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Showing posts from March, 2012

संस्कृति - यूँ बदलता नजरिया

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संस्कृति - 10Gms of Gold price history

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संस्कृति - वैज्ञानिक और स्वच्छता का प्रतीक है: शीतला माता पूजा (नवरात्र)

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बसंत अब लगभग बिदाई की ओर है होली के बाद अब गर्मी की मौसम की भी शुरुआत होने लगी है इसके साथ ही अब रोज की दिनचर्या में भी परिवर्तन आना शुरू हो जाता है इसी प्रकार की बातों को ध्यान में रखते हुए ही हमारे बुजुर्गो ने त्योहारों को जन्म दिया इन्ही में से एक त्योहार है “शीतला पूजा” “शीतला पूजा” होली के एक सप्ताह बाद या कहीं कहीं होली के बाद के पहले सोमवार को या गुरूवार को मनाया जाता है इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ऋतु परिवर्तन पर होने वाले रोगों से बचना है, जैसे बुखार, पीलिया, चेचक, आँखों के रोग भगवती शीलता की पूजा का विधान भी अनूठा है देवी को ठंडा ओर बासी भोजन अर्पित किया जाता है, इसी लिए एक दिन पहले बने भोजन का ही भोग लगाया जाता है इसी लिए इस उत्सव को बसोड़ा भी कहते है ऐसी मान्यता है की इस दिन से बासी खाने को खाना बंद कर दिया जाता है, जिस का वैज्ञानिक कारण मौसम में परिवर्तन है इस समय मौसम थोड़ा गरम भी होना शुरू हो गया होता है इसीलिए बासी खाने से बीमारियों के होने का डर बना रहता है बासी खाना सिर्फ शरीर को ही नहीं मस्तिष्क को भी नुकसान पहुचाता है धार्मिक रूप से देखने पर स...

संस्कृति -नींव के संस्कार पर इमारतें खड़ी होती हैं, मकान के संस्कार पर घर

पिताजी ने दिल्ली में जमीन खरीदी थी। उस पर मकान बनाना था। दादी ने पूछा- "नींव की पूजा कैसे होगी?" पिताजी बोले-"हवन करवा देंगे। और क्या?" "नहीं रे! मकान की नींव डालने की विशेष पूजा होती है। तभी तो मकान का संस्कार बनता है। संस्कार में भेद के कारण ही एक मकान हंसता तो दूसरा रोता दिखता है।" पिताजी को भी हंसी आ गई। बोले-"मां अब आप मकान का भी हंसना-विसूरना देखने-सुनने लगीं।" दादी ने पिताजी को नींव की पूजा के बारे में विस्तार से बताने की कोशिश की। उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि वे पिताजी को नींव का मर्म नहीं समझा पाई। वे गांव चली गईं। पंडित लालदेव मिश्र को साथ ले आईं। पंडित जी ने पिताजी को समझाना प्रारंभ कर दिया। वे बोले- "घर, घर है। वह झोपड़ी में हो या फ्लैट में। आलीशान हवेली में हो या बहुमंजिली इमारतों में। कहा और समझा जाता है कि ईंट-कंक्रीट और लोहे की सरिया से बनी दीवारों और छत से घर नहीं बनता। घर तो बनता है घर में रहने वालों के संस्कारों से। "गृहिणी गृहम् उच्यते" भी कहा जाता है। चूंकि हर घर में एक गृहिणी भी होती है, उसके अपने संस्कारों ...

संस्कृति - नवदुर्गा के रूपों से औषधि उपचार

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नवदुर्गा के रूपों से औषधि उपचार नवरात्रि में माँ दुर्गा के औषधि रूपों का पूजन करें पं. सुरेन्द्र बिल्लौरे माँ जगदम्बा दुर्गा के नौ रूप मनुष्य को शांति, सुख, वैभव, निरोगी काया एवं भौतिक आर्थिक इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं। माँ अपने बच्चों को हर प्रकार का सुख प्रदान कर अपने आशीष की छाया में बैठाकर संसार के प्रत्येक दुख से दूर करके सुखी रखती है। जानिए नवदुर्गा के नौ रूप औषधियों के रूप में कैसे कार्य करते हैं एवं अपने भक्तों को कैसे सुख पहुँचाते हैं। सर्वप्रथम इस पद्धति को मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया परंतु गुप्त ही रहा। भक्तों की जिज्ञासा की संतुष्टि करते हुए नौ दुर्गा के औषधि रूप दे रहे हैं। इस चिकित्सा प्रणाली के रहस्य को ब्रह्माजी ने अपने उपदेश में दुर्गाकवच कहा है। नौ प्रमुख दुर्गा का विवेचन किया है। ये नवदुर्गा वास्तव में दिव्य गुणों वाली नौ औषधियाँ हैं। प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी, तृतीयं चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेती चतुर्थकम।। पंचम स्कन्दमा‍तेति षुठ कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौ‍र‍ीति चाष्टम।। नवमं सिद्धिदात्री च...

संस्कृति -पुराण क्या है ?(What is Puran)

पुराण क्या है ? सृष्टि के रचनाकर्ता ब्रह्मा ने सर्वप्रथम स्वयं जिस प्राचीनतम धर्...मग्रंथ की रचना की, उसे पुराण के नाम से जाना जाता है। इस धर्मग्रंथ में लगभग एक अरब श्लोक हैं। यह बृहत् धर्मग्रंथ पुराण, देवलोक में आज भी मौजूद है। मानवता के हितार्थ महान संत कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने एक अरब श्लोकों वाले इस बृहत् पुराण को केवल चार लाख श्लोकों में सम्पादित किया। इसके बाद उन्होंने एक बार फिर इस पुराण को अठारह खण्डों में विभक्त किया, जिन्हें अठारह पुराणों के रूप में जाना जाता है। ये पुराण इस प्रकार हैं : 1. ब्रह्म पुराण 2. पद्म पुराण 3. विष्णु पुराण 4. शिव पुराण 5. भागवत पुराण 6. भविष्य पुराण 7. नारद पुराण 8. मार्कण्डेय पुराण 9. अग्नि पुराण 10. ब्रह्मवैवर्त पुराण 11. लिंग पुराण 12. वराह पुराण 13. स्कंद पुराण 14. वामन पुराण 15. कूर्म पुराण 16. मत्स्य पुराण 17. गरुड़ पुराण 18. ब्रह्माण्ड पुराण पुराण शब्द का शाब्दिक अर्थ है पुराना, लेकिन प्राचीनतम होने के बाद भी पुराण और उनकी शिक्षाएँ पुरानी नहीं हुई हैं, बल्कि आज के सन्दर्भ में उनका महत्त्व और बढ़ गया ...

संस्कृति - सनातन इतिहास से TEST-TUBE BABIES की कुछ उदाहरणे...

आज का तथा-कथित आधुनिक विज्ञ...ान (Modern Science) कितना आधुनिक है, इस बात का प्रमाण निम्न-लिखित कुछ उदाहरणों से स्पष्ट रूप से मिल जाता है... जोकि सनातन शास्त्रों से हैं... वास्तव में यह विज्ञान भारत में युगों प्राचीन हमारे महान ऋषि-मुनिओ को भली-भाँती विदित था... परन्तु पश्चिम के अंधा-धुंध अनुसरण और अपने शास्त्रों से विमुख हो जाने के कारण, हम अपनी गौरव-मयी संस्कृति का मूल्य नहीं जानते... सनातन शास्त्रों से इस बात के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं की पुरातन काल में यह विद्या कितनी सामान्य थी... १) सगर के ६०,००० पुत्र... जिनका कालान्तर में ऋषि भगीरथ द्वारा उद्धार किया गया था २) द्रोणाचार्य - द्रोणाचार्य ऋषि भरद्वाज तथा घृतार्ची नामक अप्सरा के पुत्र तथा धर्नुविद्या में निपुण परशुराम के शिष्य थे एक समय गंगाद्वार नामक स्थान पर महर्षि भरद्वाज रहा करते थे। वे बड़े व्रतशील व यशस्वी थे। एक बार वे यज्ञ कर रहे थे। एक दिन वे महर्षियों को साथ लेकर गंगा स्नान करने गए। वहां उन्होंने देखा कि घृताची नामक अप्सरा स्नान करके जल से निकल रही है। उसे देखकर उनके मन में काम वासना जाग उठी और उनका वीर्य स्खलित ह...

इलाज -आयुर्वेद -Clean your Kidneys

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Years pass by and our kidneys are filtering the blood by removing salt, poison and any unwanted entering our body. With time, the salt accumulates and this needs to undergo cleaning treatments and how are we going to overcome this? It is very easy, first take a bunch of parsley. (In Tamil it is – KOTHA MALLI Leaves) DHANIYA and wash it clean. Then cut it in small pieces and put it in a pot and pour clean water and boil it for ten minutes and let it cool down and then filter it and pour in a clean bottle and keep it inside refrigerator to cool. Drink one glass daily and you will notice all salt and other accumulated poison coming out of your kidney by urination also you will be able to notice the difference which you never felt before. Parsley is known as best cleaning treatment for kidneys and it is natural! Hope you will definitely inform this to all your loved ओंस

इलाज - आयुर्वेदिक दोहे (ayurved dohe)

  आयुर्वेदिक दोहे 1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय। दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।। 2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल। मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।। 3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम। खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।। 4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम। सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।। 5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय। बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ जाय।। 6.गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार। सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।। 7.खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय। दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।। 8.रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल। खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।। 9.भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय। चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।। 10.मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम। तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।। 11.दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय। पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।। 12.आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय। पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।। 13.सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम। दो चम्मच की मा...