बहती रहती है पर हमारे यहाँ तो गर्मी है…..! विदेशी हमारी तरह रोटी-सब्जी या दाल-भात नहीं खाते हैं तो वे हाथ के बजाय कांटे-छूरी या चम्मच का प्रयोग करते हैं पर हम क्यों??चम्मच और कटोरी का मेल है।चूंकि कटोरी में खीर-सेवई जैसे तरल पदार्थ खाए जाते हैं तो चम्मच...

इलाज - चाय एक नुक्सान दायक पेय हैं (TEA IS HARMFULL )

मित्रो चाय के बारे मे सबसे  पहली बात ये कि चाय जो है वो हमारे देश भारत का उत्पादन नहीं है ! अंग्रेज़  जब भारत आए थे तो अपने साथ चाय का पौधा लेकर आए थे ! और भारत के कुछ ऐसे स्थान जो अंग्रेज़ो  के लिए अनुकूल (जहां ठंड बहुत होती है) वहाँ पहाड़ियो मे चाय के पोधे लगवाए और उसमे से चाय होने  लगी ! तो अंग्रेज़ अपने साथ चाय लेकर आए भारत मे कभी चाय हुई नहीं !1750 से पहले भारत मे कहीं भी चाय  का नाम और निशान नहीं था ! ब्रिटिशर आए east india company लेकर तो उन्होने चाय के बागान लगाए  ! और उन्होने ये अपने लिए लगाए ! क्यूँ लगाए ??? चाय एक medicine है इस बात को ध्यान से पढ़िये !चाय एक medicine है लेकिन सिर्फ उन लोगो के लिए  जिनका blood pressure low रहता है ! और जिनका blood pressure normal और high रहता है चाय  उनके लिए जहर है !! low blood pressure वालों के लिए चाय अमृत है और जिनका high और normal रहता है चाय उनके  लिए जहर है ! ______________________________ अब अंग्रेज़ो की एक समस्या है वो आज भी है और हजारो साल से है !सभी अंग्रेज़ो का BP low...

संस्कृति -मोक्ष्यपातं : सांप-सीढी का खेल

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मोक्ष्यपातं : सांप-सीढी का खेल सांप-सीढ़ी का खेल भरत में 'मोक्ष पातं' के नाम से बच्चों को धर्म सिखाने के लिए खेलाया जाता था। सांप सीढ़ी का खेल तेरहवीं शताब्दीे में कवि संत ज्ञान देव (ज्ञानेश्वर  देव जी ; महारास्त्र ) द्वारा तैयार किया गया था इसे मूल रूप से मोक्षपट कहते थे। जहां सीढ़ी मोक्ष का रास्ता है और सांप पाप का रास्ता है। इस खेल की अवधारणा 13वीं सदी में कवि संत 'ज्ञानदेव' ने दी थी। मौलिक खेल में जिन खानों में सीढ़ी मिलती थी वो थे- 12वां खाना आस्था का था, 51वां खाना विश्वास का, 57वां खाना उदारता का, 76वां ज्ञान का और 78वां खाना वैराग्य का था। और जीन खानों में सांप मिलते थे वो इस प्रकार थे- 41 वां खाना अवमानना का, 44 वां खाना अहंकार का, 49 वां खाना अश्लीलता का, 52 वां खाना चोरी का, 58 वां खाना झूठ का, 62 वां खाना शराब पीने का, 69 वां खाना उधर लेने का, 73 वां खाना हत्या का , 84 वां खाना क्रोध का, 92 वां खाना लालच का, 95 वां खाना घमंड का ,99 वां खाना वासना का हुआ करता था। 100वें खाने में पहुचने पे मोक्ष मिल जाता था। 1892 में ये खेल अंग्रेज इंग्लैंड ले गए और...

संस्कृति -(महाकुम्भ का वैज्ञानिक सिद्धांत)scientific theory of mahakumbh

महाकुम्भ का वैज्ञानिक सिद्धांत सूर्य 14 जनवरी 2013 मंगलवार को रात्रि में लगभग 8 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा। तथा 14 मार्च  2013 शुक्रवार को रात में कुम्भ राशि को छोड़ देगा। वास्तव में मकर एवं कुम्भ राशियाँ दोनों ही शनि ग्रह की राशियाँ हैं। ये दोनों राशियाँ भयंकर अन्धकार  सतह वाली राशियाँ हैं। कक्ष्या में बहुत दूर स्थित होने के कारण यह घुर्णन ऊर्जा (Kinetic Energy) बहुत  ही अल्प मात्रा में उत्पन्न कर पाटा है। इसके अलावा इसकी सतह कार्बोफेनाथिलिक मेथोडाक्साइड से बनी  होने के कारण सूर्य से निकलने वाली परावैगनी किरणों (Ultraviolet rays) को बहु आयाम (Multi  Prospect) बनाकर पृथ्वी की तरफ मोड़ देती है। परिणाम स्वरुप पृथ्वी के प्राणियों के शरीर के अन्दर की  श्रोणि मेखला (Pelvic Girdle) एवं सुषुम्ना (Spinal Chord) के प्रत्यावर्ती द्रव्यों (Fluids) के केन्द्रीय अम्ल  (Nucleic Acid) आवेश रहित (Discharged) हो जाते है। आदमी की सोच, निर्णय, कार्य प्रणाली, कार्य  प्रकृति एवम परकाया सम्बन्ध सब स्खलित हो जाता है।