October 10, 2019

Story- Emotional Story Daughter and Food

*दुल्हन ने विदाई के वक़्त शादी को किया नामंजूर ‼* आंखों में आसूं आ जाएंगे बड़े ध्यान से पढ़ना
*(कहानी आपको सोचने पर विवश करेगी।)*
*शादी के बाद विदाई का समय था,*
*नेहा अपनी माँ से मिलने के बाद अपने पिता से लिपट कर रो रही थीं।*
*वहाँ मौजूद सब लोगों की आंखें नम थीं।*
*नेहा ने घूँघट निकाला हुआ था,*
*वह अपनी छोटी बहन के साथ सजाई गयी गाड़ी के नज़दीक आ गयी थी।*
*दूल्हा अविनाश अपने खास मित्र विकास के साथ बातें कर रहा था।*
*विकास -'यार अविनाश...*
*सबसे पहले घर पहुंचते ही होटल अमृतबाग चलकर बढ़िया खाना खाएंगे...*
*यहाँ तेरी ससुराल में खाने का मज़ा नहीं आया।*
*तभी पास में खड़ा अविनाश का छोटा भाई राकेश बोला*
*हा यार..पनीर कुछ ठीक नहीं था...*
*और रस मलाई में रस ही नहीं था।*
*और वह ही ही ही कर जोर जोर से हंसने लगा।*
*अविनाश भी पीछे नही रहा*
*अरे हम लोग अमृतबाग चलेंगे, जो खाना है खा लेना...*
*मुझे भी यहाँ खाने में मज़ा नहीं आया..रोटियां भी गर्म नहीं थी...।*
*अपने पति के मुँह से यह शब्द सुनते ही नेहा जो घूँघट में गाड़ी में बैठने ही जा रही थी,*
*वापस मुड़ी, गाड़ी की फाटक को जोर से बन्द किया...*
*घूँघट हटा कर अपने पापा के पास पहुंची...।*
*अपने पापा का हाथ अपने हाथ में लिया..*
*"मैं ससुराल नहीं जा रही पिताजी..."*
*मुझे यह शादी मंजूर नहीं।*
*यह शब्द उसने इतनी जोर से कहे कि सब लोग हक्के बक्के रह गए...*
*सब नज़दीक आ गए।*
*नेहा के ससुराल वालों पर तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा...*
*मामला क्या था यह किसी की समझ में नहीं आ रहा था।*
*तभी नेहा के ससुर राधेश्यामजी ने आगे बढ़कर नेहा से पूछा --*
*"लेकिन बात क्या है बहू ?"*
*शादी हो गयी है...*
*विदाई का समय है अचानक क्या हुआ कि तुम शादी को नामंजूर कर रही हो ?*
*अविनाश की तो मानो दुनिया लूटने जा रही थी...*
*"वह भी नेहा के पास आ गया"*
*अविनाश के दोस्त भी।*
*सब लोग जानना चाहते थे कि आखिर एन वक़्त पर क्या हुआ कि दुल्हन ससुराल जाने से मना कर रही है।*
*नेहा ने अपने पिता दयाशंकरजी का हाथ पकड़ रखा था...*
*नेहा ने अपने ससुर से कहा* *"बाबूजी मेरे माता पिता ने अपने सपनों को मारकर हम बहनों को पढ़ाया लिखाया व काबिल बनाया है।"*
*आप जानते है एक बाप केलिए बेटी क्या मायने रखती है ??*
*आप व आपका बेटा नहीं जान सकते क्योंकि आपके कोई बेटी नहीं है।*
*नेहा रोती हुई बोले जा रही थी-*
*आप जानते है मेरी शादी के लिए व शादी में बारातियों की आवाभगत में कोई कमी न रह जाये इसलिए मेरे पिताजी पिछले एक साल से रात को 2-3 बजे तक जागकर मेरी माँ के साथ योजना बनाते थे...*
*खाने में क्या बनेगा...*
*रसोइया कौन होगा...*
*पिछले एक साल में मेरी माँ ने नई साड़ी नही खरीदी क्योकि मेरी शादी में कमी न रह जाये...*
*दुनिया को दिखाने केलिए अपनी बहन की साड़ी पहन कर मेरी माँ खड़ी है...*
*मेरे पिता की इस डेढ़ सौ रुपये की नई शर्ट के पीछे बनियान में सौ छेद है....*
*"मेरे माता पिता ने कितने सपनों को मारा होगा..."*
*न अच्छा खाया न अच्छा पीया...*
*बस एक ही ख्वाहिश थी कि मेरी शादी में कोई कमी न रह जाये...*
*आपके पुत्र को रोटी ठंडी लगी!!!*
*उनके दोस्तों को पनीर में गड़बड़ लगी व मेरे देवर को रस मलाई में रस नहीं मिला...*
*इनका खिलखिलाकर हँसना मेरे पिता के अभिमान को ठेस पहुंचाने के समान है...।*
*नेहा हांफ रही थी...।*
*नेहा के पिता ने रोते हुए कहा* *लेकिन बेटी इतनी छोटी सी बात..।*
*नेहा ने उनकी बात बीच मे काटी*
*यह छोटी सी बात नहीं है पिताजी...*
*मेरे पति को मेरे पिता की इज्जत नहीं...*
*रोटी क्या आपने बनाई !*
*रस मलाई ... पनीर यह सब केटर्स का काम है...*
*आपने दिल खोलकर व हैसियत से बढ़कर खर्च किया है,*
*कुछ कमी रही तो वह केटर्स की तरफ से...*
*आप तो अपने दिल का टुकड़ा अपनी गुड़िया रानी को विदा कर रहे है ???*
*आप कितनी रात रोयेंगे क्या मुझे पता नहीं...*
*माँ कभी मेरे बिना घर से बाहर नही निकली...*
*कल से वह बाज़ार अकेली जाएगी...*
*जा पाएगी ?*
*जो लोग पत्नी या बहू लेने आये हैं वह खाने में कमियां निकाल रहे हैं...*
*मुझमे कोई कमी आपने नहीं रखी,*
*यह बात इनकी समझ में नही आई ??*
*दयाशंकर जी ने नेहा के सर पर हाथ फिराया*
*अरे पगली... बात का बतंगड़ बना रही है...*
*मुझे तुझ पर गर्व है कि तू मेरी बेटी है लेकिन बेटा इन्हें माफ कर दे....*
*तुझे मेरी कसम, शांत हो जा।*
*तभी अविनाश ने आकर दयाशंकर जी के हाथ पकड़ लिए*
*"मुझे माफ़ कर दीजिए बाबूजी..."*
*मुझसे गलती हो गयी...*
*मैं ...मैं उसका गला बैठ गया था..*
*रो पड़ा था वह।*
*तभी राधेश्यामजी ने आगे बढ़कर नेहा के सर पर हाथ रखा*
*मैं तो बहू लेने आया था लेकिन ईश्वर बहुत कृपालु है*
*उसने मुझे बेटी दे दी...*
*व बेटी की अहमियत भी समझा दी...*
*मुझे ईश्वर ने बेटी नहीं दी शायद इसलिए कि तेरे जैसी बेटी मेरी नसीब में थी...*
*अब बेटी इन नालायकों को माफ कर दें...*
*मैं हाथ जोड़ता हूँ तेरे सामने...*
*"मेरी बेटी नेहा मुझे लौटा दे।"*
*और दयाशंकर जी ने सचमुच हाथ जोड़ दिए थे व नेहा के सामने सर झुका दिया।*
*नेहा ने अपने ससुर के हाथ पकड़ लिए...'बाबूजी।*
*राधेश्यामजी ने कहा*
*"बाबूजी नहीं..पिताजी।"*
*नेहा भी भावुक होकर राधेश्याम जी से लिपट गयी थी।*
*दयाशंकर जी ऐसी बेटी पाकर गौरव की अनुभूति कर रहे थे।*
*नेहा अब राजी खुशी अपने ससुराल रवाना हो गयी थीं...*
*पीछे छोड़ गयी थी आंसुओं से भीगी अपने माँ पिताजी की आंखें,*
*अपने पिता का वह आँगन जिस पर कल तक वह चहकती थी..*
*आज से इस आँगन की चिड़िया उड़ गई थी किसी दूर प्रदेश में..*
*और किसी पेड़ पर अपना घरौंदा बनाएगी।*
*यह कहानी लिखते वक्त मैं उस मूर्ख व्यक्ति के बारे में सोच रहा था जिसने बेटी को सर्वप्रथम "पराया धन" की संज्ञा दी होगी।*
*बेटी माँ बाप का अभिमान व अनमोल धन होता है*
*"पराया धन नहीं।"*
*कभी हम शादी में जाये तो ध्यान रखें कि पनीर की सब्ज़ी बनाने में एक पिता ने कितना कुछ खोया होगा व कितना खोएगा...*
*अपना आँगन उजाड़ कर दूसरे के आंगन को महकाना कोई छोटी बात नहीं।*
*खाने में कमियां न निकाले... ।*
*बेटी की शादी में बनने वाले पनीर, रोटी या रसमलाई पकने में उतना समय लगता है जितनी लड़की की उम्र होती है।*
*यह भोजन सिर्फ भोजन नहीं,*
*पिता के अरमान व जीवन का सपना होता है।*
*बेटी की शादी में बनने वाले पकवानों में स्वाद कई सपनों के कुचलने के बाद आता है व उन्हें पकने में सालों लगते है*
*बेटी की शादी में खाने की कद्र करें।* 🙏
*......….......-------------...........*

Hanuman Chalisa and Management

हनुमान चालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र...

कई लोगों की दिनचर्या हनुमान चालीसा पढ़ने से शुरू होती है। पर क्या आप जानते हैं कि श्री *हनुमान चालीसा* में 40 चौपाइयां हैं, ये उस क्रम में लिखी गई हैं जो एक आम आदमी की जिंदगी का क्रम होता है।

माना जाता है तुलसीदास ने चालीसा की रचना मानस से पूर्व किया था। हनुमान को गुरु बनाकर उन्होंने राम को पाने की शुरुआत की।

अगर आप सिर्फ हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं तो यह आपको भीतरी शक्ति तो दे रही है लेकिन अगर आप इसके अर्थ में छिपे जिंदगी  के सूत्र समझ लें तो आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं।

हनुमान चालीसा सनातन परंपरा में लिखी गई पहली चालीसा है शेष सभी चालीसाएं इसके बाद ही लिखी गई।

हनुमान चालीसा की शुरुआत से अंत तक सफलता के कई सूत्र हैं। आइए जानते हैं हनुमान चालीसा से आप अपने जीवन में क्या-क्या बदलाव ला सकते हैं….

*शुरुआत गुरु से…*

हनुमान चालीसा की शुरुआत *गुरु* से हुई है…

श्रीगुरु चरन सरोज रज,
निज मनु मुकुरु सुधारि।

*अर्थ* - अपने गुरु के चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को साफ करता हूं।

गुरु का महत्व चालीसा की पहले दोहे की पहली लाइन में लिखा गया है। जीवन में गुरु नहीं है तो आपको कोई आगे नहीं बढ़ा सकता। गुरु ही आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं।

इसलिए तुलसीदास ने लिखा है कि गुरु के चरणों की धूल से मन के दर्पण को साफ करता हूं। आज के दौर में गुरु हमारा मेंटोर भी हो सकता है, बॉस भी। माता-पिता को पहला गुरु ही कहा गया है।

समझने वाली बात ये है कि गुरु यानी अपने से बड़ों का सम्मान करना जरूरी है। अगर तरक्की की राह पर आगे बढ़ना है तो विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करें।

*ड्रेसअप का रखें ख्याल…*

चालीसा की चौपाई है

कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुंचित केसा।

*अर्थ* - आपके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है, सुवेष यानी अच्छे वस्त्र पहने हैं, कानों में कुंडल हैं और बाल संवरे हुए हैं।

आज के दौर में आपकी तरक्की इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप रहते और दिखते कैसे हैं। फर्स्ट इंप्रेशन अच्छा होना चाहिए।

अगर आप बहुत गुणवान भी हैं लेकिन अच्छे से नहीं रहते हैं तो ये बात आपके करियर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए, रहन-सहन और ड्रेसअप हमेशा अच्छा रखें।

आगे पढ़ें - हनुमान चालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र...

*सिर्फ डिग्री काम नहीं आती*

बिद्यावान गुनी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर।

*अर्थ* - आप विद्यावान हैं, गुणों की खान हैं, चतुर भी हैं। राम के काम करने के लिए सदैव आतुर रहते हैं।

आज के दौर में एक अच्छी डिग्री होना बहुत जरूरी है। लेकिन चालीसा कहती है सिर्फ डिग्री होने से आप सफल नहीं होंगे। विद्या हासिल करने के साथ आपको अपने गुणों को भी बढ़ाना पड़ेगा, बुद्धि में चतुराई भी लानी होगी। हनुमान में तीनों गुण हैं, वे सूर्य के शिष्य हैं, गुणी भी हैं और चतुर भी।

*अच्छा लिसनर बनें*

प्रभु चरित सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मन बसिया।

*अर्थ* -आप राम चरित यानी राम की कथा सुनने में रसिक है, राम, लक्ष्मण और सीता तीनों ही आपके मन में वास करते हैं।
जो आपकी प्रायोरिटी है, जो आपका काम है, उसे लेकर सिर्फ बोलने में नहीं, सुनने में भी आपको रस आना चाहिए।

अच्छा श्रोता होना बहुत जरूरी है। अगर आपके पास सुनने की कला नहीं है तो आप कभी अच्छे लीडर नहीं बन सकते।

*कहां, कैसे व्यवहार करना है ये ज्ञान जरूरी है*

सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा।

*अर्थ* - आपने अशोक वाटिका में सीता को अपने छोटे रुप में दर्शन दिए। और लंका जलाते समय आपने बड़ा स्वरुप धारण किया।

कब, कहां, किस परिस्थिति में खुद का व्यवहार कैसा रखना है, ये कला हनुमानजी से सीखी जा सकती है।

सीता से जब अशोक वाटिका में मिले तो उनके सामने छोटे वानर के आकार में मिले, वहीं जब लंका जलाई तो पर्वताकार रुप धर लिया।

अक्सर लोग ये ही तय नहीं कर पाते हैं कि उन्हें कब किसके सामने कैसा दिखना है।

*अच्छे सलाहकार बनें*

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना।

*अर्थ* - विभीषण ने आपकी सलाह मानी, वे लंका के राजा बने ये सारी दुनिया जानती है।

हनुमान सीता की खोज में लंका गए तो वहां विभीषण से मिले। विभीषण को राम भक्त के रुप में देख कर उन्हें राम से मिलने की सलाह दे दी।

विभीषण ने भी उस सलाह को माना और रावण के मरने के बाद वे राम द्वारा लंका के राजा बनाए गए। किसको, कहां, क्या सलाह देनी चाहिए, इसकी समझ बहुत आवश्यक है। सही समय पर सही इंसान को दी गई सलाह सिर्फ उसका ही फायदा नहीं करती, आपको भी कहीं ना कहीं फायदा पहुंचाती है।

*आत्मविश्वास की कमी ना हो*

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही, जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।

*अर्थ* - राम नाम की अंगुठी अपने मुख में रखकर आपने समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई अचरज नहीं है।

अगर आपमें खुद पर और अपने परमात्मा पर पूरा भरोसा है तो आप कोई भी मुश्किल से मुश्किल टॉस्क को आसानी से पूरा कर सकते हैं।

आज के युवाओं में एक कमी ये भी है कि उनका भरोसा बहुत टूट जाता है। आत्मविश्वास की कमी भी बहुत है। प्रतिस्पर्धा के दौर में आत्मविश्वास की कमी होना खतरनाक है। अपनेआप पर पूरा भरोसा रख.|

Real Fasting for Navratri

*_Real Fasting for Navratri_*

Real fasting for purification of soul is:

1st Day - I will leave all my *Anger*

2nd Day -  I will stop *Judging* People.

3rd Day - I will leave all my  *Grudges*.

4th Day - I will *forgive myself & everyone*

5th Day -  I will *Accept myself &  every one AS they are*

6th Day -  I will *love myself & everyone unconditionally*

7th Day - I will *leave* all my feelings of *Jealousy & Guilt*

8th Day - I will *leave*
all my *Fears*

9th Day - I will *offer* *Gratitude* for all the things I have and all which I will get.

10 - There is *abundance* in the universe for all and I will always tap the same and  create what I want through unconditional love, sadhna, nishkam seva, faith, swamaans

   *Happy Nav Ratri*🙏🏼🙏🏼😊

Story- ख्वाइशें

ख्वाहिशें !

तस्वीर 93 वर्षिय हरभजन कौर की है।

अमृतसर के नज़दीक तरन-तारन में जन्‍मी हरभजन कौर शादी के बाद अमृतसर, लुधियाना में रही और करीब दस साल पहले पति की मौत के बाद वे कुछ समय से अपनी बेटी रवीना के साथ चंडीगढ़ में रहने लगी।

रवीना जानती थी के माँ का जीवन अपने आखरी पड़ाव पर है। एक शाम भावुक हुई रवीना ने सामने बैठी माँ से पूछा " ज़िंदगी में  मलाल तो नहीं न है आपको, कोई चाहत तो बाकी नहीं है। कहीं आने-जाने या कुछ करने या कोई जगह देखने की इच्छा है तो बता दीजिये।"

बिटिया माँ का मन टटोल रही थी। वह चाहती थी के उम्र के इस पड़ाव पर माँ की अगर कोई ख्वाहिश बची है तो वह उसे पूरी कर सके।

परंतु माँ ने जो जवाब दिया उसकी उम्मीद रवीना को बिल्कुल भी नहीं थी।
हरभजन कौर ने कहा "बस, एक ही मलाल है …  मैंने इतनी लंबी उम्र गुज़ार दी और एक पैसा भी नहीं कमाया।”

रवीना स्तब्ध रह गयी। 93 वर्ष की उम्र में माँ पैसे कमाने की इच्छा प्रकट कर रही थी जो असंभव सा जान पड़ता था। परंतु अब तो तीर कमान से निकल चुका था।

माँ की इस  ख्वाहिश को पूरा करने का निर्णय कर रवीना ने हरभजन जी से पूछा "इस उम्र में आप क्या कर सकती हैं!"

जवाब जैसे तैयार था ........चेहरे पर आत्मविश्वास से लबरेज़ हरभजन जी  बोली "मैं बेसन की बर्फी बना सकती हूँ।  घर में धीमी आंच पर भुने बेसन की मेरे हाथ की बर्फी को कोई तो ख़रीददार मिल ही जाएगा …. ” माँ का जवाब सुनते ही रवीना का गला भर आया। उनका आत्मविश्वास देख रवीना की आंखें छलक उठी।

रवीना ने ऑर्गेनिक बाजार नामक एक संस्थान से सम्पर्क किया और उनसे बेसन की बर्फी की खरीदारी के विषय में बात की।
93 वर्षिय माँ के हाथ की बर्फी जब ऑर्गेनिक बाजार के कर्मचारियों ने चखी तो वह स्वाद और शुद्धता के मुरीद हो गये और माँ को उनका पहला "ऑर्डर" मिल गया। बर्फी बना कर ऑर्गेनिक बाजार में भेजी गई तो बदले में पेमेंट मिली।

जब उनकी पहली कमाई को उनके हाथों में रखा गया तो 93 वर्षिय माँ के हाथ कांप उठे। आंखों से झरते आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे के दशकों से दिल में दबी ख्वाहिश पूरी हो गयी थी।

परंतु माँ तो माँ है। हरभजन जी ने पैसों को तीन हिस्सों में बांटा और अपनी पहली कमाई अपनी तीनों बेटियों के हाथों में सौंप दी।

माँ की इच्छा तो पूरी हो गयी परंतु जिंसने जिंसने माँ के हाथ की बर्फी चखी उसकी ईच्छा दोबारा चखने की हुई। ऑर्डर पर आर्डर आने लगे। हरभजन जी ने भी कमर कस ली। जितना संभव हो सका उतना काम करने लगी। बर्फी का स्वाद चंडीगढ़ वासियों की ज़ुबाँ पर ऐसा बैठा के लोग माँ के हाथ के बने इस मिष्ठान के मुरीद हो गये।

आज माँ के हाथ की बनाई हुई बर्फी एक ब्रैंड बन चुकी है। ब्रैंड का नाम है  "Harbhajan's" और टैगलाइन है ”बचपन की याद आ जाये"।

कितनी ख्वाहिशें हैं जो हम सब के सीने में दफन हैं।..........यह सवाल किसी और से नहीं खुद से पूछने की ज़रूरत है......कितनी खव्हिशें हैं जिन्हें पूरा करने के लिये हम उपयुक्त समय का इंतज़ार कर रहे हैं। यह जानते हुये भी के इस क्षणभंगुर जीवन में अगले सेकिंड जीने की गेरंटी नहीं है।

93 वर्षिय अम्मा से कुछ सीखना होगा। बेशक लज़ीज़ बर्फी बनाना ना सीख सकें परंतु दिल के कोने में दबी उन ख्वाहिशों को पूरा करने का जज़्बा और जुनून सीखना होगा।👇🏾👇🏾👇🏾👇🏾👍👍👋👋

October 04, 2019

Story- God, Temple and Society

बहुत सुन्दर कथा

एक महिला रोज मंदिर जाती थी ! एक दिन उस महिला ने पुजारी से कहा अब मैं मंदिर नही आया करूँगी !

इस पर पुजारी ने पूछा -- क्यों ?

तब महिला बोली -- मैं देखती हूँ लोग मंदिर परिसर में अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते हैं ! कुछ ने तो मंदिर को ही गपशप करने का स्थान चुन रखा है ! कुछ पूजा कम पाखंड,दिखावा ज्यादा करते हैं !

इस पर पुजारी कुछ देर तक चुप रहे फिर कहा -- सही है ! परंतु अपना अंतिम निर्णय लेने से पहले क्या आप मेरे कहने से कुछ कर सकती हैं !

महिला बोली -आप बताइए क्या करना है ?

पुजारी ने कहा -- एक गिलास पानी भर लीजिए और 2 बार मंदिर परिसर के अंदर परिक्रमा लगाइए । शर्त ये है कि गिलास का पानी गिरना नहीं चाहिये !

महिला बोली -- मैं ऐसा कर सकती हूँ !

फिर थोड़ी ही देर में उस महिला ने ऐसा ही कर दिखाया ! उसके बाद मंदिर के पुजारी ने महिला से 3 सवाल पूछे -

1.क्या आपने किसी को फोन पर बात करते देखा?

2.क्या आपने किसी को मंदिर में गपशप करते देखा?

3.क्या किसी को पाखंड करते देखा?

महिला बोली -- नहीं मैंने कुछ भी नहीं देखा !

फिर पुजारी बोले --- जब आप परिक्रमा लगा रही थीं तो आपका पूरा ध्यान गिलास पर था कि इसमें से पानी न गिर जाए इसलिए आपको कुछ दिखाई नहीं दिया|

अब जब भी आप मंदिर आयें तो अपना ध्यान सिर्फ़ परम पिता परमात्मा में ही लगाना फिर आपको कुछ दिखाई नहीं देगा| सिर्फ भगवान ही सर्वत्र दिखाई देगें|

      '' जाकी रही भावना जैसी ..
        प्रभु मूरत देखी तिन तैसी|''

जीवन मे दुःखो के लिए कौन जिम्मेदार है ?

👉🏻ना भगवान,
👉🏻ना गृह-नक्षत्र,
👉🏻ना भाग्य,
👉🏻ना रिश्तेदार,
👉🏻ना पडोसी,
👉🏻ना सरकार,

जिम्मेदार आप स्वयं है|

1) आपका सरदर्द, फालतू विचार का परिणाम|

2) पेट दर्द, गलत खाने का परिणाम|

3) आपका कर्ज, जरूरत से ज्यादा खर्चे का परिणाम|

4) आपका दुर्बल /मोटा /बीमार शरीर, गलत जीवन शैली का परिणाम|

5) आपके कोर्ट केस, आप के अहंकार का परिणाम|

6) आपके फालतू विवाद, ज्यादा व् व्यर्थ बोलने का परिणाम|

            उपरोक्त कारणों के अलावा सैकड़ों कारण है और बेवजह दोषारोपण दूसरों पर करते रहते हैं | इसमें ईश्वर दोषी नहीं है|
अगर हम इन कष्टों के कारणों पर बारिकी से विचार करें तो पाएंगे की कहीं न कहीं हमारी मूर्खताएं ही इनके पीछे है|
*_गिले-शिकवे सिर्फ़ साँस लेने तक ही चलते हैं,_*
   *_बाद में तो सिर्फ़ पछतावे रह जाते हैं..!!_
💐👏🏻
आपका जीवन प्रकाशमय हो तथा शुभ हो l

A symbol of Love??? Tajmahal or Ram Setu

🌹🌹🙏🙏🙏

*बच्चे के जवाब ने आँखें खोल दी*

मैडम - उस इमारत का नाम बताओ जो प्रेम के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध है ।

समूची कक्षा , जो 90% हिंदु छात्रों से भरी थी , एक साथ पुकार उठी , " *आगरा का ताजमहल "*

तब एक छात्र खड़ा हुआ और कहा , " मैडम जी , विश्वभर में प्रेम के प्रतीक के रूप में *"रामसेतु"* प्रसिद्ध है, जिसे श्रीराम ने अपनी प्रिय पत्नी श्रीसीताजी की रक्षा हेतु *अहंकार से गरजते समुद्र की छाती* पर बनवा डाला था , और फिर सेना सहित उस पुल से होते हुए लंका पर आक्रमण कर रावण का कुलसहित मर्दन कर *अपनी प्रिय पत्नी* को सकुशल वापिस ले आये ।
*श्रीराम ने सेतु बाँधने वाले वानरों के हाथ नही काटे* ,
बल्कि *प्रेमसहित* उन्हें अयोध्या ले गए । *ये प्रेम है* !

आज पहली बार टीचर की आंखें खुली!

लेकिन.......
क्या हमारी आंखें भी खुली?

🌹🌹🙏🙏🙏

Story - Surprise Test

🍃SURPRISE TEST......
     🧨🧨🧨🧨🧨🧨
        एक प्रोफ़ेसर अपनी क्लास में आते ही बोले,
........“चलिए,आज आप सभी का Surprise Test हो जाय।"
         सुनते ही घबराहट फैल गई Students में!
         कुछ किताबों के पन्ने पलटने लगे तो कुछ लगे पढ़ने सर के दिए नोट्स।
         “ये सब कुछ काम नहीं आएगा….”, प्रोफेसर साहब मुस्कुराते हुए बोले, Questionpaper
.............रख रहा हूँ आपके सामने, जब सारे पेपर बट जाएं तभी आप उसे पलट कर देखें।" 
        बाँट दिए गए पेपर्स सभी Students को।
         “ठीक है ! अब आप पेपर देख सकते हैं।"बोले प्रोफेसर साहब।
         
अगले ही क्षण सभी *Question paper को  निहार रहे थे, 
       लेकिन यह क्या?       .............कोई प्रश्न था ही नहीं उस पेपर में !
        था तो White पेपर पर केवल एक Black स्पॉट⚫
       "यह क्या सर?  इसमें तो Question है ही नहीं!", एक छात्र खड़ा होकर बोला ।
         “जो भी है आपके सामने है। आपको बस इसी को Explain करना है।लेकिन!ध्यान रहे इसके लिए आपके पास केवल 10 मिनट ही हैं And ur time starts now."
           चुटकी बजाते 😊 मुस्कुराते हुए बोले प्रोफेसर।
         कोई चारा न था उन हैरान Students के पास।
       वे जुट गए उस अजीब से प्रश्न का  Answer लिखने में।
       10 मिनट बीतते ही प्रोफेसर साहब ने फिर से बजाई चुटकी Time is over.और लगे Answer Sheets collect करने।
          Students अभी भी हैरान परेशान।
           प्रोफेसर साहब ने सभी Answer Sheets चैक कीं।
         सभी ने ⚫ Black स्पॉट ⚫ को अपनी तरह से समझाने की कोशिश की थी, लेकिन किसी ने भी उस स्पॉट के चारों ओर मौजूद White Space के बारे में लिखने  की जहमत ही नहीं उठाई।
           प्रोफ़ेसर साहब गंभीर होते हुए बोले,“इस Test  का आपके Academics से कोई लेना-देना नहीं है, ना ही मैं इसके कोई Marks देने वाला हूँ। इस Test के पीछे मेरा एक ही मकसद है..........
...............मैं आपको जीवन की एक अद्भुत सच्चाई बताना चाहता हूँ।
         देखिये! यह पेपर 99% White है…...
.........लेकिन आप में से किसी ने भी इसके बारे में नहीं लिखा और अपना 100% Answer केवल उस  एक चीज को Explain करने में लगा दिया जो मात्र 1% है….........
.............. यही बात हमारी  Life में भी देखने को मिलती है।
.............. Problems हमारे जीवन का एक छोटा सा हिस्सा होती हैं, लेकिन हम अपना पूरा ध्यान इन्हींपर लगा देते हैं….....
...........कोई दिन रात अपने Looks को लेकर परेशान रहता है तो कोई अपने carrier  को लेकर चिंता में डूबा रहता है, तो कोई पैसों का रोना रोता रहता है,कोई दूसरे की छोटी सी गलती को अपने दिमाग में रखे रखता है।
          क्यों नहीं हम अपनी  Blessings Count कर खुश होते हैं….....
..............क्यों नहीं हम पेट भर खाने के लिए उस सर्व शक्तिवान प्रभु को Thanks कहते हैं….......?
         क्यों नहीं हम अपनी प्यारी सी फैमिली के लिए शुक्रगुजार होते हैं….....?
         क्यों नहीं हम Life की उन 99% चीजों की तरफ ध्यान देते जो सचमुच हमारे जीवन को अच्छा बनाती हैं.........?
         क्यों नहीं हम अपने मित्रों सम्बन्धियों की Mistakes को Ignore कर अपने Relations को टूटने से बचाते है..........?
      Students प्रोफेसर साहब की दी गई इस सीख से गदगद थे।
           आईये आज से  ही हम  Life की Problems  को ज्यादा  Seriously  लेना छोडें,मित्रों/सम्बन्धियों की  Mistakes  को भूलें और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को..........
........... ENJOY करना सीखें तभी हम ज़िन्दगी को सही मायने में जी पायेंगे......
        सही है न ✅✅✅

Why Meditation is Necessary

*WHY  MEDITATION is  necessary from the Medical Science's point of view?*💐🌷🙋

*From the time of the  birth till be death the heart works continuously. Everyday the heart pumps 7000 litres of blood, of which 70% blood is pumped to the Brain and the remaining 30% to the rest of body.*

*How does the heart work so efficiently and effectively?*

*Heart works effectively because it follows a discipline. In normal conditions the heart takes 0.3 secs to contract {systole} and 0.5 secs to relax {diastole}.*

*So, 0.3 + 0.5 = 0.8 secs are required by the heart to complete one beat {1 cardiac cycle}.*

*That means in 1 min, the heart beats 72 times which is considered as normal heart beat.*

*During the relaxing phase of 0.5 secs the impure blood travels through the lungs and becomes 100% pure.*

*In some stressful conditions, the body demands more blood in less time and in this situation the heart reduces the relaxing period of 0.5 secs to 0.4 secs. Thus, in this case the heart beats 82 times in 1min and only 80% of blood gets purified.*

*On more and more demand the relaxing time is further reduced to 0.3 secs & then only 60% of blood is purified.*

*Imagine the consequences of the lesser Oxygenated blood circulating in our Arteries.*

*Deep Breathing is the key to ensure better Oxygenation of the blood.*

*Factors responsible for the activity of the brain :*

*1. 25% - 30% is due to the Diet we consume.*

*2. 70% - 75% is due to the emotions, attitude, memories and other processes of the brain.*

*Thus, to calm the brain and reduce the demand on the heart to pump more and more blood, brain needs to be given a rest.*

*Meditation is the most useful tool to calm an agitated mind.*

*When we sit with eyes closed and meditate, the brain gets calmer, heart gets rested, thus insulating us from the Diseases of Heart & Brain.*

*MEDITATION IS THE KEY TO THE REAL HEALING.  😃🎺🐢🐢🚴🏻‍♂

October 03, 2019

A poem on Nathuram Godse(नाथूराम गोडसे पर कविता)

*आज नथुराम गोडसे की कविता मिली देखना ना भूले सच क्या था*

*वर्षों बाद किसी एक कवि ने दबे सच को फिर से उजागर करने की कोशिश की है !*

*आप सभी  साहित्य प्रेमी पाठकों के लिए कवि की मूल कविता नीचे विस्तार से लिखी गयी है !* 
                                 
          🙏🙏🇮🇳🙏🙏
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*माना गांधी ने कष्ट सहे थे ,*   
*अपनी पूरी निष्ठा से ।*
*और भारत प्रख्यात हुआ है,*
*उनकी अमर प्रतिष्ठा से ॥*

*किन्तु अहिंसा सत्य कभी,*
*अपनों पर ही ठन जाता है ।*
*घी और शहद अमृत हैं पर ,*
*मिलकर के विष बन जाता है।*

*अपने सारे निर्णय हम पर,*
*थोप रहे थे गांधी जी।*
*तुष्टिकरण के खूनी खंजर,*
*घोंप रहे थे गांधी जी ॥*

*महाक्रांति का हर नायक तो,*
*उनके लिए खिलौना था ।*
*उनके हठ के आगे,*        
*जम्बूदीप भी बौना था ॥*

*इसीलिये भारत अखण्ड,*
*अखण्ड भारत का दौर गया ।*
*भारत से पंजाब, सिंध,*
*रावलपिंडी,लाहौर गया ॥*

*तब जाकर के सफल हुए,*     
*जालिम जिन्ना के मंसूबे।*
*गांधी जी अपनी जिद में ,*
*पूरे भारत को ले डूबे॥*

*भारत के इतिहासकार,*
*थे चाटुकार दरबारों में ।*
*अपना सब कुछ बेच चुके थे,*
*नेहरू के परिवारों में ॥*

*भारत का सच लिख पाना,*
*था उनके बस की बात नहीं ।*
*वैसे भी सूरज को लिख पाना,*
*जुगनू की औकात नहीं ॥*

*आजादी का श्रेय नहीं है,*   
*गांधी के आंदोलन को ।*
*इन यज्ञों का हव्य बनाया,*
*शेखर ने पिस्टल गन को ॥*

*जो जिन्ना जैसे राक्षस से,*
*मिलने जुलने जाते थे ।*
*जिनके कपड़े लन्दन, पेरिस,*
*दुबई में धुलने जाते थे ॥*

*कायरता का नशा दिया है,*
*गांधी के पैमाने ने ।*
*भारत को बर्बाद किया,*   
*नेहरू के राजघराने ने ॥*

*हिन्दू अरमानों की जलती,*
*एक चिता थे गांधी जी ।*
*कौरव का साथ निभाने वाले,*
*भीष्म पिता थे गांधी जी ॥*

*अपनी शर्तों पर आयरविन तक,*
*को भी झुकवा सकते थे ।*
*भगत सिंह की फांसी को,*    
*दो पल में रुकवा सकते थे ।।*

*मन्दिर में पढ़कर कुरान,*             
*वो विश्व विजेता बने रहे ।*
*ऐसा करके मुस्लिम जन,*   
*मानस के नेता बने रहे ॥*

*एक नवल गौरव गढ़ने की,*
*हिम्मत तो करते बापू  ।*
*मस्जिद में गीता पढ़ने की,*
*हिम्मत तो करते बापू ॥*

*रेलों में, हिन्दू काट-काट कर,*
*भेज रहे थे पाकिस्तानी ।*
*टोपी के लिए दुखी थे वे,*     
*पर चोटी की एक नहीं मानी ॥*

*मानों फूलों के प्रति ममता,*
*खतम हो गई माली में ।*
*गांधी जी दंगों में बैठे थे,*
*छिपकर नोवाखाली में ॥*

*तीन दिवस में श्री राम का,*
*धीरज संयम टूट गया ।*
*सौवीं गाली सुन, कान्हा का*
*चक्र हाथ से छूट गया ॥*

*गांधी जी की पाक, परस्ती पर*
*जब भारत लाचार हुआ ।*
*तब जाकर नथू,*                 
*बापू वध को मज़बूर हुआ ॥*

*गये सभा में गांधी जी,*          
*करने अंतिम प्रणाम ।*
*ऐसी गोली मारी गांधी को,*
*याद आ गए श्री राम ॥*

*मूक अहिंसा के कारण ही*
*भारत का आँचल फट जाता ।*
*गांधी जीवित होते तो*          
*फिर देश,  दुबारा बंट जाता ॥*

*थक गए हैं हम प्रखर सत्य की*
*अर्थी को ढोते ढोते ।*
*कितना अच्छा होता जो*       
*"नेताजी" राष्ट्रपिता होते ॥*

*नथू को फाँसी लटकाकर*
*गांधी जो को न्याय मिला ।*
*और मेरी भारत माँ को*      
*बंटवारे का अध्याय मिला ॥*

*लेकिन जब भी कोई भीष्म*
*कौरव का साथ निभाएगा ।*
*तब तब कोई अर्जुन रण में*
*उन पर तीर चलाएगा ॥*

*अगर गोडसे की गोली*       
*उतरी ना होती सीने में ।*
*तो हर हिन्दू पढ़ता नमाज ,*
*फिर मक्का और मदीने में ॥*

*भारत की बिखरी भूमि*
*अब तलक समाहित नहीं हुई ।*
*नथू की रखी अस्थि*          
*अब तलक प्रवाहित नहीं हुई ॥*

*इससे पहले अस्थिकलश को*
*सिंधु सागर की लहरें सींचे ।*
*पूरा पाक समाहित कर लो*    
*इस भगवा झंडे के नीचें ॥*
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BRAND Archetypes through lens -Indian-Brands

There has been so much already written about brand archetypes and this is certainly not one more of those articles. In fact, this is rather ...