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संस्कृति -1941 में डूबे ब्रिटिश जहाज से चांदी का खजाना मिला, कोलकाता से ब्रिटेन जा रहा था

1941 में डूबे ब्रिटिश जहाज से चांदी का खजाना मिला, कोलकाता से ब्रिटेन जा रहा था लंदन, एजेंसी : अमेरिका की एक अन्वेषण कंपनी ने डूबे हुए एक ब्रिटिश जहाज से भारी मात्रा में चांदी का खजाना बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 15 करोड़ पाउंड (करीब 1155 करोड़ रुपये) हो सकती है। यह जहाज कोलकाता से लंदन की यात्रा पर रवाना हुआ था लेकिन अटलांटिक में 1941 में एक जर्मन यू बोट ने इसे डुबो दिया था। परिवहन विभाग के अनुसार अन्वेषण कंपनी ओडिसी मैरिन इस माल का 80 फीसदी हिस्सा रखेगी। परिवहन विभाग ने कंपनी को डूबे विशालकाय जहाज के मलबे की खोज की जिम्मेदारी सौंपी थी। एसएस गैरसोप्पा नामक यह जहाज दिसंबर 1940 में कोलकाता से रवाना हुआ था और इस पर 240 टन चांदी, लोहा और चाय लदी थी। यह पोत ब्रिटिश स्टीम नेवीगेशन कंपनी से ताल्लुक रखता था। यह जहाज लिवरपूल जाने वाला था लेकिन मजबूरन इसे अपने सैन्य काफिले से अलग होकर अपना रास्ता बदलना पड़ा था। चूंकि आयरलैंड के पास मौसम बहुत खराब हो गया था और इस जहाज में ईंधन भी बहुत कम बचा था। जब यह जहाज एक छोटा रास्ता अपनाकर आयरिश हार्बर के दक्षिण-पश्चिम में प...

-संस्कृति अकबर से भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन तक : अयोध्या एक यात्रा PART 3

From Akbar to Indian Independence : Ayodhya - a journey through time हुमायूँ के बाद अकबर का शासन काल आया, उसने अपने राज्य को १२ भागो मे विभक्त किया, अनुमानित है कि अकबर के शासन काल मे हिंदुओं ने लगभग २० बार जन्मभूमि को स्वतंत्र कराने की लडाईयां लडी, अकबर ने हिंदुओं के अधिकार को मान्यता देते हुए मस्जिद के बिल्कुल आगे एक चबूतरा बनाने और पूजा करने का अधिकार दिया, यही चबूतरा आज राम चबूतरा के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही अकबर ने राम और सीता मुद्रित चांदी के सिक्के (रामटका) भी बनवाये. और रामायण की सचित्र किताबे भी बनवाई. अकबरनामा व आइना ए अकबरी के लेखक अबुल फजल अयोध्या को राम का निवास व हिंदुओ की पुण्यभूमि मानते हैं। जहांगीर के शासन काल मे १६०८ व १६११ के बीच विलियम फिंच ने अयोध्या की यात्रा की, उन्होंने भी अयोध्या में राम के होने की पुष्टि अपने लेख में की जिसे विलियम फोस्टर ने अपनी पुस्तक " अर्ली� ट्रेवल्स इन इंडिया " मे शामिल किया। १८५८ के बाद औरंगजेब के सरदार जांबाज खान ने अयोध्या पर हमला किया किंतु परास्त हुआ, गुरु गोविंद सिंह जी के अकालियों ने उसे रुदाली और सादात...

संस्कृति - राम से बाबर तक : अयोध्या एक यात्रा PART 2

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 From Ram to Babur : Ayodhya - a journey through time इसके पश्चात फिर से राम भक्ति की परंपरा चलती रही, कई साहित्यिक एवं धार्मिक श्रोत अयोध्या महात्म्य में नज़र आते हैं जो १२ या १३ शताब्दी मे लिखा गया। अयोध्या महात्म्य में अनेकों जगह ऐसी कई बातें हैं, जो अयोध्या को महानतम मोक्ष मुक्तिदायक बनाते हैं। तस्मात स्थानवं एशाने रामजन्म प्रवर्तते, जन्मस्थातं इदं प्रोक्त मोक्षादिफलसाधनं विघ्नेश्वरात्पूर्वमागे वसिष्ठात उत्तरेतथा लौमशात पश्च्मे भागे जन्मस्थानं तत अयोध्या मयात्म्य मे जन्मस्थान का विवरण और उसके निश्चित जगह का ब्यौरा है, और इसके साथ ही यह भी लिखा है कि रामनवमी के दिन जन्मस्थान के दर्शन से पुनर्जन्म टलता है। मोक्ष मिलता है, लाखों हिंदु अयोध्या महात्म्य मे लिखी बातों का विश्वास कर अयोध्या जाते रहे। १५२६ मे मध्य एशिया के फरगाना प्रांत से बाबर का प्रवेश हुआ, १६ मार्च १५२७ को बाबर ने राणा सांगा को हरा कर दिल्ली पर कब्जा किया, यह मुगल साम्राज्य की शुरुआत थी, कुछ समय बाद बाबर ने अपने� सिपहसालार मीर बाकी को अयोध्या पर आक्रमण करने का आदेश दिया। " शहंशाह हिंद बादशाह बाब...

संस्कृति -अपराजेय अयोध्या : अयोध्या एक यात्रा PART 1

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Ayodhya - the ‘Unconquerable’ : Ayodhya - a journey through time अयोध्या अपने शाब्दिक अर्थ के अनुसार यह अपराजित है.. यह नगर अपने २२०० वर्षों के इतिहास मे अनेकों युद्धों व संघर्षो का प्रत्यक्ष दर्शी रहा है, अयोध्या को राजा मनु द्वारा निर्मित किया गया और यह श्री राम जी का जन्मस्थल है। इसका उल्लेख प्राचीन संस्कृत ग्रंथों जिसमे रामायण व महाभारत सम्मिलित हैं, में आता है। वाल्मिकि रामायण के एक श्लोक मे इसका वर्णन निम्न प्रकार है। कोसलो नाम मुदितः स्फीतो जनपदो महान्। निविष्ट सरयूतीरे प्रभूत-धन-धान्यवान् ॥१-५-५॥ अयोध्या नाम नगरी तत्रऽऽसीत् लोकविश्रुता। मनुना मानवेन्द्रेण या पुरी निर्मिता स्वयम् ॥१-५-६॥ — श्रीमद्वाल्मीकीरामायणे बालकाण्डे पञ्चमोऽध्यायः श्री ग्रिफैत्स जो 19 शताब्दी के आख़िर मे बनारस कॉलेज के मुख्य अध्यापक रहे... उन्होने रामायण मे अयोध्या के वर्णन को बड़ी सुंदरता से इस प्रकार अनुवादित किया, उनके शब्दों के अनुसार - " उस नगरी के विशाल एवं सुनियोजित रास्ते और उसके दोनो ओर से निकली पानी की नहरें जिस से राजपथ पर लगे पेड़ तरो ताज़ा रहें और अपने फूलो की महक को ...

संस्कृति - Rare Photographs

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A VERY RARE PHOTO OF ELECTRIC TRAM IN KANPUR: Trams were introduced in Kanpur (Cawnpore) in June 1907. The tram system opened in June 1907 and closed on May 16, 1933. There were 4 miles of track and 20 single-deck open trams. The single line connected the railway station with Sarsaya Ghat on the banks of the Ganges. Photographs of Cawnpore trams are very rare.The introductory stock was electric traction-type single-coach; single-coach trams were also used in Delhi, Mumbai and Chennai. There was one line – a four-mile stretch between the train station and Sirsaya Ghat, on the Ganges – and 20 open cars. Service was discontinued on 16 May 1933 पुरे भारत में सबसे पहले रेल लाइन वडोदरा के राजा गायकवाड ने बिछाई थी .. लेकिन तब रेल इंजन का अविष्कार नही हुआ था इसलिए कोच को बैल खीचते थे YAGNOPVEET OF PANDIT NEHRU RARE vintage photographs of a little girl in costume UDAY SHANKAR AND ZOHRA SEHGAL              ...