हिन्दी कहावतें तथा लोकोक्तियाँ
हिन्दी कहावतें और लोकोक्तियाँ भारतीय लोकजीवन, अनुभव, व्यवहार और सामाजिक समझ का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। छोटी-सी कहावत कई बार जीवन के बड़े सत्य को बहुत सरल शब्दों में समझा देती है। इनमें हमारे पूर्वजों के अनुभव, व्यवहारिक ज्ञान, हास्य, व्यंग्य और जीवन-दर्शन की झलक मिलती है।
इस लेख में हिन्दी की प्रसिद्ध कहावतें तथा लोकोक्तियाँ उनके अर्थ सहित दी गई हैं। विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले पाठक तथा हिंदी भाषा में रुचि रखने वाले लोग इस संग्रह का उपयोग कर सकते हैं।
अ से शुरू होने वाली कहावतें
अंधा बाँटे रेवड़ी, अपने-अपने को देय
अर्थ: अपने अधिकार या पद का लाभ अपने लोगों को ही पहुँचाना।
अंधा क्या चाहे, दो आँखें
अर्थ: मनचाही वस्तु का मिल जाना।
अंधा क्या जाने बसंत बहार
अर्थ: जिसने किसी वस्तु या अनुभव को जाना ही नहीं, वह उसका आनंद कैसे समझ सकता है।
अंधा पीसे, कुत्ता खाए
अर्थ: किसी की मजबूरी का लाभ किसी दूसरे को मिल जाना।
अंधे की लाठी
अर्थ: बेसहारे व्यक्ति का सहारा।
अंधे के हाथ बटेर लगना
अर्थ: बिना प्रयास के अचानक मनचाही वस्तु मिल जाना।
अंधे के आगे रोए, अपनी आँखें खोए
अर्थ: मूर्ख व्यक्ति को समझाना व्यर्थ है।
अंधेर नगरी, चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा
अर्थ: जहाँ शासन व्यवस्था अव्यवस्थित हो और न्याय-अन्याय का कोई विवेक न हो।
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता
अर्थ: अकेला व्यक्ति बड़ा काम पूरा नहीं कर सकता।
अकेला हँसता भला, न रोता भला
अर्थ: सुख-दुःख में साथी की आवश्यकता होती है।
अंत भला तो सब भला
अर्थ: यदि कार्य का अंतिम परिणाम अच्छा हो जाए तो पहले की कमियाँ भुला दी जाती हैं।
अंत भले का भला
अर्थ: भलाई करने वाले का परिणाम भी अच्छा होता है।
अपना-अपना कमाना, अपना-अपना खाना
अर्थ: अपने जीवन के लिए स्वयं पर निर्भर रहना।
अपना ढेंढर देखे नहीं, दूसरे की फुल्ली निहारे
अर्थ: अपने बड़े दोषों को न देखकर दूसरों के छोटे दोषों की आलोचना करना।
अपना मकान कोट समान
अर्थ: अपना घर सबसे सुरक्षित स्थान होता है।
अपना रख, पराया चख
अर्थ: अपनी वस्तु बचाकर रखना और दूसरों की वस्तु का उपयोग करना।
अपना ही सोना खोटा तो सुनार का क्या दोष
अर्थ: अपनी वस्तु या कार्य में दोष हो तो दूसरे को दोष देना उचित नहीं।
अपनी-अपनी ढफली, अपना-अपना राग
अर्थ: प्रत्येक व्यक्ति का अपना अलग मत होना।
अपनी करनी पार उतरनी
अर्थ: अपने कार्यों का परिणाम स्वयं ही भुगतना पड़ता है।
अपनी गरज से लोग गधे को भी बाप बनाते हैं
अर्थ: स्वार्थ के लिए लोग किसी से भी संबंध बना लेते हैं।
अपनी गली में कुत्ता भी शेर
अर्थ: अपने क्षेत्र या घर में व्यक्ति अधिक प्रभावशाली होता है।
आप भला तो जग भला
अर्थ: अच्छे स्वभाव वाले व्यक्ति को संसार भी अच्छा दिखाई देता है।
आप मरे, जग परलय
अर्थ: अपने लिए संसार का महत्व अपने जीवन तक ही रहता है।
आम के आम, गुठलियों के दाम
अर्थ: एक ही काम से दोहरा लाभ होना।
आम खाने से काम, पेड़ गिनने से क्या मतलब
अर्थ: परिणाम प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, अनावश्यक विवरण में उलझना नहीं।
आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास
अर्थ: अपने मूल उद्देश्य को भूलकर दूसरे काम में लग जाना।
आसमान से गिरा, खजूर पर अटका
अर्थ: एक कठिनाई से निकलकर दूसरी कठिनाई में फँस जाना।
आ बैल, मुझे मार
अर्थ: जानबूझकर अपने लिए मुसीबत खड़ी करना।
आग बिना धुआँ नहीं
अर्थ: बिना कारण कोई बात उत्पन्न नहीं होती।
आगे नाथ, न पीछे पगहा
अर्थ: पूरी तरह स्वतंत्र होना और किसी बंधन में न होना।
आज का बनिया, कल का सेठ
अर्थ: मेहनत और उन्नति से व्यक्ति धीरे-धीरे आगे बढ़ता है।
आटे का चिराग, घर रखूँ तो चूहा खाए, बाहर रखूँ तो कौआ ले जाए
अर्थ: ऐसी वस्तु जिसे किसी भी तरह सुरक्षित रखना कठिन हो।
आदमी-आदमी में अंतर, कोई हीरा कोई कंकर
अर्थ: सभी व्यक्तियों के गुण और स्वभाव समान नहीं होते।
आदमी का दवा आदमी है
अर्थ: मनुष्य ही मनुष्य के काम आता है।
आदमी को ढाई गज कफन काफी है
अर्थ: अंततः मनुष्य की आवश्यकताएँ बहुत सीमित होती हैं।
इ, ई और उ से संबंधित कहावतें
इधर कुआँ, उधर खाई
अर्थ: दोनों ओर मुसीबत होना।
इतनी सी जान, गज भर की ज़बान
अर्थ: अपनी उम्र या क्षमता से अधिक बोलना।
इतना खाए जितना पावे
अर्थ: अपनी आय और सामर्थ्य के अनुसार खर्च करना चाहिए।
ए से संबंधित कहावतें
एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है
अर्थ: एक बुरा व्यक्ति पूरे समूह को बदनाम कर सकता है।
क से शुरू होने वाली कहावतें
अक्ल बड़ी या भैंस
अर्थ: शारीरिक शक्ति की अपेक्षा बुद्धि अधिक महत्वपूर्ण है।
अटकेगा सो भटकेगा
अर्थ: अत्यधिक दुविधा और विलंब से काम बिगड़ सकता है।
अधजल गगरी छलकत जाए
अर्थ: कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है।
करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान
अर्थ: निरंतर अभ्यास से मूर्ख व्यक्ति भी कुशल बन सकता है।
करम के बलिया, पकाई खीर हो गया दलिया
अर्थ: दुर्भाग्य से अच्छा काम भी बिगड़ सकता है।
कर सेवा तो खा मेवा
अर्थ: अच्छे कार्य का अच्छा परिणाम मिलता है।
करे कोई, भरे कोई
अर्थ: एक व्यक्ति के कार्य का दंड किसी दूसरे को भुगतना पड़े।
कल किसने देखा है
अर्थ: भविष्य अनिश्चित है, इसलिए वर्तमान का उचित उपयोग करना चाहिए।
कहाँ राम-राम, कहाँ टाँय-टाँय
अर्थ: असमान वस्तुओं या व्यक्तियों की तुलना नहीं की जा सकती।
कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानमती ने कुनबा जोड़ा
अर्थ: अलग-अलग और असंबंधित चीजों को जोड़कर एक समूह बना देना।
काठ की हाँडी एक बार ही चढ़ती है
अर्थ: धोखा बार-बार नहीं दिया जा सकता।
कान में तेल डालकर बैठना
अर्थ: जानबूझकर किसी बात की ओर ध्यान न देना।
काबुल में क्या गधे नहीं होते
अर्थ: हर स्थान पर अच्छे लोगों के साथ बुरे लोग भी होते हैं।
काम को काम सिखाता है
अर्थ: अभ्यास से कार्यकुशलता बढ़ती है।
काल न छोड़े राजा, न छोड़े रंक
अर्थ: मृत्यु सभी के लिए समान है।
काला अक्षर भैंस बराबर
अर्थ: बिल्कुल अनपढ़ होना।
किस खेत की मूली है
अर्थ: किसी को महत्वहीन समझना।
किसी का घर जले, कोई तापे
अर्थ: किसी की हानि से किसी दूसरे का लाभ होना।
कुंजड़ा अपने बेरों को खट्टा नहीं बताता
अर्थ: व्यक्ति अपनी वस्तु को खराब नहीं बताता।
कुँए की मिट्टी कुँए में ही लगती है
अर्थ: आमदनी का पूरा पैसा उसी काम में खर्च हो जाना जिससे वह प्राप्त हुआ।
कुतिया चोरों से मिल जाए तो पहरा कौन दे
अर्थ: रक्षक ही बेईमान हो जाए तो सुरक्षा कौन करेगा।
कुत्ते की दुम बारह बरस नली में रखो, फिर भी टेढ़ी की टेढ़ी
अर्थ: दुष्ट व्यक्ति बहुत प्रयास के बाद भी अपना स्वभाव आसानी से नहीं बदलता।
कुत्ते को घी नहीं पचता
अर्थ: अयोग्य व्यक्ति को अधिकार या सुविधा मिलने पर वह उसका दुरुपयोग कर सकता है।
कुत्ता भौंके हजार, हाथी चले बाजार
अर्थ: समर्थ व्यक्ति दूसरों की आलोचना की परवाह नहीं करता।
कंगाली में आटा गीला
अर्थ: एक मुसीबत के ऊपर दूसरी मुसीबत आ जाना।
ककड़ी के चोर को फाँसी नहीं दी जाती
अर्थ: अपराध के अनुसार ही दंड दिया जाना चाहिए।
कड़ाही से गिरा, चूल्हे में पड़ा
अर्थ: छोटी विपत्ति से निकलकर बड़ी विपत्ति में पड़ना।
कब्र में पाँव लटकना
अर्थ: बहुत अधिक वृद्ध होना।
कभी के दिन बड़े, कभी की रात
अर्थ: परिस्थितियाँ हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं।
कमली ओढ़ने से फकीर नहीं होता
अर्थ: केवल बाहरी वेशभूषा बदलने से गुण नहीं बदलते।
कमान से निकला तीर और मुँह से निकली बात वापस नहीं आती
अर्थ: बोलने से पहले सोच लेना चाहिए।
ख से शुरू होने वाली कहावतें
खग जाने खग ही की भाषा
अर्थ: समान स्वभाव वाले लोग एक-दूसरे को आसानी से समझ लेते हैं।
खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग पकड़ता है
अर्थ: संगति या देखादेखी का प्रभाव पड़ना।
ख्याली पुलाव से पेट नहीं भरता
अर्थ: केवल कल्पना करने से काम पूरा नहीं होता।
खाक डालने से चाँद नहीं छिपता
अर्थ: किसी की निंदा करने से उसकी वास्तविक योग्यता समाप्त नहीं होती।
खाल ओढ़ाने से सिंह, सियार सिंह नहीं हो जाता
अर्थ: बाहरी रूप बदलने से वास्तविक गुण नहीं बदलते।
खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
अर्थ: असफल व्यक्ति अपनी झुँझलाहट दूसरों पर निकालता है।
खुदा की लाठी में आवाज़ नहीं होती
अर्थ: व्यक्ति को अपने कर्मों का फल कभी न कभी मिलता है।
खुदा देता है तो छप्पर फाड़कर देता है
अर्थ: भाग्य से बहुत अधिक प्राप्त होना।
खुशामद से ही आमद है
अर्थ: कई बार खुशामद से काम आसानी से निकल जाता है।
ग से शुरू होने वाली कहावतें
गंगा गए तो गंगादास, यमुना गए तो यमुनादास
अर्थ: परिस्थितियों के अनुसार बार-बार अपना पक्ष बदलना।
गंजेड़ी यार किसके, दम लगाया खिसके
अर्थ: स्वार्थी व्यक्ति अपना काम निकलते ही दूर हो जाता है।
गधा धोने से बछड़ा नहीं हो जाता
अर्थ: केवल बाहरी परिवर्तन से स्वभाव या गुण नहीं बदलते।
गई माँगने पूत, खो आई भरतार
अर्थ: थोड़े लाभ के लिए बड़ा नुकसान कर लेना।
गर्व का सिर नीचा
अर्थ: घमंडी व्यक्ति का अंततः घमंड टूट जाता है।
गरीब की लुगाई सबकी भौजाई
अर्थ: कमजोर व्यक्ति का हर कोई लाभ उठाना चाहता है।
गवाह चुस्त, मुद्दई सुस्त
अर्थ: जिसका काम हो वही आलस करे और दूसरे अधिक सक्रिय हों।
गाँठ का पूरा, आँख का अंधा
अर्थ: धनवान लेकिन समझ की कमी वाला व्यक्ति।
गीदड़ की मौत आती है तो वह गाँव की ओर भागता है
अर्थ: विपत्ति के समय व्यक्ति की बुद्धि ठीक से काम नहीं करती।
गुड़ खाए, गुलगुलों से परहेज
अर्थ: मुख्य काम करके उसके छोटे या संबंधित हिस्से से बचने का दिखावा करना।
गुड़ न दें, पर गुड़-सी बात तो करें
अर्थ: कुछ देने में समर्थ न हों तो कम से कम मीठे शब्द बोलें।
गुरु गुड़ ही रहे, चेले शक्कर हो गए
अर्थ: शिष्य अपने गुरु से भी आगे निकल जाए।
घ से शुरू होने वाली कहावतें
घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध
अर्थ: अपने घर में व्यक्ति की कद्र कम और बाहर अधिक होती है।
घर का भेदी लंका ढाए
अर्थ: अंदरूनी व्यक्ति के विश्वासघात से बड़ा नुकसान हो सकता है।
घर की मुर्गी दाल बराबर
अर्थ: अपनी चीज या अपने व्यक्ति की कद्र कम होना।
घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने
अर्थ: साधन न होने पर भी बड़े दिखावे करना।
घायल की गति घायल जाने
अर्थ: जिस व्यक्ति ने स्वयं कष्ट सहा हो वही दूसरे के कष्ट को अच्छी तरह समझता है।
घोड़ा घास से दोस्ती करेगा तो खाएगा क्या?
अर्थ: अपने व्यवसाय या हित में अत्यधिक रियायत करना उचित नहीं।
घोड़े को लात, आदमी को बात
अर्थ: व्यक्ति या परिस्थिति के स्वभाव के अनुसार व्यवहार करना चाहिए।
च से शुरू होने वाली कहावतें
चने के साथ घुन भी पिसता है
अर्थ: दोषी के साथ निर्दोष को भी दंड मिल जाना।
चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए
अर्थ: अत्यधिक कंजूस व्यक्ति।
चलती का नाम गाड़ी
अर्थ: काम चलता रहना ही महत्वपूर्ण है।
चार दिन की चाँदनी, फिर अँधेरी रात
अर्थ: सुख या वैभव हमेशा नहीं रहता।
चिकने घड़े पर पानी नहीं ठहरता
अर्थ: निर्लज्ज व्यक्ति पर किसी बात का असर नहीं होता।
चिराग तले अँधेरा
अर्थ: पास की वस्तु या व्यक्ति की कमी दिखाई न देना।
चोर-चोर मौसेरे भाई
अर्थ: समान स्वभाव वाले बुरे लोग आपस में मिल जाते हैं।
चोरी और सीनाजोरी
अर्थ: गलत काम करने के बाद भी अकड़ दिखाना।
चौबे गए छब्बे बनने, दूबे ही रह गए
अर्थ: अधिक लाभ के लालच में अपना वर्तमान लाभ भी खो देना।
चट मँगनी, पट ब्याह
अर्थ: बहुत जल्दी काम पूरा हो जाना।
ज से शुरू होने वाली कहावतें
जैसा करोगे, वैसा भरोगे
अर्थ: मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार परिणाम मिलता है।
जैसा बोओगे, वैसा काटोगे
अर्थ: जैसा कर्म किया जाएगा, वैसा ही फल मिलेगा।
जैसा राजा, वैसी प्रजा
अर्थ: शासक के गुण-दोषों का प्रभाव प्रजा पर भी पड़ता है।
जैसी करनी, वैसी भरनी
अर्थ: कर्म के अनुसार ही फल मिलता है।
जो गरजते हैं, वे बरसते नहीं
अर्थ: अधिक डींग हाँकने वाले लोग अक्सर काम कम करते हैं।
जो गुड़ खाए, सो कान छिदाए
अर्थ: लाभ पाने वाले को उससे जुड़ी कठिनाई भी सहनी पड़ती है।
जो तोको काँटा बुवे, ताहि बोइ तू फूल
अर्थ: बुराई का बदला भी भलाई से देना चाहिए।
जो हाँडी में होगा, वही थाली में आएगा
अर्थ: मन में छिपी बात किसी न किसी रूप में प्रकट हो जाती है।
जहाँ चाह, वहाँ राह
अर्थ: दृढ़ इच्छा और प्रयास से रास्ता निकल आता है।
जहाँ चार बर्तन होंगे, वहाँ खटकेंगे भी
अर्थ: जहाँ कई लोग साथ रहते हैं, वहाँ मतभेद होना स्वाभाविक है।
जहाँ गुड़ होगा, वहीं मक्खियाँ होंगी
अर्थ: धन या लाभ के स्थान पर स्वार्थी लोग अपने आप पहुँच जाते हैं।
जहाँ फूल, वहाँ काँटा
अर्थ: अच्छाई के साथ कुछ कठिनाइयाँ भी होती हैं।
जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि
अर्थ: कवि की कल्पना की पहुँच बहुत व्यापक होती है।
जाके पैर न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई
अर्थ: जिसने स्वयं कष्ट नहीं सहा, वह दूसरे के दर्द को पूरी तरह नहीं समझ सकता।
जागेगा सो पावेगा, सोवेगा सो खोएगा
अर्थ: जो सतर्क और प्रयत्नशील रहता है वही लाभ प्राप्त करता है।
जितनी चादर हो, उतने ही पैर पसारो
अर्थ: अपनी आय के अनुसार खर्च करना चाहिए।
जितने मुँह, उतनी बातें
अर्थ: अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय होती है।
जिस थाली में खाना, उसी में छेद करना
अर्थ: जिससे लाभ मिला उसी का अहित करना।
जिसका काम, उसी को साजे
अर्थ: जिस काम का अनुभव हो, वही उसे अच्छी तरह कर सकता है।
जिसकी लाठी, उसकी भैंस
अर्थ: शक्तिशाली व्यक्ति का अधिकार अधिक माना जाता है।
छोटा मुँह, बड़ी बात
अर्थ: अपनी योग्यता या स्थिति से बढ़कर बात करना।
जंगल में मोर नाचा, किसने देखा
अर्थ: जहाँ कद्र करने वाला न हो वहाँ योग्यता का प्रदर्शन व्यर्थ है।
जड़ काटते जाएँ, पानी देते जाएँ
अर्थ: ऊपर से मित्रता दिखाना लेकिन भीतर से नुकसान करना।
ट, ठ और ड से संबंधित कहावतें
टके का सब खेल है
अर्थ: धन का जीवन में बहुत प्रभाव होता है।
ठंडा करके खाओ
अर्थ: धैर्य और शांति से काम लेना चाहिए।
ठोकर लगे तब आँख खुले
अर्थ: अनुभव से ही वास्तविक समझ आती है।
डूबते को तिनके का सहारा
अर्थ: विपत्ति में छोटी सहायता भी बहुत बड़ी लगती है।
ढाक के तीन पात
अर्थ: बहुत प्रयास के बाद भी स्थिति में कोई परिवर्तन न होना।
ढोल के भीतर पोल
अर्थ: बाहर से दिखावटी लेकिन अंदर से खोखला होना।
त से शुरू होने वाली कहावतें
ताली दोनों हाथों से बजती है
अर्थ: विवाद या झगड़े में सामान्यतः दोनों पक्षों की भूमिका होती है।
तीन में न तेरह में
अर्थ: किसी पक्ष में शामिल न होना।
तेरी करनी तेरे आगे, मेरी करनी मेरे आगे
अर्थ: प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल स्वयं भुगतना पड़ता है।
तुम्हारे मुँह में घी-शक्कर
अर्थ: किसी शुभ बात पर शुभकामना देना।
तू डाल-डाल, मैं पात-पात
अर्थ: चालाक व्यक्ति का सामना उसी प्रकार की चतुराई से करना।
तेल तिलों से ही निकलता है
अर्थ: प्राप्ति उसी स्रोत से होती है जहाँ सामर्थ्य मौजूद हो।
तेल देखो, तेल की धार देखो
अर्थ: जल्दबाजी न करके परिस्थिति को देखते हुए धैर्य रखना।
द से शुरू होने वाली कहावतें
दूध का दूध, पानी का पानी
अर्थ: सही और गलत का स्पष्ट निर्णय होना।
दूध पिलाकर साँप पोसना
अर्थ: शत्रु का उपकार करके उसे शक्तिशाली बनाना।
दूर के ढोल सुहावने
अर्थ: दूर की चीजें अक्सर वास्तविकता से अधिक अच्छी लगती हैं।
दूसरे की पत्तल में लंबा-लंबा भात
अर्थ: दूसरे की वस्तु अपनी वस्तु से अधिक अच्छी लगती है।
दोनों हाथों में लड्डू
अर्थ: हर तरफ से लाभ होना।
दो लड़े, तीसरा ले उड़े
अर्थ: दो व्यक्तियों के विवाद का लाभ किसी तीसरे को मिलना।
धोबी का गधा, घर का न घाट का
अर्थ: जो व्यक्ति कहीं भी उचित स्थान न बना पाए।
धूप में बाल सफेद नहीं किए हैं
अर्थ: बहुत अनुभव होना।
धोबी पर बस न चला तो गधे के कान उमेठे
अर्थ: शक्तिशाली व्यक्ति पर क्रोध न निकाल पाने पर कमजोर पर निकालना।
न से शुरू होने वाली कहावतें
न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी
अर्थ: समस्या के मूल कारण को समाप्त कर देने पर समस्या भी समाप्त हो जाती है।
न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी
अर्थ: ऐसी असंभव शर्त लगाना जिससे काम ही न हो सके।
नाच न जाने, आँगन टेढ़ा
अर्थ: अपनी कमी का दोष दूसरों या परिस्थितियों पर डालना।
नानी के आगे ननिहाल की बातें
अर्थ: जानकार व्यक्ति को उसी विषय की जानकारी देना।
नाम बड़े, दर्शन छोटे
अर्थ: नाम या प्रसिद्धि बड़ी लेकिन वास्तविक योग्यता कम होना।
नाक कटी, पर घी तो चाटा
अर्थ: लाभ के लिए निर्लज्ज होकर भी काम कर लेना।
नकटा बूचा सबसे ऊँचा
अर्थ: निर्लज्ज व्यक्ति अपनी कमी की परवाह नहीं करता।
नक्कारखाने में तूती की आवाज
अर्थ: बड़ी भीड़ या प्रभावशाली लोगों के बीच छोटी आवाज का महत्व न होना।
नया नौ दिन, पुराना सौ दिन
अर्थ: नई चीज का आकर्षण थोड़े समय का होता है, पुरानी चीज का अनुभव अधिक उपयोगी हो सकता है।
नीम हकीम खतरा-ए-जान
अर्थ: अधूरे ज्ञान वाले व्यक्ति से काम करवाना नुकसानदायक हो सकता है।
नौ दिन चले, अढ़ाई कोस
अर्थ: बहुत धीमी गति से काम करना।
नौ नकद, न तेरह उधार
अर्थ: नकद लेन-देन को उधार से अधिक सुरक्षित समझना।
नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली
अर्थ: बहुत कुकर्म करने के बाद अंत में धार्मिक या भला बनने का दिखावा करना।
प से शुरू होने वाली कहावतें
पाँचों उँगलियाँ बराबर नहीं होतीं
अर्थ: सभी व्यक्ति एक जैसे नहीं होते।
पाँचों उँगलियाँ घी में
अर्थ: चारों ओर से लाभ होना।
पानी केरा बुलबुला, अस मानुस की जात
अर्थ: मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है।
पाप का घड़ा भर जाता है
अर्थ: अत्यधिक पाप या गलत कार्यों का अंत विनाश में होता है।
पीर, बावर्ची, भिश्ती, खर
अर्थ: एक ही व्यक्ति से अनेक प्रकार के काम करवाना।
पूत के पाँव पालने में पहचाने जाते हैं
अर्थ: बचपन के लक्षणों से भविष्य की क्षमता का अनुमान लगाया जा सकता है।
पूत सपूत तो का धन संचय, पूत कपूत तो का धन संचय
अर्थ: योग्य संतान स्वयं कमा लेती है और अयोग्य संतान संचित धन भी नष्ट कर सकती है।
पेड़ फल से जाना जाता है
अर्थ: व्यक्ति या कार्य की पहचान उसके परिणाम से होती है।
प्यासा कुएँ के पास जाता है
अर्थ: आवश्यकता पूरी करने के लिए स्वयं प्रयास करना पड़ता है।
फिसल पड़े तो हर गंगे
अर्थ: अपनी गलती को बहाने से छिपाना।
पढ़े तो हैं, पर गुने नहीं
अर्थ: पढ़ा-लिखा होने पर भी व्यावहारिक अनुभव का अभाव होना।
पहले तोलो, फिर बोलो
अर्थ: बोलने से पहले सोच-विचार करना चाहिए।
ब से शुरू होने वाली कहावतें
बाँझ का जाने प्रसव की पीड़ा
अर्थ: जिस व्यक्ति ने स्वयं कष्ट नहीं सहा, वह उस कष्ट की वास्तविक पीड़ा नहीं समझ सकता।
बाड़ ही जब खेत को खाए तो रखवाली कौन करे
अर्थ: जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो सुरक्षा कौन करेगा।
बाप भला न भइया, सब से भला रुपइया
अर्थ: धन को अत्यधिक महत्व देने की मानसिकता पर व्यंग्य।
बाप न मारे मेढकी, बेटा तीरंदाज
अर्थ: छोटा व्यक्ति बड़े से भी आगे बढ़ जाने का दावा करे।
बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं
अर्थ: समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता; बुरे दिन भी बदलते हैं।
बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता
अर्थ: बीती हुई बात या पुराना उत्साह आसानी से वापस नहीं आता।
बिना रोए तो माँ भी दूध नहीं पिलाती
अर्थ: बिना प्रयास या माँग के कुछ प्राप्त नहीं होता।
बिल्ली और दूध की रखवाली?
अर्थ: जिस पर वस्तु हड़पने का संदेह हो, उसे उसकी रक्षा का काम नहीं देना चाहिए।
बिल्ली गई, चूहों की बन आई
अर्थ: डर या रोकने वाला हटते ही निर्बाध स्वतंत्रता मिल जाना।
बीमार की रात पहाड़ बराबर
अर्थ: कष्ट के समय थोड़ा समय भी बहुत लंबा लगता है।
बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है
अर्थ: शक्तिशाली व्यक्ति कमजोर व्यक्ति पर हावी हो जाता है।
बड़े बरतन की खुरचन भी बहुत है
अर्थ: जहाँ बहुत अधिक होता है वहाँ थोड़ा कम होने पर भी काफी बचा रहता है।
बड़े बोल का सिर नीचा
अर्थ: अधिक घमंड या बड़ी-बड़ी बातें करने वाले को अंततः लज्जित होना पड़ सकता है।
बनी के सब यार हैं
अर्थ: अच्छे समय में बहुत से लोग मित्र बन जाते हैं।
बरतन से बरतन खटकता ही है
अर्थ: साथ रहने वाले लोगों में कभी-कभी मतभेद होना स्वाभाविक है।
बहती गंगा में हाथ धोना
अर्थ: उपलब्ध अवसर का लाभ उठाना।
म से शुरू होने वाली कहावतें
मन के लड्डुओं से भूख नहीं मिटती
अर्थ: केवल इच्छा या कल्पना से आवश्यकता पूरी नहीं होती।
मन चंगा तो कठौती में गंगा
अर्थ: मन की पवित्रता सबसे महत्वपूर्ण है।
मरता क्या न करता
अर्थ: मजबूरी में व्यक्ति कठिन से कठिन काम भी करने को तैयार हो जाता है।
माँ का पेट कुम्हार का आवा
अर्थ: एक ही माता-पिता की संतानें भी स्वभाव और गुणों में अलग हो सकती हैं।
माँगे हरड़, दे बेहड़ा
अर्थ: माँगी गई वस्तु के बदले दूसरी वस्तु देना।
मान न मान, मैं तेरा मेहमान
अर्थ: बिना बुलाए या बिना अनुमति के किसी पर अधिकार जताना।
मानो तो देवता, नहीं तो पत्थर
अर्थ: सम्मान और विश्वास से किसी वस्तु का महत्व बढ़ जाता है।
माया बादल की छाया
अर्थ: धन-दौलत और सांसारिक सुख स्थायी नहीं हैं।
मार के आगे भूत भागे
अर्थ: कठोरता या दंड से डर पैदा होता है।
मियाँ की जूती, मियाँ का सिर
अर्थ: उसी व्यक्ति की वस्तु या उपाय से उसी पर प्रभाव डालना।
मुँह में राम, बगल में छुरी
अर्थ: ऊपर से मित्रता और भीतर से शत्रुता रखना।
मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक
अर्थ: किसी व्यक्ति की सोच या कार्यक्षेत्र बहुत सीमित होना।
मुफ्त की शराब काज़ी को भी हलाल
अर्थ: मुफ्त में मिलने वाली वस्तु को लेने के लिए लोग अपने सिद्धांत भी भूल जाते हैं।
र से शुरू होने वाली कहावतें
रस्सी जल गई, पर ऐंठन न गई
अर्थ: सब कुछ नष्ट हो जाने पर भी घमंड समाप्त न होना।
रानी रूठेगी तो अपना सुहाग लेगी
अर्थ: क्रोध या रूठने से अंततः अपना ही नुकसान होता है।
राम की माया, कहीं धूप कहीं छाया
अर्थ: संसार में कहीं सुख तो कहीं दुःख रहता है।
राम मिलाई जोड़ी, एक अंधा एक कोढ़ी
अर्थ: दो असंगत या समान रूप से अनुपयुक्त व्यक्तियों का मेल होना।
राम राम जपना, पराया माल अपना
अर्थ: बाहर से धार्मिक बनना लेकिन भीतर से बेईमान होना।
रोज कुआँ खोदना, रोज पानी पीना
अर्थ: रोज कमाना और रोज खर्च करना।
रंग लाती है हिना पत्थर पर घिसने के बाद
अर्थ: कठिन परिश्रम और कष्ट के बाद ही योग्यता निखरती है।
ल और व से संबंधित कहावतें
लातों के भूत बातों से नहीं मानते
अर्थ: कुछ लोगों पर केवल समझाने का नहीं, कठोरता का प्रभाव पड़ता है।
लाल गुदड़ी में नहीं छिपते
अर्थ: वास्तविक गुण और प्रतिभा अधिक समय तक छिपे नहीं रहते।
लड्डू कहे, मुँह मीठा नहीं होता
अर्थ: केवल कहने से काम पूरा नहीं होता।
लड़े सिपाही, नाम सरदार का
अर्थ: काम अधीनस्थ करें लेकिन श्रेय नेता को मिल जाए।
लोहा लोहे को काटता है
अर्थ: समान शक्ति या उपाय से ही शक्तिशाली विरोध का सामना किया जा सकता है।
वहम की दवा हकीम लुकमान के पास भी नहीं
अर्थ: अत्यधिक भ्रम या वहम को दूर करना कठिन होता है।
विष को सोने के बरतन में रखने से अमृत नहीं हो जाता
अर्थ: बाहरी सुंदरता से किसी वस्तु का वास्तविक स्वभाव नहीं बदलता।
स से शुरू होने वाली कहावतें
सच्चा जाए रोता, झूठा जाए हँसता
अर्थ: कई बार सच्चे व्यक्ति को कठिनाई और झूठे व्यक्ति को तत्काल लाभ मिलता है।
सबेरे का भूला शाम को घर आ जाए तो भूला नहीं कहलाता
अर्थ: गलती करने के बाद सही रास्ते पर लौट आने वाला व्यक्ति पूरी तरह दोषी नहीं माना जाता।
समरथ को नहिं दोष गोसाईं
अर्थ: शक्तिशाली व्यक्ति के दोषों को भी लोग आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं।
सहज पके सो मीठा होय
अर्थ: धैर्य से किया गया काम अधिक अच्छा परिणाम देता है।
साँच को आँच नहीं
अर्थ: सत्य बोलने वाले को अंततः डरने की आवश्यकता नहीं होती।
साँप के मुँह में छछूँदर
अर्थ: ऐसी दुविधा में पड़ना जिसमें न आगे बढ़ सकें, न पीछे हट सकें।
साँप निकलने पर लकीर पीटना
अर्थ: अवसर निकल जाने के बाद प्रयास करना व्यर्थ होता है।
सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता है
अर्थ: व्यक्ति अपनी परिस्थिति या अनुभव के कारण हर चीज को उसी दृष्टि से देखता है।
सावन हरे, भादों सूखे
अर्थ: परिस्थिति या समय के अनुसार स्थिति बदलती रहती है।
कुछ अन्य प्रसिद्ध हिन्दी कहावतें
बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद
अर्थ: अयोग्य व्यक्ति अच्छी वस्तु का महत्व नहीं समझ सकता।
बकरे की जान गई, खाने वाले को मज़ा न आया
अर्थ: बहुत कष्ट उठाने पर भी अपेक्षित लाभ या प्रशंसा न मिलना।
मछली के बच्चे को तैरना कौन सिखाता है
अर्थ: कुछ गुण स्वाभाविक रूप से प्राप्त होते हैं।
मजनू को लैला का कुत्ता भी प्यारा
अर्थ: प्रेम में प्रिय व्यक्ति से जुड़ी हर वस्तु अच्छी लगती है।
मतलबी यार किसके, दम लगाया खिसके
अर्थ: स्वार्थी व्यक्ति अपना काम निकलते ही दूर हो जाता है।
नीचे की साँस नीचे, ऊपर की साँस ऊपर
अर्थ: अत्यधिक घबराहट या भय की स्थिति।
नीचे से जड़ काटना, ऊपर से पानी देना
अर्थ: ऊपर से मित्रता दिखाकर भीतर से नुकसान करना।
पराया धन, लक्ष्मीनारायण
अर्थ: दूसरे के धन पर बिना चिंता के आनंद लेना।
पत्थर मोम नहीं होता
अर्थ: कठोर हृदय व्यक्ति को आसानी से दयालु बनाना कठिन है।
पंचों का कहना सिर माथे पर, परनाला वहीं रहेगा
अर्थ: दूसरों की बात मानने का दिखावा करते हुए अपनी इच्छा के अनुसार काम करना।
पंच कहे बिल्ली तो बिल्ली ही सही
अर्थ: बहुमत या प्रभावशाली लोगों की राय के सामने अपनी राय छोड़ देना।
पगड़ी रख, घी चख
अर्थ: मान-सम्मान बनाए रखते हुए जीवन का आनंद लेना।
पढ़े फारसी, बेचे तेल
अर्थ: योग्य या शिक्षित होने के बावजूद परिस्थितिवश छोटा काम करना।
पाँच पंच मिल कीजे काजा, हारे-जीते कुछ नहीं लाजा
अर्थ: मिल-जुलकर काम करने से सफलता या असफलता की जिम्मेदारी सामूहिक होती है।
रोगी से बैद
अर्थ: जिसने स्वयं कष्ट भोगा हो वह उस समस्या का अधिक अनुभवी होता है।
मुँह माँगी मौत नहीं मिलती
अर्थ: जीवन और मृत्यु मनुष्य की इच्छा के अनुसार नहीं चलते।
मोरी की ईंट चौबारे पर
अर्थ: छोटी या अनुपयुक्त वस्तु का बड़े काम में उपयोग करना।
माया से माया मिले, कर-कर लंबे हाथ
अर्थ: धनवान व्यक्ति के पास धन और अधिक आने की संभावना रहती है।
मार के आगे भूत भागे
अर्थ: कठोर दंड से डर पैदा होता है।
दुधारू गाय की लात सहनी पड़ती है
अर्थ: जिससे लाभ मिलता है, उसकी कुछ अप्रिय बातें भी सहनी पड़ती हैं।
दुनिया का मुँह किसने रोका है
अर्थ: लोगों की बातों को पूरी तरह रोकना संभव नहीं, इसलिए उनकी अनावश्यक परवाह नहीं करनी चाहिए।
दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम
अर्थ: निर्णय न लेने की स्थिति में दोनों अवसर हाथ से निकल सकते हैं।
देह धरे के दंड हैं
अर्थ: शरीर है तो जीवन में सुख-दुःख और कष्ट भी होंगे।
तुरत दान, महाकल्याण
अर्थ: अच्छे काम को अनावश्यक रूप से टालना नहीं चाहिए।
तख्त या तख्ता
अर्थ: लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरी तरह प्रयास करना।
जने-जने की लकड़ी, एक जने का बोझ
अर्थ: मिल-जुलकर काम करने से कठिन काम भी आसान हो जाता है।
जब तक साँस, तब तक आस
अर्थ: जीवन रहने तक आशा बनी रहती है।
जब तक जीना, तब तक सीना
अर्थ: जीवन भर व्यक्ति को कोई न कोई काम करते रहना पड़ता है।
जब चने थे दाँत न थे, जब दाँत हुए तब चने नहीं
अर्थ: कभी साधन होते हैं तो उनका उपयोग करने की क्षमता नहीं होती और कभी क्षमता होती है तो साधन नहीं होते।
जबरा मारे, रोने न दे
अर्थ: शक्तिशाली व्यक्ति का अत्याचार कमजोर व्यक्ति को सहना पड़ता है।
जबान को लगाम चाहिए
अर्थ: बोलने से पहले सोच-विचार करना चाहिए।
ज़बान ही हाथी चढ़ाए, ज़बान ही सिर कटाए
अर्थ: अच्छी वाणी सम्मान दिलाती है और कटु वाणी अपमान करा सकती है।
जल में रहकर मगर से बैर
अर्थ: जहाँ रहना हो वहाँ के शक्तिशाली व्यक्ति से अनावश्यक शत्रुता नहीं करनी चाहिए।
जस दूल्हा, तस बाराती
अर्थ: जैसा व्यक्ति होता है, उसके साथी भी प्रायः वैसे ही होते हैं।
चींटी की मौत आती है तो उसके पर निकल आते हैं
अर्थ: विनाश के समय व्यक्ति का विवेक नष्ट हो सकता है और वह जोखिम भरे काम करने लगता है।
चील के घोंसले में मांस कहाँ
अर्थ: जिस व्यक्ति के पास स्वयं साधन न हों, उससे बचत या संग्रह की अपेक्षा करना व्यर्थ है।
चुल्लू भर पानी में डूब मरना
अर्थ: बहुत अधिक शर्मिंदा होना।
चूहे का बच्चा बिल ही खोदता है
अर्थ: स्वभाव आसानी से नहीं बदलता।
चूहे के चाम से कहीं नगाड़े मढ़े जाते हैं
अर्थ: छोटी या अपर्याप्त वस्तु से बड़ा काम नहीं किया जा सकता।
चूहों की मौत, बिल्ली का खेल
अर्थ: किसी दूसरे की विपत्ति से किसी का मनोरंजन या लाभ होना।
चोर के पैर नहीं होते
अर्थ: दोषी व्यक्ति किसी न किसी प्रकार पकड़ा जाता है।
चोर चोरी से जाए, हेरा-फेरी से न जाए
अर्थ: बुरी आदत वाला व्यक्ति पूरी तरह अपनी आदत नहीं छोड़ पाता।
चोर को कहे चोरी कर और साह को कहे जागते रहो
अर्थ: दो पक्षों को अलग-अलग बातें कहकर उनके बीच विवाद पैदा करना।
गोद में बैठकर आँख में उँगली करना
अर्थ: किसी की भलाई पाकर उसी के साथ बुरा व्यवहार करना।
गोद में लड़का, शहर में ढिंढोरा
अर्थ: पास की वस्तु को न देखकर दूर खोजते फिरना।
घर आए कुत्ते को भी नहीं निकालते
अर्थ: घर आए अतिथि का सम्मान करना चाहिए।
घड़ी में तोला, घड़ी में माशा
अर्थ: जिसका विचार या मन बहुत जल्दी बदलता रहे।
घोड़े की दुम बढ़ेगी तो अपने ही मक्खियाँ उड़ाएगा
अर्थ: अपनी उन्नति का लाभ अंततः स्वयं को ही मिलता है।
खूँटे के बल बछड़ा कूदे
अर्थ: किसी शक्तिशाली व्यक्ति की शह पाकर कमजोर व्यक्ति अकड़ दिखाए।
खेत खाए गदहा, मार खाए जुलहा
अर्थ: अपराध कोई करे और सजा किसी दूसरे को मिले।
खेती अपन सेती
अर्थ: अपने महत्वपूर्ण काम पर स्वयं ध्यान देना चाहिए।
खेल खिलाड़ी का, पैसा मदारी का
अर्थ: मेहनत किसी की और लाभ किसी दूसरे का होना।
खोदा पहाड़, निकली चुहिया
अर्थ: बहुत प्रयास के बाद अपेक्षा से बहुत कम परिणाम मिलना।
गधा भी कहीं घोड़ा बन सकता है
अर्थ: केवल दिखावे से वास्तविक गुण नहीं बदलते।
कोई माल मस्त, कोई हाल मस्त
अर्थ: अलग-अलग लोग अपनी परिस्थितियों में अलग प्रकार से संतुष्ट रहते हैं।
कोठी वाला रोए, छप्पर वाला सोए
अर्थ: धनवान व्यक्ति की चिंता कभी-कभी गरीब व्यक्ति से अधिक हो सकती है।
कोयला होय न उजला, सौ मन साबुन लाई
अर्थ: मूल स्वभाव को केवल बाहरी उपायों से बदलना कठिन है।
कोयले की दलाली में मुँह काला
अर्थ: बुरे काम या बुरी संगति से बदनामी होना निश्चित है।
कौआ चला हंस की चाल, भूल गया अपनी भी चाल
अर्थ: दूसरों की नकल करने में व्यक्ति अपनी मौलिकता भी खो देता है।
क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा
अर्थ: अत्यंत तुच्छ या महत्वहीन होना।
न इधर के रहे, न उधर के रहे
अर्थ: दुविधा में पड़कर दोनों ओर से नुकसान उठाना।
न अंधे को न्योता देते, न दो जने आते
अर्थ: गलत निर्णय के कारण अपेक्षित परिणाम न मिलना।
नंगा क्या नहाएगा, क्या निचोड़ेगा
अर्थ: जिसके पास कुछ है ही नहीं, उसके पास खोने के लिए भी कुछ नहीं।
नंगा बड़ा परमेश्वर से
अर्थ: अत्यंत निर्लज्ज व्यक्ति किसी की परवाह नहीं करता।
नदी किनारे रूखड़ा, जब-तब होय विनाश
अर्थ: असुरक्षित स्थान पर रहने वाले को कभी भी संकट आ सकता है।
नमाज़ छुड़ाने गए थे, रोज़े गले पड़े
अर्थ: छोटी मुसीबत से बचने के प्रयास में बड़ी मुसीबत में पड़ जाना।
नाई की बरात में सब ही ठाकुर
अर्थ: जहाँ सभी स्वयं को प्रधान समझने लगें।
नानी क्वाँरी मर गई, नाती के नौ-नौ ब्याह
अर्थ: झूठी या बढ़ा-चढ़ाकर की गई बड़ाई।
नामी चोर मारा जाए, नामी शाह कमाए खाए
अर्थ: बदनामी से नुकसान और प्रतिष्ठा से लाभ होता है।
दीवार के भी कान होते हैं
अर्थ: गुप्त बात करते समय सावधान रहना चाहिए।
दूल्हा को पत्तल नहीं, बजाने वाले को थाल
अर्थ: काम में प्राथमिकताओं का उलट जाना या गलत व्यवस्था होना।
धनवंती को काँटा लगा, दौड़े लोग हजार
अर्थ: धनवान व्यक्ति की छोटी परेशानी में भी बहुत लोग सहायता के लिए पहुँच जाते हैं।
धन्ना सेठ के नाती बने हैं
अर्थ: अपने को बहुत धनवान समझना या दिखाना।
धर्म छोड़ धन कौन खाए
अर्थ: गलत या अधर्म से कमाया धन स्थायी सुख नहीं देता।
तबेले की बला बंदर के सिर
अर्थ: अपना दोष या परेशानी किसी दूसरे के सिर मढ़ देना।
तन को कपड़ा न पेट को रोटी
अर्थ: अत्यंत निर्धन होना।
तलवार का खेत हरा नहीं होता
अर्थ: हिंसा और अत्याचार से स्थायी सुख या समृद्धि नहीं मिलती।
तीन बुलाए, तेरह आए, दे दाल में पानी
अर्थ: अचानक अधिक लोग आ जाएँ तो उपलब्ध साधनों में ही व्यवस्था करनी पड़ती है।
तेल न मिठाई, चूल्हे धरी कड़ाही
अर्थ: बिना साधन के केवल दिखावा करना।
तेली का बैल, घर ही पचास कोस
अर्थ: लगातार एक ही सीमित काम करते रहने पर भी व्यक्ति आगे न बढ़ पाए।
झूठ के पाँव नहीं होते
अर्थ: झूठ अधिक समय तक टिक नहीं सकता।
झोपड़ी में रहें, महलों के ख्वाब देखें
अर्थ: अपनी क्षमता से बहुत अधिक की इच्छा करना।
जूठा खाए, मीठे के लालच
अर्थ: छोटे लाभ के लालच में अनुचित काम करना।
जैसे नागनाथ, वैसे साँपनाथ
अर्थ: दोनों विकल्प या व्यक्ति लगभग समान रूप से खराब होना।
ज्यों-ज्यों भीजे कामरी, त्यों-त्यों भारी होय
अर्थ: समस्या या जिम्मेदारी बढ़ती जाए तो उसका भार भी बढ़ता जाता है।
जहाँ देखे तवा-परात, वहाँ गुजारे सारी रात
अर्थ: जहाँ लाभ की संभावना दिखाई दे, वहीं स्वार्थी व्यक्ति टिक जाता है।
जहाँ मुर्गा नहीं होता, क्या वहाँ सवेरा नहीं होता?
अर्थ: किसी एक व्यक्ति के बिना भी काम चलता रहता है।
जादू वह जो सिर पर चढ़कर बोले
अर्थ: अत्यंत प्रभावशाली होना।
जान मारे बनिया, पहचान मारे चोर
अर्थ: स्वार्थी व्यक्ति पहचान और संबंधों का भी अपने लाभ के लिए उपयोग करता है।
जाए लाख, रहे साख
अर्थ: धन चला जाए तो भी प्रतिष्ठा बची रहनी चाहिए।
जितना गुड़ डालोगे, उतना ही मीठा होगा
अर्थ: जितना अधिक प्रयास या साधन लगाएँगे, परिणाम उतना ही अच्छा हो सकता है।
जिन खोजा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ
अर्थ: गहराई से प्रयास करने वाले को ही सफलता मिलती है।
जिसका खाइए, उसका गाइए
अर्थ: जिससे लाभ मिले, उसका पक्ष लेने की प्रवृत्ति।
जिसका जूता, उसी का सिर
अर्थ: किसी समस्या का समाधान उसी साधन से करना जिससे वह उत्पन्न हुई है।
जिसके हाथ डोई, उसका सब कोई
अर्थ: धनवान या प्रभावशाली व्यक्ति के बहुत से समर्थक और मित्र बन जाते हैं।
जिसको पिया चाहे, वही सुहागिन
अर्थ: समर्थ व्यक्ति जिसकी सहायता करना चाहे उसका कल्याण कर सकता है।
छलनी कहे सुई से, तेरे पेट में छेद
अर्थ: अपने बड़े दोषों को भूलकर दूसरे के छोटे दोष बताना।
छाज बोले तो बोले, छलनी भी बोले जिसमें हजार छेद
अर्थ: स्वयं बहुत दोषपूर्ण व्यक्ति का दूसरे के दोष निकालना।
छुरी खरबूजे पर गिरे या खरबूजा छुरी पर
अर्थ: दोनों ही स्थितियों में नुकसान होना।
छोटे मियाँ तो छोटे मियाँ, बड़े मियाँ सुभानअल्लाह
अर्थ: छोटे के दोषों से बड़े के दोष और भी अधिक होना।
चाँद को भी ग्रहण लगता है
अर्थ: अच्छे व्यक्ति पर भी कभी-कभी बुरा समय या बदनामी आ सकती है।
चाकरी में न करी क्या?
अर्थ: नौकरी में मालिक के निर्देशों का पालन करना पड़ता है।
चिकना मुँह, पेट खाली
अर्थ: बाहर से सुखी दिखाई देना लेकिन भीतर से परेशान होना।
चित भी मेरी, पट भी मेरी
अर्थ: हर परिस्थिति में अपना लाभ देखना।
चिराग में बत्ती और आँख में पट्टी
अर्थ: अवसर या समय का उचित उपयोग न करना।
गूदड़ में लाल नहीं छिपता
अर्थ: वास्तविक गुण और प्रतिभा छिपाए नहीं छिपते।
गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है
अर्थ: दोषी के साथ निर्दोष को भी नुकसान उठाना पड़ता है।
घड़ी भर में घर जले, अढ़ाई घड़ी भद्रा
अर्थ: समय की पहचान किए बिना काम करना उचित नहीं।
घी गिरी खिचड़ी में
अर्थ: संयोग से किसी काम में लाभ हो जाना।
घी सँवारे काम, बड़ी बहू का नाम
अर्थ: पर्याप्त साधन मिलने पर काम करने वाले को भी श्रेय मिलता है।
घर खीर तो बाहर खीर
अर्थ: घर में समृद्धि हो तो बाहर भी सम्मान और सुविधा मिलती है।
गाँठ का पूरा, आँख का अंधा
अर्थ: धन तो बहुत हो लेकिन समझ की कमी हो।
गरीबी तेरे तीन नाम—झूठा, पाजी, बेईमान
अर्थ: समाज में गरीब व्यक्ति को कई बार अनुचित रूप से अपमान और दोष का सामना करना पड़ता है।
गरीबों ने रोज़े रखे तो दिन ही बड़े हो गए
अर्थ: गरीब या दुर्भाग्यशाली व्यक्ति की कठिनाइयाँ और बढ़ती हुई लगती हैं।
गुड़ दिए मरे तो ज़हर क्यों दें
अर्थ: प्रेम और सरलता से काम निकल सकता हो तो कठोरता क्यों करें।
का वर्षा जब कृषि सुखाने
अर्थ: अवसर निकल जाने के बाद की गई सहायता या वर्षा भी व्यर्थ हो जाती है।
कागज़ की नाव नहीं चलती
अर्थ: अव्यावहारिक उपाय लंबे समय तक सफल नहीं हो सकता।
काजल की कोठरी में कैसहु सयानो जाय, एक लीक काजल की लागिहै सो लागिहै
अर्थ: बुरी संगति में रहने पर थोड़ा-बहुत कलंक लग ही सकता है।
काज़ी जी दुबले क्यों? शहर के अंदेशे से
अर्थ: दूसरों की चिंता करते-करते स्वयं परेशान होना।
करे दाढ़ीवाला, पकड़ा जाए मूँछोंवाला
अर्थ: अपराध किसी का हो और दोष किसी कमजोर व्यक्ति पर लगा दिया जाए।
कर लिया सो काम, भज लिया सो राम
अर्थ: काम को अधूरा छोड़ने के बजाय उसे पूरा करना चाहिए।
काली के ब्याह को सौ जोखिम
अर्थ: एक कमी के कारण अनेक प्रकार की आलोचना होने लगती है।
किया चाहे चाकरी, राखा चाहे मान
अर्थ: नौकरी और पूर्ण स्वतंत्रता दोनों को एक साथ बनाए रखना कठिन हो सकता है।
करे कोई, भरे कोई
अर्थ: एक की गलती का परिणाम दूसरे को भुगतना पड़े।
कुंजड़ा अपने बेरों को खट्टा नहीं बताता
अर्थ: कोई व्यक्ति अपनी वस्तु की बुराई आसानी से नहीं करता।
कुत्ता भी दुम हिलाकर बैठता है
अर्थ: व्यक्ति या जीव अपने अनुकूल स्थिति बनाने के बाद ही सहज होता है।
जीवन और अनुभव से जुड़ी कहावतें
बिंध गया सो मोती, रह गया सो सीप
अर्थ: जो वस्तु उपयोगी सिद्ध हो जाए वही मूल्यवान मानी जाती है।
बिच्छू का मंत्र न जाने, साँप के बिल में हाथ डाले
अर्थ: बिना ज्ञान के जोखिम भरा काम करना।
बासी बचे न कुत्ता खाए
अर्थ: आवश्यकता के अनुसार ही वस्तु तैयार करनी चाहिए।
बुढ़ापे में मिट्टी खराब
अर्थ: वृद्धावस्था में अनुचित आचरण से प्रतिष्ठा खराब होना।
लिखे ईसा, पढ़े मूसा
अर्थ: बहुत अस्पष्ट या खराब लिखावट।
लेना एक, न देना दो
अर्थ: किसी प्रकार का संबंध या लेन-देन न रखना।
सकल तीर्थ कर आई, तुमड़िया तो न गई तिताई
अर्थ: बाहरी परिस्थितियाँ बदलने पर भी स्वभाव आसानी से नहीं बदलता।
सखी से सूम भला, जो तुरत दे जवाब
अर्थ: स्पष्ट इंकार करना उस व्यक्ति से बेहतर है जो आशा में लटकाए रखे।
सारी उम्र भाड़ ही झोंका
अर्थ: जीवन भर काम करने पर भी कोई उपयोगी सीख या उन्नति न होना।
सारी देग में एक ही चावल टटोला जाता है
अर्थ: पूरी वस्तु की जाँच के लिए थोड़ा नमूना पर्याप्त हो सकता है।
मरी बछिया बाभन के सिर
अर्थ: बिना उपयोग के किसी वस्तु का दान या जिम्मेदारी किसी और पर डाल देना।
मलयागिरि की भीलनी चंदन देत जलाय
अर्थ: बहुत अधिक निकटता होने पर मूल्यवान वस्तु की भी कद्र कम हो सकती है।
माया से माया मिले
अर्थ: धन से धन कमाने का अवसर बढ़ता है।
मिस्सों से पेट भरता है, किस्सों से नहीं
अर्थ: केवल बातों से जीवन की वास्तविक आवश्यकताएँ पूरी नहीं होतीं।
मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू-थू
अर्थ: अपने लाभ के अनुसार अच्छी बात स्वीकार करना और बुरी बात को नकार देना।
पिया गए परदेश, अब डर काहे का
अर्थ: निगरानी करने वाला न हो तो मनमानी करने की प्रवृत्ति।
रोगी से बैद
अर्थ: भुक्तभोगी व्यक्ति अपने अनुभव के कारण समस्या को अच्छी तरह समझता है।
हिन्दी कहावतों का महत्व
हिन्दी कहावतें केवल बोलचाल की भाषा को रोचक बनाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें पीढ़ियों का अनुभव संचित है। इनका प्रयोग किसी विचार को कम शब्दों में प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
कहावतों में हमें परिश्रम, धैर्य, सावधानी, समय का महत्व, संगति, व्यवहार, धन, परिवार, अनुभव और मानवीय स्वभाव जैसे अनेक विषयों पर जीवनोपयोगी बातें मिलती हैं।
इसी कारण हिन्दी कहावतें आज भी दैनिक बातचीत, साहित्य, भाषण, लेखन और शिक्षा में उपयोगी हैं।
निज भाषा का महत्व
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिनु निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल॥
अँग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन।
पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन॥
भावार्थ: अपनी भाषा का ज्ञान व्यक्ति और समाज की उन्नति का महत्वपूर्ण आधार है। दूसरी भाषाओं का ज्ञान उपयोगी है, लेकिन अपनी मातृभाषा और अपनी भाषाई विरासत को समझना भी उतना ही आवश्यक है।
निष्कर्ष
हिन्दी कहावतें और लोकोक्तियाँ हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव की अनमोल धरोहर हैं। इनमें कम शब्दों में जीवन की बड़ी-बड़ी सीख छिपी होती है। समय बदलने के बावजूद इन कहावतों का महत्व समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि मानव जीवन की अनेक परिस्थितियाँ आज भी वैसी ही हैं।
यदि आपको यह हिन्दी कहावतें तथा लोकोक्तियाँ का संग्रह उपयोगी लगा हो, तो इसे विद्यार्थियों, हिंदी प्रेमियों और अपने मित्रों के साथ साझा कर सकते हैं।
आपके इस ब्लॉग में काफी पुराणी और प्रभावी लोकोक्तिय पड़ने को मिली है | जो हमारे आम जीवन में काफी सुनने को मिलती है | पुराने ज़माने में बड़े बुजुर्गो द्वारा कही गई बात वाकई में काफी कारगर साबित होती है | Talented India News
ReplyDeleteइस से ज्यादा घटिया कलर नहीं मिला website का। आँखों में चुभ रहा है। 2 मिनट भी नहीं पड़ पाया ।।
ReplyDeleteब्लॉक ज्ञानवर्धक है कृपा करके है है क्षत्रिय वंश परशुराम के समय हजार हाथों वालों के वंश के बारे में बताएं उनकी पूरी हिस्ट्री बताएं उनका वंश अब कहां है कौन-कौन सी जातियों में परिवर्तित हो गए हैं वह है है वंश क्षत्रिय थे लेकिन अब उनको क्षत्रिय से विमुख कर दिया गया है हरबंस कलचुरी क्षत्रिय थे यह आज भी प्रमाण है विष्णु पुराण में
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