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Showing posts from February, 2012

संस्कृति - दान किया हैं ?What is Alms or Charity?

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संस्कृति - Abdul Kalam On Vedas

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संस्कृति -1941 में डूबे ब्रिटिश जहाज से चांदी का खजाना मिला, कोलकाता से ब्रिटेन जा रहा था

1941 में डूबे ब्रिटिश जहाज से चांदी का खजाना मिला, कोलकाता से ब्रिटेन जा रहा था लंदन, एजेंसी : अमेरिका की एक अन्वेषण कंपनी ने डूबे हुए एक ब्रिटिश जहाज से भारी मात्रा में चांदी का खजाना बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 15 करोड़ पाउंड (करीब 1155 करोड़ रुपये) हो सकती है। यह जहाज कोलकाता से लंदन की यात्रा पर रवाना हुआ था लेकिन अटलांटिक में 1941 में एक जर्मन यू बोट ने इसे डुबो दिया था। परिवहन विभाग के अनुसार अन्वेषण कंपनी ओडिसी मैरिन इस माल का 80 फीसदी हिस्सा रखेगी। परिवहन विभाग ने कंपनी को डूबे विशालकाय जहाज के मलबे की खोज की जिम्मेदारी सौंपी थी। एसएस गैरसोप्पा नामक यह जहाज दिसंबर 1940 में कोलकाता से रवाना हुआ था और इस पर 240 टन चांदी, लोहा और चाय लदी थी। यह पोत ब्रिटिश स्टीम नेवीगेशन कंपनी से ताल्लुक रखता था। यह जहाज लिवरपूल जाने वाला था लेकिन मजबूरन इसे अपने सैन्य काफिले से अलग होकर अपना रास्ता बदलना पड़ा था। चूंकि आयरलैंड के पास मौसम बहुत खराब हो गया था और इस जहाज में ईंधन भी बहुत कम बचा था। जब यह जहाज एक छोटा रास्ता अपनाकर आयरिश हार्बर के दक्षिण-पश्चिम में प...

इलाज -Blow shell to get rid from diseases

यदि पाना हें रोगों से छुटकारा तो शंख बजाइए और रोग भगाइए ; Blow shell to get rid from diseases (जानिए क्या हें शंख ,इसके प्रभाव और परिणाम) भारतीय संस्कृति में शंख को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक शंख भी था। अथर्ववेदके अनुसार, शंख से राक्षसों का नाश होता है-शंखेन हत्वारक्षांसि।भागवत पुराण में भी शंख का उल्लेख हुआ है। शंख में ओम ध्वनि प्रतिध्वनितहोती है, इसलिए ओम से ही वेद बने और वेद से ज्ञान का प्रसार हुआ। पुराणों और शास्त्रों में शंख ध्वनि को कल्याणकारी कहा गया है। इसकी ध्वनि विजय का मार्ग प्रशस्त करती है। शंख का महत्व धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, वैज्ञानिक रूप से भी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके प्रभाव से सूर्य की हानिकारक किरणें बाधक होती हैं। इसलिए सुबह और शाम शंखध्वनिकरने का विधान सार्थक है। जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चंद्र बसु के अनुसार, इसकी ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक व्याप्त बीमारियों के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। इससे पर्यावरण शुद्ध हो जाता है। शंख में गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम जैसे उपयोगी पदार्थ मौ...

संस्कृति-Proud to be Indian - Mythology and Science

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तांडव नृत्य व क्वांटम सिद्धांत आज चर्चा भगवान शिव के तांडव नृत्य की....। सृष्टि के विनाश और पुनः निर्माण का द्योतक...। आधुनिक क्वांटम सिद्धांत पर नटराज की तुलना वैज्ञानिक Fritzof Capra की नजर से देखिए...। 1975 में Tao of Physics नामक पुस्तक लिखी इन्होंने...। उनके मुताबिक आधुनिक भौतिकी में पदार्थ निष्क्रिय और जड़ नहीं है। एक-दूसरे का विनाश व रचना करते वह सतत नृत्य में रत है...। दाएं हाथ का डमरू नए परमाणु की उत्पत्ति व बाएं हाथ की मशाल पुराने परमाणुओं के विनाश की कहानी बताता है। अभय मुद्रा में भगवान का दूसरा दांया हाथ हमारी सुरक्षा जबकि वरद मुद्रा में उठा दूसरा बांया हाथ हमारी जरुरतों की पूर्ति सुनिश्चित करता है...। अर्थात शिव जी का ताण्डव नृत्य ब्रह्माण्ड में हो रहे मूल कणों के नृत्य का प्रतीक है...। लिहाजा कोई आश्चर्य नहीं नाभिकीय अनुसंधान यूरोपीय संगठन (CERN) में नटराज की प्रतिमा की स्थापना पर...।  http://cerncourier.com/cws/article/cern/29122/3 On 18 June CERN unveiled an unusual new landmark - a statue of the Indian deity Shiva. The statue is a gift from CERN's Ind...

संस्कृति- What i SAY??????????

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संस्कृति-Different Expressions-Hindu Mythology, Leadership.

A young girl and her father were on a pilgrimage. When they reached the temple of Shiva, her father said, “Lets collect bilva leaves and dhatura flowers and offer them to Shiva to show our devotion.” This is what the father and daughter did. Then, they reached a Vishnu temple, and her father said, “Lets collect tulsi leaves and offer it to Vishnu to show our devotion.” This is what the father and daughter did. Then they reached a Ganesha temple. On the father’s advice, the daughter offered blades of grass. At the temple of the Kali, the daughter was told to offer neem leaves and lemons. At the temple of Hanuman, she offered sesame oil. The daughter was confused, “You say all gods are actually one.” “Yes,” the father confirmed. “Then why different offerings to different gods?” “Because,” said the father, “Each form is different and different forms need to be told the same thing in different ways. Each time we have expressed our devotion but the vehicle of communication has changed de...

संस्कृति-The waxing of the waning employee-Leadership

Chandra, the moon-god, disobeyed his father-in-law, Daksha Prajapati. Daksha had given him 27 wives and told him that he should love all wives equally. Chandra, however, preferred only one of them. An angry Daksha, therefore cursed Chandra, that he would suffer from the wasting disease. Each day, his luster would wane and eventually he would disappear forever. As a result, the moon started to wane. A terrified Chandra did not know what to do. Being a Deva, a sky-god, he turned to his king, Indra, and begged him for help. “The only person you can turn to is Shiva,” said Indra, “because he is not a Deva. He is a Maha-Deva, greater than all gods put together.” Chandra went to Shiva but Shiva was a silent god, with eyes shut, deep in meditation. Chandra sat before him, trembling, afraid, desperate for help. Shiva opened his eyes, looked at the miserable moon-god. Without speaking a word, Shiva picked Chandra up and gently placed him on his forehead. Instantly, the moon began to wax once...

संस्कृति-Elastic Time - Leadership Article

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A king wanted the perfect groom for his daughter. So he travelled to the abode of the gods to find out who was the perfect man ever created. When he returned with the information, the world had changed dramatically: a hundred years had passed, his daughter and his entire family had died and no one remembered him. He was told that time flows faster in the realm of the gods, what is a day there is a hundred years on earth. In another story, the gods asked a hermit to fetch them a pot of water. As the hermit dipped the pot in the water, he saw a beautiful girl and fell in love with her and asked her to marry him. She agreed then and there and so the hermit became a householder and had children by the woman, and the children had children of their own. In his old age, there was suddenly a great flood. The river broke its banks and washed away everything: his home, his children, his grandchildren, even his wife. He was left alone, without anything, when suddenly he heard the gods ...

संस्कृति - Proud to be indian -4 ( laws of planetary motion)

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जर्मन खगोलविद Johannes Kepler ने ग्रहों की गति का नियम दिया। 1609 AD में। लेकिन भारतीय विद्वान आर्यभट्ट ने इसका वर्णन किया है। केपलर से बहुत बहुत पहले, 5 वीं ईसवी सदी में। आर्यभटीयम के अध्याय 3 का 17 वां श्लोक देखिए....इसका मतलब निकलता है कि... सारे ग्रहों-उपग्रहों में गति होती है। धुरी पर घूमने के साथ यह अपनी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में भी चक्कर लगाते हैं। दोनों गतियों की दिशा नियत रहती है। साभार - अनिल कुमार त्रिवेदी जी ........................................................................................................................................ आज चर्चा धरती की लट्टुई गति पर...। यह अपनी धुरी पर चक्कर लगाती है...। पश्चिम से पूर्व की ओर 23.5 अंश झुककर...। 23 घंटे 56 मिनट और 4 .091 सेकंड में...। माना जाता है कि फ्रांसीसी भौतिक विद Jean Bernard Leon Foucault ने 'Foucault पेंडुलम' बनाया। 1851 में। इससे धरती की दैनिक गति का पता चला...। अब जिक्र आर्यभट्ट का करुंगा। 5 वीं सदी में इन्होंने आर्यभटीय लिखा। पुस्तक के अध्याय 4 का 9 वां श्लोक देख...

संस्कृति - आजकल हम जन्मदिन किस प्रकार मनाते हैं ?(RITUALS and BIRTHDAY)

RITUALS and BIRTHDAY आजकल हम जन्मदिन किस प्रकार मनाते हैं ? पश्चिमी सभ्यता का अन्धानुकरण करने के युग में हम अपनी संस्कृति, सभ्यता एवं मनोबल को इतना अधिक गिरा चुके हैं की उन्हें उठने में और हमारा विश्वास जीतने में न जाने कितने युग बीत जायें कहा नहीं जा सकता ... हमारी वर्तमान संस्कृति में अधकचरापन आ गया है “ न पूरी ताकत से विदेशी हो पाए , न पूरी ताकत से भारतीय हो पाए, हम बीच के हो गए, खिचड़ी हो गए !! “ इसी कड़ी में जन्मदिवस को मनाये जाने पर हम एक चर्चा करने निकलें हैं आइये कुछ बातों पर ध्यान दें १. आज हम जन्मदिन दिनांक अनुसार मनाते हैं तिथि के अनुसार नहीं, तिथि नुसार जन्मदिन मनाने से उस दिन हमारे सभी सूक्ष्म देह के द्वार आशीर्वाद हेतु खुल जाते हैं २. आज हम अन्धानुकरण करते हुए अर्धरात्रि को शुभकामनायें देते हैं जो वास्तविक रूप में अशुभ की घड़ी होती है, किसी भी शुभकार्य को अर्धरात्रि में न कर उसे टालना चाहिए वैदिक संस्कृति के अनुसार दिवस का आरम्भ सूर्योदय से होता है अतः शुभकामनायें सूर्योदय उपरांत ही देनी चाहिए ३. आज हम जन्मदिवस पर मोमबत्ती जलाते हैं, मोमबत्ती 'तम' प्...

-संस्कृति अकबर से भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन तक : अयोध्या एक यात्रा PART 3

From Akbar to Indian Independence : Ayodhya - a journey through time हुमायूँ के बाद अकबर का शासन काल आया, उसने अपने राज्य को १२ भागो मे विभक्त किया, अनुमानित है कि अकबर के शासन काल मे हिंदुओं ने लगभग २० बार जन्मभूमि को स्वतंत्र कराने की लडाईयां लडी, अकबर ने हिंदुओं के अधिकार को मान्यता देते हुए मस्जिद के बिल्कुल आगे एक चबूतरा बनाने और पूजा करने का अधिकार दिया, यही चबूतरा आज राम चबूतरा के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही अकबर ने राम और सीता मुद्रित चांदी के सिक्के (रामटका) भी बनवाये. और रामायण की सचित्र किताबे भी बनवाई. अकबरनामा व आइना ए अकबरी के लेखक अबुल फजल अयोध्या को राम का निवास व हिंदुओ की पुण्यभूमि मानते हैं। जहांगीर के शासन काल मे १६०८ व १६११ के बीच विलियम फिंच ने अयोध्या की यात्रा की, उन्होंने भी अयोध्या में राम के होने की पुष्टि अपने लेख में की जिसे विलियम फोस्टर ने अपनी पुस्तक " अर्ली� ट्रेवल्स इन इंडिया " मे शामिल किया। १८५८ के बाद औरंगजेब के सरदार जांबाज खान ने अयोध्या पर हमला किया किंतु परास्त हुआ, गुरु गोविंद सिंह जी के अकालियों ने उसे रुदाली और सादात...

संस्कृति - राम से बाबर तक : अयोध्या एक यात्रा PART 2

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 From Ram to Babur : Ayodhya - a journey through time इसके पश्चात फिर से राम भक्ति की परंपरा चलती रही, कई साहित्यिक एवं धार्मिक श्रोत अयोध्या महात्म्य में नज़र आते हैं जो १२ या १३ शताब्दी मे लिखा गया। अयोध्या महात्म्य में अनेकों जगह ऐसी कई बातें हैं, जो अयोध्या को महानतम मोक्ष मुक्तिदायक बनाते हैं। तस्मात स्थानवं एशाने रामजन्म प्रवर्तते, जन्मस्थातं इदं प्रोक्त मोक्षादिफलसाधनं विघ्नेश्वरात्पूर्वमागे वसिष्ठात उत्तरेतथा लौमशात पश्च्मे भागे जन्मस्थानं तत अयोध्या मयात्म्य मे जन्मस्थान का विवरण और उसके निश्चित जगह का ब्यौरा है, और इसके साथ ही यह भी लिखा है कि रामनवमी के दिन जन्मस्थान के दर्शन से पुनर्जन्म टलता है। मोक्ष मिलता है, लाखों हिंदु अयोध्या महात्म्य मे लिखी बातों का विश्वास कर अयोध्या जाते रहे। १५२६ मे मध्य एशिया के फरगाना प्रांत से बाबर का प्रवेश हुआ, १६ मार्च १५२७ को बाबर ने राणा सांगा को हरा कर दिल्ली पर कब्जा किया, यह मुगल साम्राज्य की शुरुआत थी, कुछ समय बाद बाबर ने अपने� सिपहसालार मीर बाकी को अयोध्या पर आक्रमण करने का आदेश दिया। " शहंशाह हिंद बादशाह बाब...

संस्कृति -अपराजेय अयोध्या : अयोध्या एक यात्रा PART 1

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Ayodhya - the ‘Unconquerable’ : Ayodhya - a journey through time अयोध्या अपने शाब्दिक अर्थ के अनुसार यह अपराजित है.. यह नगर अपने २२०० वर्षों के इतिहास मे अनेकों युद्धों व संघर्षो का प्रत्यक्ष दर्शी रहा है, अयोध्या को राजा मनु द्वारा निर्मित किया गया और यह श्री राम जी का जन्मस्थल है। इसका उल्लेख प्राचीन संस्कृत ग्रंथों जिसमे रामायण व महाभारत सम्मिलित हैं, में आता है। वाल्मिकि रामायण के एक श्लोक मे इसका वर्णन निम्न प्रकार है। कोसलो नाम मुदितः स्फीतो जनपदो महान्। निविष्ट सरयूतीरे प्रभूत-धन-धान्यवान् ॥१-५-५॥ अयोध्या नाम नगरी तत्रऽऽसीत् लोकविश्रुता। मनुना मानवेन्द्रेण या पुरी निर्मिता स्वयम् ॥१-५-६॥ — श्रीमद्वाल्मीकीरामायणे बालकाण्डे पञ्चमोऽध्यायः श्री ग्रिफैत्स जो 19 शताब्दी के आख़िर मे बनारस कॉलेज के मुख्य अध्यापक रहे... उन्होने रामायण मे अयोध्या के वर्णन को बड़ी सुंदरता से इस प्रकार अनुवादित किया, उनके शब्दों के अनुसार - " उस नगरी के विशाल एवं सुनियोजित रास्ते और उसके दोनो ओर से निकली पानी की नहरें जिस से राजपथ पर लगे पेड़ तरो ताज़ा रहें और अपने फूलो की महक को ...

संस्कृति - BHAGAT SINGH

शहीदे आज़म भगत सिंह सिर्फ आज़ादी हमारा मकसद नहीं है आज़ादी का मतलब क्या है है कि हुकूमत अंग्रेज़ों के हाथ से निकलकर मुटठी भर रईस और ताकतवर हिन्दुस्तानियों के हाथ लग जाये क्या यही आज़ादी है इससे आम आदमी की ज़िन्दगी पर कोई फर्क आयेगा क्या मजदूर और किसान वर्ग के हालात बदलेंगे उन्हें उनका सही हक मिलेगा नहीं आज़ादी सिर्फ पहला कदम है कारमेडस् मकसद है एक वतन बनाना एक एसा वतन जहाँ हर तबके के लोगों को बराबरी से जीने का हक मिले जहां मज़हब के नाम पर समाज में बँटवारा ना हो एक ऐसा वतन जो इन्सान का इन्सान पर जुल्म बर्दाश्त न करे यह मुश्किल है पर असंभव नहीं हिन्दुस्तान जहाँ इतनी सारी जातियाँ भाषाऐं कल्चर हैं उसे एक साथ जोडे रखना आसान नहीं मगर हम इस बात को हम आज नहीं समझेंगे और इस मसले को लेकर आज संघर्ष नहीं करेंगे तो हिन्दुस्तान एक आज़ाद मुल्क तो होगा पर एक भ्रष्ट शोषक और साम्प्रदायिक समाज़ बन कर रह जायेगा कारमेडस् हम सब को मिलकर बनाना है एक समाजवादी वतन और ये हमारी पाट्री के नाम में साफ झलकना चाहिये इसीलिये हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसियेशन को अब हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसियेशन के नाम से ...

PROUD TO BE INDIAN--2 (Radio Invention)

और कुछ बातें भी हैं बताने को समस्त विश्व के सामने राखी गयी जानकारी के अनुसार रेडियो ला आविष्कारक मारकोनी ने 188 में किया है. लेकिन ऐसा लिखने से पूर्व वे एक घटना को भूल जाते हैं. मारकोनी के आविष्कार के कई वर्ष पूर्व 1855 में आचार्य जगदीशचन्द्र बसु बंगाल के अंग्रेज गवर्नर के सामने अपने आविष्कार का प्रदर्शन कर चुके थे।उन्होंने विद्युत तरंगों से दूसरे कमरे मे घंटी बजाई और बोझ उठवाया और विस्फोट करवाया। आचार्य बसु ने अपने उपकरणों से 5 मिलीली.की तरंग पैदा की जो अब तक मानी गई तरंगों में सबसे छोटी थी। इस प्रकार बेतार के तारों के प्रथम आविश्कारक आचार्य बसु ही थे। बसु ने अपने उपरोक्त आविश्कारों का इंग्लैंड में भी प्रदर्शन किया।इन प्रदर्शनों से अनेक तत्कालीन वैज्ञानिक आष्चर्यचकित हो गये। उपरोक्त प्रयोगों को आधार बनाकर जब नये प्रयोग उन्होंने प्रारम्भ किये तो वे इस निश्कषर् पर पहुंचे कि सभी पदार्थों में जीवन प्रवाहित हो रहा है। अपने प्रयोग...ों द्वारा उन्होंने यह सिध्द कर दिया कि पेड़ पौधों में भी जीवन का स्पंदन है।. और वनस्पतियों पर शोध करते समय उन्होंने एक ऐसे यंत्र का निर्माण किया जिस...

PROUD TO BE INDIAN---1 (Misc Subject)

कब तक शर्म करते रहेंगे अपने भारतीय होने पर ? आज जिसे पाइथागोरस सिद्धांत का नाम दिया जाता है या ग्रीक गणितज्यों की देन कहा जाता है वो सारे भारत में बहुत पहले से उपयोग में लाए जा रहे थे... इसमेम कौन सी बडी़ बात है अगर ये कहा जाय कि उनलोगों ने यहाँ से नकल कर अपनी वाहवाही लूट ली... पाई का मान सबसे पहले बुद्धायन ने दिया था पाइथागोरस से कई सौ साल पहले... अपनी कक्षा में पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने की अवधि हमारे गणितज्य भष्कराचार्य ने हजारों साल पहले ही दे दिया था जो अभी से ज्यादा शुद्ध है... 365.258756484 दिन विश्व का पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला में स्थापित हुआ था ७००ईसा पूर्व जिसमें पूरे विश्व के छात्र पढ़ने आया करते थे तभी तो इसका नाम विश्वविद्यालय पडा़... (इसी विश्वविद्यालय को अँग्रेजी में अनुवाद करके यूनिवर्सिटी नामकरण कर लिया अँग्रेजों ने..) इसमें ६० विषयों की पढा़ई होती थी... इसके बाद फ़िर ३००साल बाद यानि ४०० ईसा पूर्व नालंदा में एक विश्वविद्यालय खुला था जो शिक्षा के क्षेत्र में भारतीयों की महान उपलबद्धि थी.. {*{एक मुख्य बात और कि हमारे महान भारतीय परम्परा के अनुसार चिकि...

मेरी शिक्षा मातृभाषा में हुई, इसलिए ऊँचा वैज्ञानिक बन सका - अब्दुल कलाम

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MERI SHIKSHA MATRABHASHA MAIN HUE, ISLIYE UNCHA VAGYANIK BAN SAKA-ABDUL KALAM उच्च तकनीकी क्षेत्र जैसे उपग्रह निर्माण जिसे उच्च तकनीक कहा जाता जो बहुत कठिन एवं क्लिष्ट तकनीक होती है, उसमें आज तक कोई विदेशी कंपनी इस देश में नहीं आई भारत जिसने १९९५ एक आर्यभट्ट नमक उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ा एवं उसके उपरांत हमारे अनेकों उपग्रह अंतरिक्ष में गए है अब तो हम दूसरे देशों के उपग्रह भी अंतरिक्ष में छोड़ने लगे है इतनी तकनीकी का विकास इस देश में हुआ है यह संपूर्ण स्वदेशी पद्दति से हुआ है, स्वदेशी के सिद्धांत पर हुआ है एवं स्वदेशी आंदोलन की भावना के आधार पर हुआ है इसमें जिन वैज्ञानिकों ने कार्य किया है वह स्वदेशी, जिस तकनीकी का उपयोग किया गया है वह स्वदेशी, जो कच्चा माल उपयोग किया गया है वह स्वदेशी, इसमें जो तकनीक एवं कर्मकार लोगों का सहयोग प्राप्त हुआ वह सब स्वदेशी, इनको अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने हेतु जो कार्य हुआ है वह भी हमारी प्रयोगशालाएं स्वदेशी इनके नियंत्रण का कार्य होता है वह प्रयोगशालाएं भी स्वदेशी तो यह उपग्रह निर्माण एवं प्रक्षेपण का क्षेत्र स्वदेशी के सिद्धांत पर आधारित ह...

COKE SECRET IS OUT.....

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इलाज - DRINKING WATER AND EFFECTIVNESS

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भारतीय भाषाओँ के विरुद्ध षड़यंत्र

ऋषि भूमि, राम भूमि, कृष्ण भूमि, तथागत की भूमि... भारत के गौरवशाली अतीत को यदि शब्दों में एवं वाणी में कालांतर तक भी बांधने का प्रयास किया जाए तो संभव नहीं है। वर्तमान में पश्चिम का अंधानुकरण करने से जो भारत का सांस्कृतिक पतन हुआ है वह निश्चय मानिए आपके प्रयासों से समाप्त होगा। इस पश्चिम के अंधानुकरण एवं मानसिक परतंत्रता के रोग के उपचार हेतु इसका कारण प्रभाव आदि जानना भी नितांत आवश्यक है। भारत पर प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से २०० से २५० वर्षों तक अंग्रेजो का शासन रहा, अल्पावधि तक फ्रांसीसियों एवं डच आक्रान्ताओं का प्रभाव भी रहा। भारत के कुछ भूभागो केरल, गोवा (मालाबार का इलाका आदि ) पर तो, पुर्तगालियों का ४००–४५० वर्षों तक शासन रहा। भारत पर ७–८ शताब्दी से आक्रमण प्रारंभ हो गए थे। मोहाम्मदबिन कासिम, महमूद गजनवी ,तैमूर लंग, अहमद शाह अफदाली, बाबर एवं उसके कई वंशज इन आक्रांताओंके का भी शासनकाल अथवा प्रभावयुक्त कालखंड कोई बहुत अच्छा समय नहीं रहा भारत के लिए, सांस्कृतिक एवं सभ्यता की दृष्टि से। भिन्न भिन्न आक्रांताओ के शासनकाल में भारत में सांस्कृतिक एवं सभ्यता की दृष्टि से कुछ परि...

विद्यालयों से लेकर न्यायालयों तक अंग्रेजी भाषा की गुलामी

मान लीजिए मैं असम का व्यक्ति हूँ मुझे कुछ न्याय संबंधित परेशानी है तो पहले असमियां में वकील को समझाओ, वकील भाषांतर करे अंग्रेजी में उपरांत वह जज को समझाए। जज विचार कर अंग्रेजी में वकील को समाधान सुनाये, वकील अंग्रेजी का भाषांतर करे असमियां में, उपरांत मुझे समझावे... अरे भाई क्या सत्यानाश कर रखा है। इन सब में कितना समय एवं शक्ति की नष्ट हो रही है अगर यह भाषा की परतंत्रता नहीं होती तो मैं सीधे अपनी दुविधा, परेशानी न्यायाधीश को असमिया में बता देता और वह उसका समाधान कर मुझे बता देता किसी तीसरे व्यक्ति (न्यायज्ञ) की आवश्यकता ही नहीं पड़ती भाषांतर के लिए। बच्चों का निजी एवं कान्वेंट विद्यालयों में पिता माता के अंग्रेजी नहीं आने के कारण प्रवेश नहीं मिल पाना, किससे छिपा है ? आपका बालक कितना ही मेधावी क्योँ न हो अगर माता पिता को अंग्रेजी न आती हो तो, उन्हें निर्लज्जता के साथ कह दिया जाता है आप किसी और भाषा का विद्यालय खोज ले एवं बालक/बलिका को प्रवेश नहीं दिया जाता। ऐसे कान्वेंट विद्यालयों का तर्क होता है की अगर आपको अंग्रेजी नहीं आती तो जो गृहकार्य हम बच्चे को देंगे उसमें आप कैसे सहायता क...

अंग्रेजी कोई बड़ी भाषा नहीं है, केवल १४ देशों में चलती है जो गुलाम रहे हैं

अंग्रेजी कोई इतनी बड़ी भाषा नहीं है, जैसी की हमारे मन में उसकी छद्म छवि है, विश्व के मात्र १४ देशों में अंग्रेजी चलती है एवं यह वही देश है जो अंग्रेजो के परतंत्र रहे है। इनके इन देशों में अंग्रेजी का स्वयं विकास नहीं हुआ है परतंत्रता के कारण इन्हें इसके लिए बाध्य होना पड़ा। विश्व की प्रमुख संस्थाए अंग्रेजी में कार्य नहीं करती, बहुत से देशों के लोग तो अंग्रेजी जानते हुए भी उसमें बात करना पसंद नहीं करते। जर्मनी में जर्मन में, फ़्रांस में फ्रेंच में, स्पेन में स्पेनिश में, जापान में जापानी में, चीन में चीनी में आदि देशों में अपनी भाषा में ही सरकारी कार्य भी किया जाता है। अंग्रेजी से निजात ही अच्छी है क्यूंकि इसमें हमारा विकास नहीं, मुक्ति नहीं। संयुक्त राष्ट्र महासंघ के मानवीय विकास के लेखे जोखे में भारत लगभग १३४ में आता है बहुत से भारत से भी छोटे छोटे देश जो इस लेखे-जोखे में भारत से ऊपर आते है क्यूंकि उनमें अधिकांश अपनी मातृभाषा में कार्य करते है। स्वयं संयुक्तराष्ट्र भी फ्रेंच भाषा में कार्य करता है अंग्रेजी में तो वह अपने कार्यों का भाषांतर करता है अधिकांश भाषा विशेषज्ञ भी कहते ...