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Showing posts from February, 2011

Sir, my Dad is the pilot, And he is taking me home

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Story told by a man which is most frightening yet thought-provoking experience of his life. He had been on a long flight.. The first warning of the approaching problems came when the sign on the airplane flashed on: "Fasten your seat belts." Then, after a while, a calm voice said, "We shall not be serving the beverages at this time as we are expecting a little turbulence. Please be sure your seat belt is fastened.." As he looked around the aircraft, it became obvious that many of the passengers were becoming apprehensive. Later, the voice of the announcer said, "We are so sorry that we are unable to serve the meal at this time.. The turbulence is still ahead of us." And then the storm broke. The ominous cracks of thunder could be heard even above the roar of the engines. Lightening lit up the darkening skies, and within moments that great plane was like a cork tossed around on a celestial ocean. One moment the airplane was lifted on terri...

DAYWITH A WOMAN

                              After 21 years of Marriage, my Wife wanted me to take another woman out to dinner and a movie. She said I love you but I know this other woman loves you and would love to spend some time with you. The other woman that my wife wanted me to visit was my MOTHER, who has been a widow for 19 years, but the demands of my work and my three children had made it possible to visit her only occasionally. That night I called to invite her to go out for dinner and a movie. 'What's wrong, are you well,' she asked? My mother is the type of woman who suspects that a late night call or a surprise invitation is a sign of bad news. 'I thought that it would be pleasant to be with you,' I responded. 'Just the two of us.' She thought about it for a moment, and then said, 'I would like that very much.' That Friday after work,...
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भारतीय संस्कृ्ति का महान प्रतीक चिन्ह-----स्वस्तिक(a symbol of life and preservation ) हिन्दू धर्म जितना विशाल और गहन है,उसकी मान्यताएं और प्रक्रियाएं भी उतनी ही विशद और विस्तृ्त हैं । आज हम देखते हैं कि जागरूकता की अधिकता के चलते बहुत से व्यक्ति विशेष रूप से पश्चिमी सभ्यता से अति प्रभावित लोग, अपने धर्म से संबंधित मान्यताओं,रीति-रिवाजों एवं कर्मकांडों पर शंका व्यक्त करने लगे हैं ।बहुत ही बातों को बिना जाने-समझे सिर्फ उन्हे ढकोसला एवं अनावश्यक समझने लगे हैं । जब कि यदि वे इन सब चीजों,प्रक्रियाओं के बारें में गहराई से मनन करें तो पाएंगें कि हिन्दू धर्म विश्व का एकमात्र ऎसा धर्म है जो कि अपने प्रत्येक कर्म,संस्कार और परम्परा में पूर्णत: वैज्ञानिकता समेटे हुए है । प्राचीन काल में शिक्षा पद्धति ऎसी थी कि बालकों को प्रारंभ से ही धर्म के बारे में विस्तृ्त जानकारी दी जाती थी,जिससे कि उनकी आस्था स्वधर्म और परम्पराओं के प्रति बनी रहे........ओर वो उनका पालन सिर्फ एक दिखावे के लिए नहीं अपितु आन्तरिक श्रद्धा भाव से करें । किन्तु आज स्थिति ऎसी नहीं है । आज न तो हमारी शिक्षा प्रणाली ऎसी है कि बच्...
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खजुराहो विवरण खजुराहो भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त, छतरपुर ज़िले में स्थित एक प्रमुख शहर है जो अपने प्राचीन एवं मध्यकालीन मंदिरों के लिये विश्वविख्यात है। खजुराहो वैसे तो भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त, छतरपुर ज़िले में स्थित एक छोटा सा क़स्बा है लेकिन फिर भी भारत में, ताजमहल के बाद, सबसे ज़्यादा देखे और घूमे जाने वाले पर्यटन स्थलों में अगर कोई दूसरा नाम आता है तो वह है, खजुराहो। खजुराहो, भारतीय आर्य स्थापत्य और वास्तुकला की एक नायाब मिसाल है। खजुराहो को इसके अलंकृत मंदिरों की वजह से जाना जाता है जो कि देश के सर्वोत्कृष्ठ मध्यकालीन स्मारक हैं। चंदेल शासकों ने इन मंदिरों की तामीर सन 900 से 1130 ईसवी के बीच करवाई थी। इतिहास में इन मंदिरों का सबसे पहला जो उल्लेख मिलता है,वह अबू रिहान अल बरूनी (1022 ईसवी) तथा अरब मुसाफ़िर इब्न बतूता का है। खजुराहो मन्दिर, मध्य प्रदेशदरअसल यह क्षेत्र प्राचीन काल में वत्स के नाम से, मध्यकाल में जैजाक्भुक्ति नाम से तथा चौदहवीं सदी के बाद बुन्देलखन्ड के नाम से जाना गया। खजुराहो के चन्देल वंश का उत्थान दसवीं सदी के शुरू से माना जाता है। इनकी राजधानी प्रासाद...
हिंदुत्व: धर्म या जीवन पद्धति                                         धर्म ही सिखाता है कैसे जीएँ हिंदुत्व के चार सिद्धांत (पुरुषार्थ):- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। तर्क का काम वेश्याओं की तरह होता है। जिनके पास ताकत होती है उनका तर्क चलता है फिर भले ही वे कुतर्क कर रहे हों। तर्क से अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा सिद्ध किया जा सकता है। तर्क के आगे तथ्‍य और तत्व कमजोर सिद्ध होता आया है। यदि यह कहा जाए कि हिंदुत्व धर्म है और धर्म से ही जीवन पद्धति मिलती है तो इसके खिलाफ तर्क जुटाए जा सकते हैं और यह कहा जाए कि हिंदुत्व धर्म नहीं जीवन पद्धति है, तो फिर इसके खिलाफ भी तर्क जुटाए जा सकते हैं। किंतु शास्त्र कहते हैं कि धर्म की बातें तर्क से परे होती हैं। बहस से परे होती हैं। हिंदू धर्मग्रंथ को पढ़कर समझने वाले ही धर्म को जानते हैं और फिर उस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने, बहस करने स...
भगवान राम की वंश परंपरा हिंदू धर्म में राम को विष्णु का सातवाँ अवतार माना जाता है। वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध। राम का जन्म इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था। जैन धर्म के तीर्थंकर निमि भी इसी कुल के थे। मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु से विकुक्षि, निमि और दण्डक पुत्र उत्पन्न हुए। इस तरह से यह वंश परम्परा चलते-चलते हरिश्चन्द्र रोहित, वृष, बाहु और सगर तक पहुँची। इक्ष्वाकु प्राचीन कौशल देश के राजा थे और इनकी राजधानी अयोध्या थी। रामायण के बालकांड में गुरु वशिष्ठजी द्वारा राम के कुल का वर्णन किया गया है जो इस प्रकार है:- ब्रह्माजी से मरीचि का जन्म हुआ। मरीचि के पुत्र कश्यप हुए। कश्यप के विवस्वान और विवस्वान के वैवस्वतमनु हुए। वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था। वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था। इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुल की स्थापना की। इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए। कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था। विकुक्षि के पुत्र बाण और बाण के पुत्र अनरण्य हुए।...
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आज़ाद भारत??? मित्रों मुझे तो अभी शंका ही है कि भारत आज़ाद है क्यों कि भारत आज़ाद होता तो यहाँ किसी विदेशी के आने पर उससे पासपोर्ट और वीजा माँगा जाना चाहिए, किन्तु १९९७ में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबैथ के भारत आने पर पासपोर्ट नहीं लगा था वह बिना पासपोर्ट के भारत आई थी १९४७ से पहले जब कोई ब्रीटिश अधिकारी या महारानी का भारत आना होता था तब उनसे पासपोर्ट पूछने वाला कोई नहीं था क्यों कि उस समय भारत इंग्लैण्ड का एक उपनिवेश था किन्तु आज तो हम शायद भारत को आज़ाद कहते हैं न? मित्रों आपको पता होगा कि आज के समय में जब चुनाव के बाद कोई दूसरी पार्टी सत्ता में आती है तो शपथ ग्रहण समारोह के बाद नया प्रधान मंत्री एक कागज़ पर हस्ताक्षर करता है जिसे सत्ता का हस्तांतरण कहते हैं, और उस पर हस्ताक्षर करने के बाद पुरानी पार्टी को देश निकाला नहीं दिया जाता, उसे भी भारत में सामान अधिकार के साथ जीने का हक़ दिया जाता है क्यों कि उस पार्टी के नेता भी भारत के संविधान में भारत के नागरिक हैं, अत: जो अधिकार एक साधारण भारतीय के हैं वे पुरानी पार्टी के नेता के भी हैं क्यों कि हम आज़ाद हैं मित्रों १९४७ में भी नेह...