संस्कृति - विमानशास्त्र - The Lavitation Theory Part- 1
विज्ञान प्रसार (वि.प्र.) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की
रिपोर्ट
New Evidence of Ancient Indian Science Of Space Travel Source:
Conspiracy Journal#205 April 11, 2003
कुछ सालों पहले चीन पुरातत्त्व सरकार ने ल्हासा तथा तिब्बत में
संस्कृत दस्तावेजों की खोज की है और उन्हें अनुवाद करने के लिए
University of Chandigarh भेजा गया है।
इस विश्वविध्यालय की Dr. Ruth Reyna ने बताया कि इन दस्तावेजों
में विमान का अंतरतारकीय माध्यम के निर्माण करने की बिधि दी है।
अंतरखगोलीय माध्यम या अंतरतारकीय माध्यम हाइड्रोजन और
हिलीयम के कणों का मिश्रण होता है जो अत्यंत कम घनत्व की स्थिती
मे सारे ब्रह्मांड मे फैला हुआ रहता है।
अंग्रेज़ी में "अंतरतारकीय" को "इन्टरस्टॅलर" (interstellar) और
"अंतरतारकीय माध्यम" को "इन्टरस्टॅलर मीडयम" (interstellar
medium) कहते हैं।
उन्होंने आगे बताया विमान को संचालित करने के लिए गुरुत्वाकर्षण
विरोधी (anti-gravitational) शक्ति की आवश्यकता होती है और anti-
gravitational की प्रणाली "laghima" शक्ति प्रणाली अनुरूप होती है।
"laghima" की संस्कृत में सिद्धि कहते है और इंग्लिश में levitation
कहा जाता है। levitation की शक्ति को आप इस विडियो में देख सकते
हैं जो की anti-gravitational होती है।
यही अंतरतारकीय माध्यम (interstellar medium) विमान के अन्दर
levitation power को activate करता है और विमान ऊपर की ओर
उठता है।
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levitation-laghima
जैसा की हम अपने ग्रंथो में देखते हैं कि भगवन, ऋषि तथा कई देवता
वायु मार्ग द्वारा आते थे। ये वही anti-gravitational वाली levitation
शक्ति का प्रयोग करते थे।
इसी levitation शक्ति (विमानों के लिए) का वर्णन और प्रणाली, चीन
को उन दस्तावोजों में मिली है। जिसका अनुवाद किया जा रहा है।
levitation power कोई तंत्र विद्या द्वारा नहीं की जाती है। यह एक
ब्रह्मांडीय शक्ति है। जिसको करने के लिए तप और कई नियमों का पालन
करना पड़ता है।
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।। जयतु संस्कृतम् । जयतु भारतम् ।।

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