भारतीय संस्कृति और विदेशी विचारधारा में अन्तर
डार्विन ने कहा : दूसरों को खाकर जियो।
हक्सले ने कहा : जियो और जीने दो।
परन्तु मेरे वेदों ने कहा : सबको सुखी बनाने के लिये जियो ।
सर्वे भवन्तु सुखिन: ।
बाइबिल ने कहा : जिसका काम उसी का दाम।
कुरान ने कहा : जहान खुदा का, जिहाद इन्सान करे।
किन्तु मेरे वेदों ने कहा : मेहनत इन्सान की, सम्पत्ति भगवान की यानी
तेन त्यक्तेन भुजींथा।
बाइबिल ने कहा : ईसाई बनो
कुरान ने कहा : मुसलमान बनो (कुरान म.सि.2)
वेदों ने कहा : मनुष्य बन जाओ मनुर्भव।
बाइबिल ने कहा : पढाई नौकरी के लिये।
कुरान ने कहा : पढाई कुरान के लिये।
किन्तु मेरे वेदों ने कहा : पढाई केवल नैतिकता, ज्ञान और नम्रता के लिये।
विद्या ददाति विनयम।
अरस्तू ने कहा : राजनीति शासन के लिये।
कुरान ने कहा : शासन इस्लाम के प्रचार के लिये।
किन्तु मेरे वेदों ने कहा : राजनीति की अपेक्षा लोकनीति, शासन की अपेक्षा अनुशासन, तानाशाही की जगह संयम और अधिकार के स्थान पर कर्तव्य पालन करें।
ईसाइयों ने कहा : परमाणु हथियार नागासाकी और हिरोशिमा जैसे शहरों को नष्ट करने के लिये।
मुस्लिम आतंकियों ने कहा :
परमाणु हथियार मिल जायें तो काफिरों को मिटाने के लिये।
मेरे वेदों ने कहा : सम्पूर्ण विज्ञान ही जनकल्याण के लिये।
यथेमा वाचंकल्याण।
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