डायबिटीज के नियंत्रण की चाबी- अलसी
पिछले कुछ दशकों में भारत समेत पूरे विश्व में डायबिटीज टाइप-2 के रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है व अब तो यह किशोरों और बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। डायबिटीज एक महामारी का रुप ले चुकी है। आइये हम जानने की कोशिश करते हैं कि पिछले कुछ दशकों में हमारे खान-पान, जीवनचर्या या वातावरण में ऐसा क्या बदलाव आया है। शोधकर्ताओं के अनुसार जब से परिष्कृत यानी “रिफाइन्ड तेल” (जो बनते समय उच्च तापमान, हेग्जेन, कास्टिक सोडा, फोस्फोरिक एसिड, ब्लीचिंग क्ले आदि घातक रसायनों के संपर्क से गुजरता है), ट्रांसफेट युक्त पूर्ण या आंशिक हाइड्रोजिनेटेड वसा यानी वनस्पति घी (जिसका प्रयोग सभी पैकेट बंद खाद्य पदार्थों व बेकरी उत्पादनों में धड़ल्ले से किया जाता है), रासायनिक खाद, कीटनाशक, प्रिजर्वेटिव, रंग, रसायन आदि का प्रयोग बढ़ा है तभी से डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़ी है। हलवाई और भोजनालय भी वनस्पति घी या रिफाइन्ड तेल का प्रयोग भरपूर प्रयोग करते हैं और व्यंजनों को तलने के लिए तेल को बार-बार गर्म करते हैं जिससे वह जहर से भी बदतर हो जाता है। शोधकर्ता इन्ही को डायबिटीज का प्रमुख कारण मानते हैं। ...