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Showing posts from October, 2011

डायबिटीज के नियंत्रण की चाबी- अलसी

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पिछले कुछ दशकों में भारत समेत पूरे विश्व में डायबिटीज टाइप-2 के रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है व अब तो यह किशोरों और बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। डायबिटीज एक महामारी का रुप ले चुकी है। आइये हम जानने की कोशिश करते हैं कि पिछले कुछ दशकों में हमारे खान-पान, जीवनचर्या या वातावरण में ऐसा क्या बदलाव आया है। शोधकर्ताओं के अनुसार जब से परिष्कृत यानी “रिफाइन्ड तेल” (जो बनते समय उच्च तापमान, हेग्जेन, कास्टिक सोडा, फोस्फोरिक एसिड, ब्लीचिंग क्ले आदि घातक रसायनों के संपर्क से गुजरता है), ट्रांसफेट युक्त पूर्ण या आंशिक हाइड्रोजिनेटेड वसा यानी वनस्पति घी (जिसका प्रयोग सभी पैकेट बंद खाद्य पदार्थों व बेकरी उत्पादनों में धड़ल्ले से किया जाता है), रासायनिक खाद, कीटनाशक, प्रिजर्वेटिव, रंग, रसायन आदि का प्रयोग बढ़ा है तभी से डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़ी है। हलवाई और भोजनालय भी वनस्पति घी या रिफाइन्ड तेल का प्रयोग भरपूर प्रयोग करते हैं और व्यंजनों को तलने के लिए तेल को बार-बार गर्म करते हैं जिससे वह जहर से भी बदतर हो जाता है। शोधकर्ता इन्ही को डायबिटीज का प्रमुख कारण मानते हैं। ...

आयुर्वेद-कैंसर रोधी आहार–विहार CANCER TREATMENT

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क्रूर, कुटिल, कपटी, कठिन, कष्टप्रद कर्करोग का सस्ता, सरल, सुलभ, संपूर्ण और सुरक्षित समाधान है। प्रस्तावना डॉ योहाना बुडविज (जन्म 30 सितम्बर, 1908 – मृत्यु 19 मई 2003) विश्व विख्यात जर्मन जीवरसायन विशेषज्ञ व चिकित्सक थीं। उन्होंने भौतिक विज्ञान, जीवरसायन विज्ञान, भेषज विज्ञान में मास्टर की डिग्री हासिल की थी व प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान में पी.एच.डी. की थी। वे जर्मन सरकार के खाद्य और भेषज विभाग में सर्वोच्च पद पर कार्यरत थीं। वे जर्मनी व यूरोप की विख्यात वसा और तेल विशेषज्ञ थी। उन्होंने वसा, तेल तथा कैंसर के उपचार के लिए बहुत शोध की थी। उनका नाम नोबल पुरस्कार के लिए 7 बार चयनित हुआ था। वे आजीवन शाकाहारी रहीं। जीवन के अंतिम दिनों में भी वे सुंदर, स्वस्थ व अपनी आयु से काफी युवा दिखती थी। उन्होंने पहली बार संतृप्त और असंतृप्त वसा पर बहुत शोध किया। उन्होंने पहली बार आवश्यक वसा अम्ल ओमेगा-3 व ओमेगा–6 को पहचाना और उन्हें पहचानने की पेपर क्रोमेटोग्राफी तकनीक विकसित की थी। इनके हमारे शरीर पर होने वाले प्रभावों का अध्ययन किया था। उन्होंने यह भी पता लगाया था कि ओमेगा–3 किस प्रकार हमारे...

ओम जय जगदीश हरे के रचयिता श्रद्धा राम फिल्लौरी

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“ओम जय जगदीश हरे” भजन भला किसने गाया या सुना न होगा। यह हिन्दुओं का सर्वाधिक लोकप्रिय भजन है जिसे प्रायः मन्दिरों तथा घरों में भगवान की आरती उतारते समय गाया जाता है। “ओम जय जगदीश हरे” भजन लोगों के लिए एक प्रकार से सामान्य जीवन का अंग सा बन गया है किन्तु बहुत कम लोग जानते होंगे कि इस भजन को किसने और कब लिखा। ओम जय जगदीश हरे के रचयिता हैं श्रद्धा राम फिल्लौरी जिनका जन्म जालंधर (पंजाब) के एक गाँव फिल्लौर में 30 सितम्बर 1837 को हुआ था। श्रद्धा राम जी ने सन् 1844 में अर्थात् मात्र सात वर्ष की उम्र में ही गुरुमुखी भाषा सीख लिया था। बाद में उन्होंने हिन्दी, संस्कृत और पारसी भाषाओं तथा ज्योतिष शास्त्र का भी अध्ययन किया। श्रद्धा राम फिल्लौरी जी का गुरुमुखी और हिन्दी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सन् 1868 में उन्होंने बाइबल का अनुवाद गुरुमुखी भाषा में किया था। उनकी गुरुमुखी रचना “सिखां दे राज दी विथिया” का प्रकाशन सन् 1866 में हुआ था तथा बाद में इस रचना का रोमन में अनुवाद भी हुआ। श्री श्रद्धा राम को भारत के प्रथम उपन्यासकार के रूप में भी जाना जाता है। उनके द्वारा लिखित प्रथम हिंदी ...

आयुर्वेद – स्वास्थ्य रक्षा की हिन्दू पद्धति

•“आयुर्वेद” शब्द “आयुः” और “वेद” शब्दों की संधि से बना है। “आयुः” का अर्थ है “अवस्था, उम्र, जीवन” और “वेद” का अर्थ है “ज्ञान”, अतः “आयुर्वेद का अर्थ हुआ “आयु से सम्बंधित ज्ञान”। •आयुर्वेद को स्वास्थ्य रक्षा हेतु हिन्दू पद्धति माना जाता है। •भारत, नेपाल, श्रीलंका आदि देशों के अनगिनत लोग आयुर्वेद पर ही विश्वास रखते हैं। व्यापक रूप से इसे हमारे ग्रह की अनवरत रूप से चलने वाली औषधि प्रणाली, जिसका उद्गम वैदिक काल से भी पहले ईसा पूर्व 5000 में हुआ था, माना जाता है। •पौराणिक कथाओं के अनुसार आयुर्वेद के समस्त श्लोक स्वयं भगवान ब्रह्मा के मुख से निकले थे अर्थात् वे ब्रह्मवाक्य हैं। •परम्परा के अनुसार, आयुर्वेद का प्रथम वर्णन अग्निवेश लिखित “अग्निवेश तंत्र” के रूप में हुआ। कालान्तर में महर्षि चरक ने इसे पुनः लिखा और इसका नाम “चरक संहिता” पड़ा। •आयुर्वेद का एक अन्य मुख्य ग्रंथ सुश्रुत संहिता है जिसे कि भगवान धन्वन्तरि के प्रमुख शिष्य सुश्रुत ने ईसा पूर्व लगभग 1000 में लिखा था। सुश्रुत को “शल्य चिकित्सा” के जनक के रूप में माना जाता है और “सुश्रुत संहिता” में भगवान धन्वन्तरि के द्वारा बता...

आयुर्वेद

आँवला (Amla) स्वाद में कसैला किन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यन्त गुणकारी! आँवला माता के सदृष हमारा पोषण करने वाला फल है इसलिए इसे “धातृ फल” नाम दिया गया है। आयुर्वेद आँवले का गुणगाण करते जरा भी थकता नहीं है। आँवला अत्यन्त शीतल तासीर वाला फल है। अपनी शीतलता से यह मनुष्य के दिमाग को शान्त रखते के साथ ही शक्ति भी प्रदान करता है। आँवले का नियमित सेवन करना स्‍मरण शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। आयुर्वेद में उदर से सम्बन्धित रोगों के लिए आँवले को रामबाण माना गया है। आँवले के चूर्ण को शहद के साथ मिला कर चाटने सेपेट व गले की जलन, खाना न पचना, खट्टी डकार, गैस व कब्‍ज आदि रोग दूर होते हैं। त्वचा सम्बन्धी रोगों के लिए आँवले का सेवन अत्यन्त लाभकारी है, त्वचा स्वस्थ बनी रहती है। आँवला स्नायु तंत्र को मजबूती प्रदान करता है तथा सौन्दर्य में वृद्धि करता है। आँवले के सेवन से नये खून का निर्माण होता है रक्त सम्बन्धी समस्त विकार दूर होते हैं। आँवला हानिकारक टॉक्सिन को शरीर से बाहर निकालता है और रक्त को साफ करता है। गर्भावस्‍था में आँवला रक्‍त की कमी को दूर करता है। आँवला यौवन शक्ति प्रदान ...

हिन्दी कहावतें तथा लोकोक्तियाँ

हिन्दी कहावतें तथा लोकोक्तियाँ: अर्थ सहित प्रसिद्ध हिंदी कहावतों का संग्रह हिन्दी कहावतें और लोकोक्तियाँ भारतीय लोकजीवन, अनुभव, व्यवहार और सामाजिक समझ का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। छोटी-सी कहावत कई बार जीवन के बड़े सत्य को बहुत सरल शब्दों में समझा देती है। इनमें हमारे पूर्वजों के अनुभव, व्यवहारिक ज्ञान, हास्य, व्यंग्य और जीवन-दर्शन की झलक मिलती है। इस लेख में हिन्दी की प्रसिद्ध कहावतें तथा लोकोक्तियाँ उनके अर्थ सहित दी गई हैं। विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले पाठक तथा हिंदी भाषा में रुचि रखने वाले लोग इस संग्रह का उपयोग कर सकते हैं। अ से शुरू होने वाली कहावतें अंधा बाँटे रेवड़ी, अपने-अपने को देय अर्थ: अपने अधिकार या पद का लाभ अपने लोगों को ही पहुँचाना। अंधा क्या चाहे, दो आँखें अर्थ: मनचाही वस्तु का मिल जाना। अंधा क्या जाने बसंत बहार अर्थ: जिसने किसी वस्तु या अनुभव को जाना ही नहीं, वह उसका आनंद कैसे समझ सकता है। अंधा पीसे, कुत्ता खाए अर्थ: किसी की मजबूरी का लाभ किसी दूसरे को मिल जाना। अंधे की लाठी अर्थ: बेसहारे व्यक्ति का सहारा। अंधे के हाथ बट...

अन्तरिक्ष से सम्बन्धित कुछ रोचक जानकारी

•सूर्य से पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है। अब आप कहेंगे कि सूर्य से पृथ्वी की दूरी तो मात्र 8.3 प्रकाश मिनट है तो ऐसा कैसे हो सकता है। यह सच है कि प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में 8.3 मिनट ही लगते हैं किन्तु जो प्रकाश हम तक पहुँच रहा है उसे सूर्य के क्रोड (core) से उसके सतह तक आने में 30 हजार वर्ष लगते हैं और वह सूर्य की सतह पर आने के बाद ही 8.3 मिनट पश्चात् पृथ्वी तक पहुँचता है, याने कि वह प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है। •अन्तरिक्ष में यदि धातु के दो टुकड़े एक दूसरे को स्पर्श कर लें तो वे स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं। यह भी अविश्वसनीय लगता है किन्तु यह सच है। अन्तरिक्ष के निर्वात के कारण दो धातु आपस में स्पर्श करने पर स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं, बशर्तें कि उन पर किसी प्रकार का लेप (coating) न किया गया हो। पृथ्वी पर ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि वायुमण्डल दोनों धातुओं के आपस में स्पर्श करते समय उनके बीच ऑक्सीडाइज्ड पदार्थ की एक परत बना देती है। •अन्तरिक्ष में ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकती। •जी हाँ, ध्वनि को एक स्थान से दूसरे स्थान त...

Boys have emotions....

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Science & God - ABDUL KALAM

One Of The Best Arguments.!! I have ever read , Don’t miss even a single word…. I...t’s Too good An atheist professor of philosophy speaks to his class on the problem science has with God, The Almighty. He asks one of his new students to stand and….. Prof: So you believe in God? Student: Absolutely, sir. Prof: Is God good? Student: Sure. Prof: Is God all-powerful? Student: Yes.. Prof: My brother died of cancer even though he prayed to God to heal him. Most of us would attempt to help others who are ill. But God didn’t. How is this God good then? Hmm? (Student is silent.) Prof: You can’t answer, can you? Let’s start again, young fella. Is God good? Student: Yes. Prof: Is Satan good? Student: No. Prof: Where does Satan come from? Student: From….God… Prof: That’s right. Tell me son, is there evil in this world? Student: Yes. Prof: Evil is everywhere, isn’t it? And God did make everything. Correct? Student: Yes. Prof: So who created evil? (Student does not answer.)...