लघुकथा - रुखसत part 2
पिछले साल मैं अमरनाथ यात्रा पे गया था l वापसी में स्टेशन में मैंने एक किताब खरीदी "प्रेम चन्द्र की कहानिया " उसमें एक कहानी थी शीर्षक मुझे याद नहीं आ रहा हैं पर कहानी कुछ इस प्रकार से थी " एक गरीब परिवार जो दाने दाने का मोहताज था l घर मैं केवल ३ लोग ससुर पति और बहु थे , एक दिन रात में बहु प्रसव पीड़ा से कराह रही थी, l रात का घुप अँधेरा था और उसके चिल्लाने की आवाज़ रात की खामोशी को तोड़ रही थी l पति और ससुर असहाए होकर घर के बहार बैठे थे कुछ देर बाद बहु की आवाज़ आनी बंद हो जाती हैं ससुर कहता हैं पति से "जा देख आ अन्दर किया हुआ " पति जाने से मना कर देता हैं जब वोह चिल्लाता हैं तो पति देखने चला जाता हैं वहां पे वोह मिटटी से लपटी हुए मृत्यु के आगोश मैं जा चुकी थी उसको देखने से ऐसा प्रतीत होता था जैसे धरती माँ ने उससे कहा की "तेरा कोई नहीं तू मेरे पास आ जा " अगले दिन ससुर और पति उसकी चिता जलाने के लिए ठाकुर के पा...