संवत् वर्ष के प्रथम मास, चैत्र के आरम्भ से क्यों नहीं आरम्भ होता है ?

संवत् के सम्बन्ध में एक प्रश्न जो सामान्यतः बारम्बार उठता रहता है कि संवत् वर्ष के प्रथम मास, चैत्र के आरम्भ से क्यों नहीं आरम्भ होता है और इस माह के कृष्ण-पक्ष (उत्तर-पक्ष) की प्रतिपदा से ही क्यों होता है। इस सन्दर्भ में निम्न उल्लेखनीय है:-
१) नव-संवत् चन्द्रमा की उत्तरोत्तर बढ़ती कलाओं (कृष्ण-पक्ष) के प्रकाश के साथ ही आरम्भ होना श्रेयस्कर है न कि कृष्ण-पक्ष के उत्तरोत्तर बढ़ते तमस के साथ।
२) पुराणों में मान्यता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना चैत्र की प्रतिपदा को ही की थी।
३) सूर्य इसी तिथि से राशिचक्र की प्रथम राशि 'मेष' में प्रवेश करते हुए राशिचक्र की यात्रा पुनः आरम्भ करता है।
© एन एल चतुर्वेदी (नगीना)

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