January 14, 2013

संस्कृति- TAJ MAHAL OR TEJOMAHALAYA


मैं जब 10 वर्ष का था, उस समय मेरी  हिन्दी पुस्तक में एक पाठ ताजमहल पर था। जिस दिन वह पाठ पढ़ाया जाना था उस दिन कक्षा के सभी बालक अत्यधिक उल्लसित थे। उस पाठ में ताजमहल की भव्यता-शुभ्रता का वर्णन तो था ही, उससे अधिक उससे जुड़े मिथकों का वर्णन जिन्हें हमारे शिक्षक ने अतिरज्जित रूप से बढ़ा दिया था। मेरे बाल मन पर यह बात पूर्णरूप से अंकित हो गई कि यह विश्व प्रसिद्ध ताज मुगल सम्राट्‌ शाहजहाँ ने बनवाया था।

 एक विशेष कार्य से जीवन में पहली बार आगरा आया। वह विशिष्ट कार्य हम दोनों के मन पर इतना अधिक प्रभावी था कि मार्ग में एक बार भी यह ध्यान नहीं आया कि इसी आगरा में विश्व प्रसिद्ध दर्शनीय ताजमहल है। कार्य हो जाने पर जब हम लोग बालूगंज से आगरा किला स्टेशन की ओर लौट रहे थे तो लम्बी ढलान के नीचे चौराहे से जो एकाएक दाहिनी ओरदृष्टि पड़ी तो सूर्य की आभा में ताजमहल हमारे सम्मुख अपनी पूर्ण भव्यता में खड़ा था। हम दोनों कुछ क्षण तो स्तब्ध से खड़े रहे गये, तदुपरान्त किसी साईकिल वाले की घंटी सुनकर ह लोगों को चेत हुआ।

जहाँ पर हम लोग खड़े थे वहाँ पर चारों ओर की सड़कें चढ़ाई पर जाती थीं। ऐसा प्रतीत होता था कि दाहिनी ओर चढ़ाई समाप्त होते ही नीचे मैदान में थोड़ी दूर पर ही ताजमहल है, अतः हम लोग उसी ओर बढ़ लिये। ऊपर पहुँच कर यह तो आभास हुआ कि ताजमहल वहाँ से पर्याप्त दूर है, परन्तु गरीबी के दिन थे, अस्तु हम लोग पैदल ही दो मील से अधिक का मार्ग तय कर गये। उन दिनों ताजमहल दर्शन के लिये टिकट नहीं लेना पड़ता था। और गाइड करने का तो प्रश्न ही नहीं था, परन्तु जिन लोगों ने गाइड किये हुए थे लगभग उनके तसाथ चलते हुए हमने उनकी बबकवास र्पाप्त सुनी जो उस दिन तो अच्छी ही लगी थी।

उस प्रथम दर्शन में ताजमहल मुझे अपनी कल्पना से भी अधिक भव्य तथा सुन्दर लगा था। उसकी चित्रकारी तथा पत्थर पर खुदाई  कटाई का कार्य अद्‌भुत था, फिर भी मुझे एक दो बातें कचौट गई थीं। बुर्जियों, छतरियों, मेहराबों में स्पष्ट हिन्दू-कला केदर्शन हो रहे थे। मुखय द्वार के ऊपर की बनी बेल तथा कलाकृति उसी दिन मैं कई मकानों के द्वार पर आगरा में ही देख चुका था। मैंने अपने मित्र जी से अपनी शंका प्रकट की तो उन्होंने गाइडों की भाषा में ही शाहजहाँ के हिन्दू प्रिय होने की बात कह कर मेरा समाधान कर दिया, परन्तु मैं पूर्णतया सन्तुष्ट नहीं हुआ एवं मेरे अन्तर्मन में कहीं पर यह सन्देह बहुत काल तक प्रच्छन्न रूप में घुसा रहा।
मेरी जिज्ञासा को प्रोफेसर p.n oak ने शांत किया 


http://en.wikipedia.org/wiki/P._N._Oak

http://tajmahal.gaupal.in/bhumika 

और मेरे पीछे के ब्लॉग मैं आप ताजमहल के बारे मैं विस्तृत विवरण पद सकते हैं ..........



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