What to do during Pregnacy?
गर्भधारण से लेकर शिशु जन्म तक गर्भवती माता के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देँ । गर्भवती को चाहिए कि वो पौष्टिक आहार ही ले, प्रसन्न रहे । कोई वैज्ञानिक सद्ग्रन्थ अवश्य पढ़े जैसे सत्यार्थ प्रकाश, चाणक्य नीति, भगवत गीता, नाड़ी विज्ञान, मनुस्मृति, सँस्कृत स्वयँ शिक्षक, मानस पियूष, वैदिक गणित, अष्टाङ्ग योग, मर्म चिकित्सा आदि । शास्त्रीय सँगीत सुनेँ । माँ के द्वारा गर्भकाल मेँ किया गया चिँतन गर्भस्त शिशु के चेतन मस्तिष्क पर स्वतः अँकित हो जाता है । महाभारत का अभिमन्यु तो याद है ना आपको? आयुर्वेद मेँ वर्णित इस विज्ञान पर जापान, जर्मनी, अमरीका आदि देशोँ मेँ बहुत काम हो रहा है । गर्भ से लेकर 7वेँ महीने तक सिलबट्टे के नियमित प्रयोग से माताओँ को प्रसव हेतु सर्जरी की जरूरत नहीँ पड़ती और बिना सर्जरी के जन्म लेने वाले शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता सर्जरी से जन्मे शिशु की तुलना मेँ बहुत अधिक होती है । आज आप किसी भी शिशुचिकित्सालय मेँ जाकर देख सकते हैँ । आए हुए बीमार बच्चोँ मेँ अधिकाँश बच्चे शल्यप्रसव अर्थात सिजेरियन होगेँ ।
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