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Showing posts from May, 2012

संस्कृति- APJ Kalam On Gift

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Excerpts from Dr. A.P.J. Abdul Kalam's address to the members of India Islamic Cultural Centre, New Delhi, 2007: "I would like to mention the writings in Manu Smriti which, states that "By accepting gifts the divine light in the person gets extinguished". Manu warns every individual against accepting gifts for the reason that it places the acceptor under an obligation in favour of the person who ...gave the gift and ultimately it results in making a person to do things which are not permitted according to law. I am sharing this thought with all of you since no one should get carried away by any gift which comes with a purpose and through which one loses his personality greatly." (Dr. Kalam delivered this speech when he still was in the high office as the President of India)

बड़े ही काम की हैं ये वेबसाइट्स, आपको हो जाएगा फायदा (GOOD WEBSITES)

बड़े ही काम की हैं ये वेबसाइट्स, आपको हो जाएगा फायदा http://hindumahasagar.wordpress.com स्टूडेंट्स क...ो गर्मी की छुट्टियों में कई असाइनमेंट्स मिले होंगे। इसके अलावा होम वर्क अलग से होगा। ऐसे में कुछ ऐसी वेबसाइट्स के बारे में जानते हैं, जो इन्हें पूरा करने में मदद करेंगी। स्टूडेंट्स कई बार घर पर पढ़ते हुए ऐसी डिटेल्स पाने की जरूरत महसूस करते हैं, जिनका जिक्र किताबों में तो होता है, लेकिन उस पर गहराई से जानकारी नहीं होती। ऐसे मुद्दों और विषयों पर गहराई से जानकारी हासिल करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। जानते हैं कौन सी साइट्स बनेंगी मददगार। Refdesk.com यह तथ्यों की जांच करने में मददगार वेबसाइट है। यहां पर इतने विविध तथ्य और जानकारियां मौजूद हैं कि छात्रों के लिए इससे बेहतर होमपेज कोई और नहीं हो सकता। गूगल, बिंग और याहू सर्च रेफडेस्क के होमपेज से ही की जा सकती है। इसके साथ-साथ विकीपीडिया, यू-ट्यूब तथा कई डिक्शनरियों तथा इनसाइक्लोपीडिया में भी सर्च की सुविधा मौजूद है। दिन के खास समाचारों, खास तथ्यों, खास लोगों, खास शब्दों, खास घटनाओं आदि की आकाईव भी उपलब्ध ह...

संस्कृति- अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने ---

अपनी भारत की संस्कृति क ो पहचाने --- दो पक्ष - कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष ! तीन ऋण - देव ऋण, पित्र ऋण एवं ऋषि त्रण ! चार युग - सतयुग , त्रेता युग , द्वापरयुग एवं कलयुग ! चार धाम - द्वारिका , बद्रीनाथ, जगन्नाथ पूरी एवं रामेश्वरम धाम ! चारपीठ - शारदा पीठ ( द्वारिका ), ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम), गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) एवं  श्रन्गेरिपीठ ! चर वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद, यजुर्वेद एवं सामवेद ! चार आश्रम - ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , बानप्रस्थ एवं संन्यास ! चार अंतःकरण - मन , बुद्धि , चित्त , एवं अहंकार ! पञ्च गव्य - गाय का घी , दूध , दही , गोमूत्र एवं गोबर , ! पञ्च देव - गणेश , विष्णु , शिव , देवी और सूर्य ! पंच तत्त्व - प्रथ्वी , जल , अग्नि , वायु एवंआकाश ! छह दर्शन - वैशेषिक , न्याय , सांख्य, योग , पूर्व मिसांसा एवं दक्षिण मिसांसा ! सप्त ऋषि - विश्वामित्र , जमदाग्नि , भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप ! सप्त पूरी - अयोध्या पूरी , मथुरा पूरी , माया पूरी ( हरिद्वार ) , कशी , कांची ( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,  अवंतिका और द्वारिका पूरी ! आठ योग - यम , नियम, ...

संस्कृति-अँग्रेजी भाषा के बारे में भ्रम *** गुलामी या आवश्यकता

आज के मैकाले मानसों द्वारा अँग्रेजी के पक्ष में तर्क और उसकी सच्चाई : 1. अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है:: विश्व में इस समय १० सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थायें (Top 10 Economies) अमेरिका, चीन, जापान, भारत, जर्मनी, रशिया, ब्राजील, ब्रिटेन, फ्रांस एवं इटली है| जिसमे मात्र २ देश ही अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हैं अमेरिका और ब्रिटेन वोह भी एक सी नहीं, दोनों कि अंग्रेजी में भी अंतर है | अब आप ही बताएं कि किस आधार पर अंग्रेजी को वैश्विक भाषा (Global Language) माना जाए |दुनिया में इस समय 204 देश हैं और मात्र 12 देशों में अँग्रेजी बोली, पढ़ी और समझी जाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी, समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी। पूरी दुनिया में जनसंख्या के हिसाब से सिर्फ 3% लोग अँग्रेजी बोलते हैं जिसमे भारत द...

संस्कृति-भारतीय काल गणना की वैज्ञानिक पद्धति

भारतीय काल गणना की वैज्ञानिक पद्धति यह अति सूक्ष्म से लेकत अति विशाल है .यह एक सेकण्ड के ३००० वे भाग त्रुटी से शुरू होता है तो युग जो कई लाख वर्ष का होता है ब्रिटिश केलेंडर रोमन कलेण्डर कल्पना पर आधारित था। उसमें कभी मात्र 10 महीने हुआ करते थे। जिनमें कुल 304 दिन थे। बाद में उन्होने जनवरी व फरवरी माह जोडकर 12 माह का वर्ष किया। इसमें भी उन्होने वर्ष के दिनो को ठीक करने के लिये फरवरी को 28 और 4 साल बाद 29 दिन की। कुल मिलाकर ईसवी सन् पद्धति अपना कोई वैज्ञानिक प्रभाव है।भारतीय पंचाग में यूं तो 9 प्रकार के वर्ष बताये गये जिसमें विक्रम संवत् सावन पद्धति पर आधारित है। उन्होने बताया कि भारतीय काल गणना में समय की सबसे छोटी इकाई से लेकर ब्रम्हांड की सबसे बडी ईकाई तक की गणना की जाती है। जो कि ब्रहाण्ड में व्याप्त लय और गति की वैज्ञानिकता को सटीक तरीके से प्रस्तुत करती है।आज कि वैज्ञानिक पद्धति कार्बन आधार पर पृथ्वी की आयु 2 अरब वर्ष के लगभग बताती है। और यहीं गणना भारतीय पंचाग करता है। जो कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर पूरी तरह से प्रमाणिकता के साथ खडा हुआ है। हमारी पृथ्वी पर जो ऋतु क्रम घटित होता...

इलाज - तुलसी के बीज का महत्त्व

तुलसी के बीज का महत्त्व जब भी तुलसी में खूब फुल यानी मंजिरी लग जाए तो उन्हें पकने पर तोड़ लेना चाहिए वरना तुलसी के झाड में चीटियाँ और कीड़ें लग जाते है और उसे समाप्त कर देते है . इन पकी हुई मंजिरियों को रख ले . इनमे से काले काले बीज अलग होंगे उसे एकत्र कर ले . यही सब्जा है . तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा शीतल होता है . इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है . इसे भिगाने से यह जेली की तरह फुल जाता है . इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां दाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है .इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है .यह पित्त घटाता है. आसाराम जी बापू ने तुलसी बीज और त्रिकटु (सोंठ ,काली मिर्च और पीपर )मिलाकर स्वादिष्ट गोलियां बनायी है जो सदैव घर में रखने योग्य है . ये कफनाशक , क्षुधावर्धक और पाचक है .

इलाज -क्या कारण है की गर्मी शुरू होते ही सभी प्रकार के बेक्टीरिया और वायरस क्रियाशील हो जाते है

क्या कारण है की गर्मी शुरू होते ही सभी प्रकार के बेक्टीरिया और वायरस क्रियाशील हो जाते है और मलेरिया , टायफोइड ,जोंडिस ,डायरिया , स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियाँ फ़ैल जाती है ?  इसका मुख्य कारण है पित्त का बढना .---  इसलिए पित्त को सम रखो और इन सब बीमारियों से बचो .  जीरा , धनिया , सौंफ , हिंग , अजवाइन ,लौकी , कच्चा नारियल , बेल , गाय के दूध से बना छाछ इनका भरपूर इस्तेमाल करो शक्कर  की जगह मिश्री और नमक की जगह सेंधा या काले नमक का इस्तेमाल करें . सुबह २ से ४ ग्लास पानी पिए, हो सके तो आंवला और एलो वेरा ज्यूस के साथ .. पित्त सम होने से पसीने में बदबू नहीं आएगी ; चाहे कितना ही पसीना क्यों ना आए और इससे होने वाली परेशानियां जैसे दाद , रेश , पिम्पल्स फोड़े , फुंसियां इत्यादि भी नहीं होंगी

संस्कृति- पुनर्जन्म सिद्धांत

पुनर्जन्म का भारतीय सिद्धांत -- क्या कारण है की विदेश में रहने वाले भारत आकर महसूस करते है की वे घर आ गए . यहाँ की गन्दगी , धुल , गर्मी के बावजूद वे भारत को पसंद करते है .  यहाँ का आध्यात्म ,जीवन दर्शन ,त्यौहार इन्हें भाते है . क्योंकि ये कभी ना कभी पिछले किसी जन्म में भारतीय थे .  एक बार जो भारत की पुण्य भूमि में जन्म ले ले उसके संस्कार हमेशा के लिए भारतीय हो जाते है . क्या कारण है की कई भारतीय विदेश जाने के ख़्वाब देखते है और मौक़ा मिलते ही वही बस जाते है . यहाँ रह कर भी वे रहते तो अंग्रेज ही है .उनकी बोली ,खान पान सब विदेशी . यहाँ तक की वे लूटते भी अंग्रेजों की तरह ही है .

संस्कृति-अक्षय तृतीया किया हैं ?( What is Akshaya Tritiya?)

Each second of" Akshaya Tritiya" is Auspicious. This is the time to put in our best to get eternal benefits. Akshaya (in Hindi) means "never diminishing" Many things happened on this day in the History: :) # Draupadi was given Akshaya Patra (bowl) by Krishna which supplied unlimited food; :) # Kubera, treasurer of gods, prayed to Lakshmi, goddess of wealth, to fill his treasury; :) # Parashurama, the sixth incarnation of Vishnu, was born; :) # Sat-Yug ended and Treta-Yug began; :) # The Ganga descended from Heaven; :) # Ved Vyasa and Ganesha began writing the epic Maha-bharata; :) # AND Sudama, the poor friend of Krishna, came to Dwarka to ask for help. In return for a handful of beaten rice, Krishna gave immense wealth to Sudama. :) # Gates of the Badrinarayana temple open on this day. :) # Construction of chariots for the Jagannath rath yatra at Puri commences. :) # Jains observe fast and break it with sugarcane juice as king-turned-...

संस्कृति - हिन्दू-धर्म का आधार--(BASE OF HINDU RELIGION)

हिन्दू-धर्म का आधार हिन्दू-धर्म का आधारहिन्दू धर्म व्यक्ति प्रवर्तित धर्म नहीं है। इसका आधार वेदादि धर्मग्रन्थ है, जिनकी संख्या बहुत बड़ी है। ये सब दो विभागों में विभक्त है। 1॰ इस श्रेणी के ग्रन्थ ``श्रुति´´ कहलाते हैं। ये अपौरषेय माने जाते हैं। इसमें वेद की चार संहिताओं, ब्राह्मणों, आरण्यकों, उपनिषदों, वेदांग, सूत्र आदि ग्रन्थों की गणना की जाती है। आगम ग्रन्थ भी श्रुति-श्रेणी में माने जाते हैं।2॰ इस श्रेणी के ग्रन्थ ``स्मृति´´ कहलाते हैं। ये ऋषि प्रणीत माने जाते हैं। इस श्रेणी में 18 स्मृतियाँ, 18 पुराण तथा रामायण व महाभारत ये दो इतिहास भी माने जाते हैं। 1॰ श्रुति1॰1 वेदयद्यपि वेद से ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद की संहिताओं का ही बोध होता है, तथापि हिन्दू लोग इन संहिताओं के अलावा ब्राह्मण ग्रन्थों, आरण्यकों तथा उपनिषदों को भी वेद ही मानते हैं। इनमें ऋक् आदि संहितायें स्तुति प्रधान हैं, ब्राह्मण ग्रन्थ यज्ञ कर्म प्रधान हैं और आरण्यक तथा उपनिषद् ज्ञान चर्चा प्रधान हैं।ऋग्वेद संहिता - यह चारों संहिताओं में प्रथम गिनी जाती है। अन्य संहिताओं में इसके अनेक सूक्त संग्रह कि...

संस्कृति - मंत्र क्या है ? मंत्र कैसे कार्य करता है ?

मंत्र क्या है ? मंत्र कैसे कार्य करता है ? मंत्र ध्वनी का समूह है. .. जिस तरह ध्वनि काफी सकती शाली होता है यह सिद्ध हो चूका है , अधिक DB के ध्वनि से जिस तरह काच टूट सकते है , लेकीन ध्वनि को हम नहीं दे सकते है . उसी तरह जब हम बीज मंत्रो , या सबर मंत्रो का जप करते है तो निश्तित DB की ध्वनि उत्पन होता, और हमारे मूलाधार चक्र को चोट करती है . हमारे शरिअर के अन्दर 7 चक्र होते है . जो अध्य्तिमिक शक्ति को गरहन करते है , जिस तरह वातावरण में काफी रेडियो तरंगे है जिसे हम देख नहीं सकते बगर किसी उपकरण के , उसी तरहअ पुरे वातावरण में अध्य्तिम्क तरंगे है , जब हम रेडियो को किसी स्टेशन पर TUNE करते तभी हमे कोई आवाज़ आती , उससे पहले नहीं . इसी तरहा जब हम मंत्र साधना करते है निश्चित मंत्र का उपयोग करके तब हमे अध्यात्मिक तरंगे से संपर्क होता है . और हमे कुछ अनुभव होता है, जब तक आप रेडियो या टीवी को सही चैनल नहीं लगाते तब तक न आवाज़ न चित्र आती है , सारा वातावरण में ऑडियो और वीडियो सिग्नल विचरण कर रहे लेकिन हमे दिखाई नहीं देता जब तक हम सही उपकरण का पर्योग नहीं करते तब तक, वैसे ही जब तक हम सही तरह से ...

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