WORLD MAP -MAHABHARAT vs BRITISHERS

अधिकांश लोग अंग्रेजों को भारत का नक्शा स्पष्ट करने और दुनिया का नक्शा बनाने के लिए महिमा मंडित करते हैं! वे यह भी कहते हैं कि हिंदू धर्म में पृथ्वी को चपटी बताया गया है! उनके लिए विकिपीडिया पर उल्लिखित जानकारी नीचे उपलब्ध है कि महाभारत में पृथ्वी के विषय में हमारे संतों के मत क्या थे!


महाभारत में भारत के अतिरिक्त विश्व के कई अन्य भौगोलिक स्थानों का सन्दर्भ भी आता है जैसे चीन का गोबी मरुस्थल, मिस्र की नील नदी, लाल सागर तथा इसके अतिरिक्त महाभारत के भीष्म पर्व के जम्बूखण्ड-विनिर्माण पर्व में सम्पूर्ण पृथ्वी का मानचित्र भी बताया गया है, जो निम्नलिखित है-:



“ सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन।

परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥

यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः।

एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥

द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।”

—वेद व्यास, भीष्म पर्व, महाभारत


अर्थात: हे कुरुनन्दन ! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भाँति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखायी देता है। इसके दो अंशो मे पिप्पल और दो अंशो मे महान शश(खरगोश) दिखायी देता है। अब यदि उपरोक्त संरचना को कागज पर बनाकर व्यवस्थित करे तो हमारी पृथ्वी का मानचित्र बन जाता है, जो हमारी पृथ्वी के वास्तविक मानचित्र से बहुत समानता दिखाता है!—









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