संस्कृत पांडुलिपियों का संरक्षण जरूरी रायपुर के संस्कृत महाविद्यालय में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के सौजन्य से पांडुलिपियों को सहेजने की विधियों को लेकर कार्यशाला चल रही है। नष्ट होती संस्कृत की महान विरासत को बचाए रखने के लिए ऐसे प्रयास काफी अहम हैं। संस्कृत महाविद्यालय में बड़ी संख्या में पुरानी पांडुलिपियाँ हैं जो संरक्षण के अभाव में खराब हो रही हैं, कार्यशाला से इन्हें सहेजने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में परंपरागत तरीकों से पांडुलिपियों को सहेजने की विधियाँ बताई गई हैं। यह काफी उपयोगी हो सकती हैं, क्योंकि इन्हीं विधियों के प्रयोग से ऋग्वेद की कुछ ऐसी पांडुलिपियाँ भी संरक्षित रहीं जो हजार साल पहले लिखी गई थी। फिर भी यह कहना होगा कि इस संबंध में आधारित ढाँचा बनाए बगैर इस प्रकार की कवायद व्यर्थ ही होगी। पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए एक तंत्र तैयार कर सरकार को संरक्षण की आधुनिक विधियों को अपनाना होगा, जैसा कि भंडारकर शोध संस्थान, पुणे जैसी संस्थाओं में अपनाया जा रहा है। इन्हें न केवल संरक्षित करने की जरूरत है, अपितु इनके विषय-वस्तु का अत्याधुनिक विधियों द...