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संस्कृति -MEN With a Noble Mission

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A new age Bala Gangadhara Tilak at Hyderabad. He spends his own pension money filling potholes across the streets, that too doing it personally. Hats off to him, and shame on the local administration. {Paper Cutout Source: Tarun Reddy} This Frenchman fixes potholed Mysore roads Kevin Mendonsa , TNN   Dec 14, 2012, 06.17AM IST MYSORE: It's not the government's job alone to fix bad roads, even individuals have a responsibility, says Francis Bobo. The 61-year-old Frenchman would rightly know for he has been quietly repairing any pothole or bad road he comes across in Mysore in whatever way he can. Francis even keeps a repair kit, including a spade and a few gunny bags permanently in his four-wheeler. Whenever he finds debris in his farmland or anywhere else, he fills it up on roads which are in bad shape. It's a temporary fix to the problem but at least covers a gaping hole. Source -  http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-12-...

'गर्भपात'

गर्भपात करवानागलत माना गया है,कृपया इस लेख को अवश्य पढ़े और अगर इसे पढ़ कर आपके दिल की धड़कने बढ़ जाये तो शेयर अवश्य करे | गर्भस्थ बच्ची की हत्या का आँखोँ देखा विवरण... अमेरिका मेँ सन 1984 मेँ एक सम्मेलन हुआ था 'नेशनल राइट्स टू लाईफ कन्वैन्शन' । इस सम्मेलन के एक प्रतिनिधि ने डॉ॰ बर्नार्ड नेथेनसन के द्वारा गर्भपातकी बनायी गयी एक अल्ट्रासाउण्ड फिल्म 'साइलेण्ट स्क्रीम' (गूँगी चीख) का जो विवरणदिया था, वह इस प्रकार है- ' गर्भ की वह मासूम बच्ची अभी दस सप्ताह की थी व काफी चुस्त थी । हम उसे अपनी माँ की कोख मेँ खेलते, करवट बदलते व अंगूठा चूसते हुए देख रहे थे । उसके दिल की धड़कनोँ को भी हम देख पा रहे थेऔर वह उस समय 120 की साधारण गति से धड़करहा था । सब कुछ बिलकुल सामान्य था; किँतु जैसे ही पहले औजार (सक्सन पम्प) ने गर्भाशय की दीवार को छुआ, वहमासूम बच्ची डर से एकदम घूमकर सिकुड़ गयी और उसके दिल की धड़कन काफी बढ़ गयी । हलाँकिअभी तक किसी औजार ने बच्ची को छुआ तक भी नहीँ था, लेकिन उसे अनुभव हो गया था कि कोई चीज उसके आरामगाह, उसके सुरक्षित क्षेत्र पर हमला करने का प्रयत्न कर रही है ।...

STORY - inspirational encounter with a rickshaw driver in Mumbai:

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Suvendu Roy of Titan Industries, who shares his inspirational encounter with a rickshaw driver in Mumbai: … One Sunday, my wife, kid, and I had to travel to Andheri from Bandra. When I waved at a passing auto rickshaw, little did I expect that this ride would be any different… I looked in front and there was a small TV. The driver had put on the Doordarshan channel. My wife and I looked at each other with disbelief and amusement. In front of me was a small first-aid box with cotton, dettol and some medicines. This was enough for me to realize that I was in a special vehicle. Then I looked round again, and discovered more – there was a radio, fire extinguisher, wall clock, calendar, and pictures and symbols of all faiths - from Islam and Christianity to Buddhism, Hinduism and Sikhism. There were also pictures of the heroes of 26/11- Kamte, Salaskar, Karkare and Unnikrishnan. I realized that not only my vehicle, but also my driver was special. I started chatting with him and the initial...

April Fools' Day: Origin and History

April Fools' Day: Origin and History The uncertain origins of a foolish day by David Johnson and Shmuel Ross April Fools' Day, sometimes called All Fools' Day, is one of the most light-hearted days of the year. Its origins are uncertain. Some see it as a celebration related to the turn of the seasons, while others believe it stems from the adoption of a new  calendar . New Year's Day Moves Ancient cultures , including those of the Romans and  Hindus , celebrated New Year's Day on or around April 1. It closely follows the  vernal equinox  (March 20th or March 21st.) In medieval times, much of Europe celebrated March 25, the Feast of Annunciation, as the beginning of the new year. In 1582,  Pope Gregory XIII  ordered a new calendar (the  Gregorian Calendar ) to replace the old Julian Calendar. The new calendar called for New Year's Day to be celebrated Jan. 1. That year,  France  adopted the reformed calendar and shifted Ne...

हनुमान चालीसा«««««««

हनुमान चालीसा««««««« इसमें 40 चौपाइयां हैं । सभी चालीसा इसी के बाद भिन्न भिन्न देवी  देवताओं के नाम पर रचे गये हैं ; क्योंकि इसकी गुणवत्ता और व्यापक प्रचार प्रसार ने अन्यान्य उपासकों  एवं कवियों में चालीसा निर्माण की ललक जगा दी । अस्तु । हम यहां यह विचार कर रहे हैं कि परम हनुमद्भक्त पूज्य गोस्वामी  तुलसीदास जी महाराज ने इसमें 40 चौपाइयां ही क्यों रचीं ? इससे अधिक या कम क्यों नहीं ? नाम तो चौपाइयों के आधार पर हनुमान पचासा , हनुमानपैंतीसा आदि भी  रख सकते थे । 40 संख्या को इतना अधिक महत्त्व देना निश्चित ही साभिप्राय है । कुछ महीने पूर्व ब्यावर में एक स्थान पर सवालाख हनुमान चालीसा का  पाठ और श्रीमद्वाल्मीकि रामायण की कथा का आयोजन 9 दिनों के लिए  रखा गया था । वहां हनुमान जी को कथा सुनाने का सौभाग्य मुझे ही मिला था । आयोजक ने मुझे चालीसा का महत्त्व बतलाने का आग्रह किया । उस  समय मारुति की कृपा से जो तथ्य प्रतीत हुए । उसे लिपिबद्ध कर रहा हूं । विद्वज्जन इस पर अपना परामर्श "सिद्धस्य गतिश्चिन्तनीया" उक्ति को समक्ष रखकर अवश्य दें । मानवजीवन का परम...

रस-प्रयोग:किस रोग में कौन सा रस लेंगे?

रस-प्रयोग:: किस रोग में कौन सा रस लेंगे? भूख लगाने के हेतुः प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। खाने से पहले अदरक का कचूमर सैंधव  नमक  के साथ लें। रक्तशुद्धिः नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस। दमाः लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का  सूप और बकरी का शुद्ध दूध लाभदायक है। घी, तेल, मक्खन वर्जित है। उच्च रक्तचापः गाजर, अंगूर, मोसम्मी और ज्वारों का रस। मानसिक तथा शारीरिक आराम आवश्यक है। निम्न रक्तचापः मीठे फलों का रस लें, किन्तु खट्टे फलों का उपयोग न करें। अंगूर और मोसम्मी का रस  अथवा दूध भी लाभदायक है। पीलियाः अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्मी। अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किसमिस का पानी।  गन्ने को चूसकर उसका रस पियें। केले में 1.5 ग्राम चूना लगाकर कुछ समय रखकर फिर खायें। मुहाँसों के दागः गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस। संधिवातः लहसुन, अदरक, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ  के ज्वारे। एसीडिटीः गाजर, पालक,...

संस्कृति - सनातन धर्म के अनुसार भोजन ग्रहण करने के कुछ नियम है

भोजन सम्बन्धी कुछ नियम १ पांच अंगो ( दो हाथ , २ पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे ! २. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है ! ३. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है ! ४. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए ! ५. दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है ! ६ . पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है ! ७. शैय्या पर , हाथ पर रख कर , टूटे फूटे वर्तनो में भोजन नहीं करना चाहिए ! ८. मल मूत्र का वेग होने पर , कलह के माहौल में , अधिक शोर में , पीपल , वट वृक्ष के नीचे , भोजन नहीं  करना चाहिए ! ९ परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए ! १०. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता की स्तुति कर के , उनका धन्यवाद देते हुए , तथा सभी  भूखो को भोजन प्राप्त हो इस्वर से ऐसी प्राथना करके भोजन करना चाहिए ! ११. भोजन बनने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से , मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाये और  सबसे पहले ३ रोटिया अलग निकाल कर ( गाय , कुत्ता , और कौवे हेतु ) फिर अग्नि देव का भोग लगा कर...