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Showing posts from August, 2014

क्या स्त्री पुरूष बराबर है ? -- लेख नरेन्द्र सिसोदिया

क्या स्त्री पुरूष बराबर है ? -- लेख नरेन्द्र सिसोदिया ==================================== अक्सर ऐसा देखा गया है की आजकल के आधुनिक या यूँ कहे पश्चिम का अंधानुुक रण करने वाले लोग इस बात पर बडा जोर देते है की स्त्री को पुरूष की बराबरी पर आना चाहिये । दुःख की बात तो ये है की ऐसी बातों में महीलायँ आगे रहती है । क्योंकी मेरे हिसाब ऐसा बोलकर स्त्री समाज अपना खुद का अपमान करती है । सबसे पहली बात तो ये की खुद भगवान ने दोनो को अलग बनाया तो दोनो एक कैसे हो सकते है । स्त्री का मानसिक विकास, शारीरिक विकास , गुणों का विकास और सामाजिक ताने बाने में उनकी उपस्थिति पुरूषों से अलग है, इतने सारे स्तरों पर भिन्नता होने के कारण वो पुरूष के बराबर तो क्या आसपास भी नही है। इसी बात को मुंशी प्रेमचंद ने इस प्रकार कहा है की - मानवीय गुणों के क्रमिक विकास में स्त्री पुरूषों से कही आगे है । हमारे समाज में स्त्री का अपनी महत्ता है और पुरूषों की अपनी, इस मामले में किसी को आगे बोलना और किसी को पीछे कहना वैसी ही मूर्खता है जैसी कोई ये बोले की १ लीटर दूध में और सूरज के प्रकाश में कौन आगे और कौन पीछे । पुरूष को ...

वैदिक 'पंचांग' ही सही है

वैदिक 'पंचांग' ही सही है हिंदू पंचांग की उत्पत्ति वैदिक काल में ही हो चुकी थी। सूर्य को जगत की आत्मा मानकर उक्त काल में सूर्य व नक्षत्र सिद्धांत पर आधारित पंचांग होता था। वैदिक काल के पश्चात् आर्यभट, वराहमिहिर, भास्कर आदि जैसे खगोलशास्त्रियों ने पंचांग को विकसित कर उसमें चंद्र की कलाओं का भी वर्णन किया। वेदों और अन्य ग्रंथों में सूर्य, चंद्र, पृथ्वी और नक्षत्र सभी की स्थिति, दूरी और गति का वर्णन किया गया है। स्थिति, दूरी और गति के मान से ही पृथ्वी पर होने वाले दिन-रात और अन्य संधिकाल को विभाजित कर एक पूर्ण सटीक पंचांग बनाया गया है। जानते हैं हिंदू पंचांग की अवधारणा क्या है। पंचांग काल दिन को नामंकित करने की एक प्रणाली है। पंचांग के चक्र को खगोलकीय तत्वों से जोड़ा जाता है। बारह मास का एक वर्ष और 7 दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से शुरू हुआ। महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है। पंचांग की परिभाषा: पंचांग नाम पाँच प्रमुख भागों से बने होने के कारण है, यह है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इसकी गणना के आधार पर हिंदू पंचांग की तीन धाराएँ हैं- प...

केलिन्डर कियूं गलत हैं ?

200 सालों तक तो इसी बात पर यूरोप में युद्ध चलता रहा कि नया वर्ष 25 दिसंबर को मानें या 1 जनवरी को, अर्थात काल के नियमों से ऊपर थी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा| इस पद्धति में समय का केन्द्र बिंदु है इंग्लैंड में स्थित ग्रीनविच, जो उत्तरी गोलार्ध में है जबकि ऐसे किसी भी स्थान को समय का केन्द्र बिंदु नहीं माना जा सकता जो भूमध्य रेखा पर न हो| उसका कारण यह है कि भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं इसीलिए इसी स्थान से सौर मंडल के सापेक्ष समय का सही सही पता लगाय ा जा सकता है| अनुसन्धान हेतु इस रेखा पर पड़ने वाले हर स्थान का Latitude 0 डिग्री होता है जो कि ग्रीनविच के सन्दर्भ में नहीं है| क्योंकि वह इंग्लैंड में है इसीलिए वही केन्द्र बिंदु होना चाहिए हालांकि इसके केन्द्र बिंदु होने से कोई अनुसंधानात्मक लाभ विश्व को आज तक नहीं हुआ| भारतीय काल गणना इतनी वैज्ञानिक व्यवस्था है कि सदियों-सदियों तक एक पल का भी अन्तर नहीं पड़ा जबकि पश्चिमी काल गणना में वर्ष के 365.2422 दिन को 30 और 31 के हिसाब से 12 महीनों में विभक्त करते है। इस प्रकार प्रतयेक चार वर्ष में फरवरी महीनें को लीपइयर घोषित कर देते है फ...

और इस तरह लिया महाराजा जय सिंह ने अंग्रेजो से अपने अपमान का बदला

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और इस तरह लिया महाराजा जय सिंह ने अंग्रेजो से अपने अपमान का बदला  इंगलैण्ड की राजधानी लंदन में यात्रा के दौरान एक शाम महाराजा जयसिंह सादे कपड़ों में बॉन्ड स्ट्रीट में घूमने के लिए निकले और वहां उन्होने रोल्स रॉयस कम्पनी का भव्य शो रूम देखा और मोटर कार का भाव जानने के लिए अंदर चले गए। शॉ रूम के अंग्रेज मैनेजर ने उन्हें “कंगाल भारत” का सामान्य नागरिक समझ कर वापस भेज दिया। शोरूम के सेल्समैन ने भी उ न्हें बहुत अपमानित किया, बस उन्हें “गेट आऊट” कहने के अलावा अपमान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।अपमानित महाराजा जयसिंह वापस होटल पर आए और रोल्स रॉयस के उसी शोरूम पर फोन लगवाया और संदेशा कहलवाया कि अलवर के महाराजा कुछ मोटर कार खरीदने चाहते हैं। कुछ देर बाद जब महाराजा रजवाड़ी पोशाक में और अपने पूरे दबदबे के साथ शोरूम पर पहुंचे तब तक शोरूम में उनके स्वागत में “रेड कार्पेट” बिछ चुका था। वही अंग्रेज मैनेजर और सेल्समेन्स उनके सामने नतमस्तक खड़े थे। महाराजा ने उस समय शोरूम में पड़ी सभी छ: कारों को खरीदकर, कारों की कीमत के साथ उन्हें भारत पहुँचाने के खर्च का भुगतान कर दिया। भारत प...