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Showing posts from September, 2011

लघुकथा - रुखसत part 2

पिछले साल मैं अमरनाथ यात्रा पे गया था l वापसी में स्टेशन में मैंने एक किताब खरीदी "प्रेम चन्द्र की कहानिया " उसमें एक कहानी थी शीर्षक मुझे याद नहीं आ रहा हैं पर कहानी कुछ इस प्रकार से थी " एक गरीब परिवार जो दाने दाने का मोहताज था l   घर मैं केवल ३ लोग ससुर पति और बहु थे  , एक दिन रात में  बहु प्रसव पीड़ा से कराह रही थी, l  रात का घुप अँधेरा था और उसके चिल्लाने की आवाज़ रात की खामोशी को तोड़ रही थी l पति और ससुर असहाए होकर  घर के बहार बैठे थे   कुछ देर बाद बहु की आवाज़ आनी  बंद  हो जाती हैं ससुर कहता हैं पति से "जा देख आ अन्दर किया हुआ " पति जाने से मना कर देता हैं जब वोह चिल्लाता हैं तो पति देखने चला जाता हैं वहां पे वोह मिटटी से लपटी हुए मृत्यु के आगोश मैं जा चुकी थी उसको  देखने से ऐसा प्रतीत होता था जैसे धरती माँ ने उससे कहा की "तेरा कोई नहीं तू मेरे पास आ जा " अगले दिन ससुर और पति उसकी चिता जलाने के लिए ठाकुर के पा...

लघुकथा - मेरा चिडचिडापन part 1

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आर्थिक मंदी अपने पुरे जोश के साथ मेरे जीवन मैं सफ़र कर रही हैं विचारों के उथल पुथल में मेरा एक एक दिन निकलता जा रहा  हैं लेकिन किसी निष्कर्ष पे कभी नहीं पहुँच पाता हूँ अपने जीवन को समझने  के लिए धर्म शाश्त्रियों के लेख भी पढने लगा हूँ ब्रह्मकुमारी की बहिन शिवानी का भक्त भी बन गया हूँ जब तक उनके प्रवचन  सुनते रहो तब तक तो सब ठीक हैं, उस समय हम  अपने आपको अन्धकार से प्रकाश की तरफ जाते हुए महसूस भी करते हैं  लेकिन, जैसे ही घरवाली, घर के  राशन का परचा हाँथ में थमा देती   हैं सारी शिक्षा धरी की धरी रह जाती हैं और फिर से हम अपने  जीवन के एक अन्धकार भरे रास्ते में सफ़र करने निकल पड़ते हैं . आज कल अपनी प्रिये BLENDERS PRIDE WHISKY और GOLD FLAKE CIGRETTE   को भी स्वस्थ्य का हवाला देते हुए छोड़ दिया हैं और आदर्श पुरषों की तरह लोगों को खर्चे और स्वास्थय का पाठ...
अंतर्कथा -  धर्म और समय का गठबंधन बड़े दिनों से मेरे दिमाग मैं एक बात चल रही थी की अचानक हमारे शेहर में  गणेश चतुर्थी की इतनी धूम क्यूँ हो गयी?पिछले ३ वर्षों में यह परंपरा हमारे शेहर में तेजी से बड़ी और अबकी बार तो वाह वाह किया कहने!! आज कल मंदी का दौर चल रहा हैं हर व्यवसाय ठंडा पड़ा हुआ हैं लोगों को अपने जीवन यापन के लिए मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई आ रही हैं, इन सब में एक वर्ग समाज का ऐसा भी हैं जो सिर्फ और सिर्फ दाल रोटी के बारे में ही सोच पाता  हैं अगर उनके  ऊपर भी यह मंदी का प्रभाव पड़ा तब  तो उनका  जीवन यापन मुश्किल हो जायेगा  !! जब जब समाज में इस तरह की  विकट  स्तिथियाँ  आती हैं धर्म और समय का गठबंधन  उनकी रक्षा करने को आगे आ जाता हैं और  वे  समाज के   जीवन शैली   के ढांचे में...